नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में राज्य भर के डॉक्टर रहे हड़ताल पर, ओपीडी ठप, रिम्स से 900 मरीज लौटे
Updated at : 01 Aug 2019 5:26 AM (IST)
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रांची : इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के राष्ट्रीय आह्वान पर बुधवार को राज्य भर के सरकारी डॉक्टर हड़ताल पर रहे. डॉक्टर नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) बिल का विरोध कर रहे हैं. हड़ताल से राज्य के तीनों मेडिकल कॉलेज, सदर अस्पताल व पीएचसी-सीएचसी की ओपीडी सेवाएं प्रभावित रहीं. डॉक्टर अस्पताल तो आये, लेकिन ओपीडी में नहीं […]
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रांची : इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के राष्ट्रीय आह्वान पर बुधवार को राज्य भर के सरकारी डॉक्टर हड़ताल पर रहे. डॉक्टर नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) बिल का विरोध कर रहे हैं. हड़ताल से राज्य के तीनों मेडिकल कॉलेज, सदर अस्पताल व पीएचसी-सीएचसी की ओपीडी सेवाएं प्रभावित रहीं. डॉक्टर अस्पताल तो आये, लेकिन ओपीडी में नहीं बैठे. शाम के ओपीडी में भी डॉक्टर नहीं बैठे़ इस कारण रिम्स से 900 से ज्यादा मरीज बिना परामर्श के लौट गये.
रिम्स में ओपीडी सेवाएं 10:30 बजे के बाद बाधित हो गयीं. ओपीडी में सेवा दे रहे सीनियर डॉक्टरों को जूनियर डाॅक्टरों ने अपने भविष्य का हवाला देते हुए उनसे कार्य बहिष्कार में शामिल होने का आग्रह किया.
इसके बाद सीनियर डॉक्टर अोपीडी से निकल गये. डाॅक्टरों को जाते देख कई मरीजों ने उनसे देख लेने का आग्रह किया, लेकिन वह हड़ताल का हवाला देकर चले गये. सदर अस्पताल व डोरंडा अस्पताल में भी डाॅक्टरों के कार्य बहिष्कार का असर दिखा. वहां भी डॉक्टरों का कमरा खाली पड़ा हुआ था. मरीज लौट रहे थे. हालांकि आइएमए व जूनियर डॉक्टरों का दावा है कि इमरजेंसी सेवाएं बाधित नहीं थीं.
जूनियर डॉक्टरों ने कहा : बिल लागू होने से झोलाछाप बन जायेंगे डॉक्टर
जूनियर डाॅक्टर सबसे पहले कार्डियोलॉजी विंग में एकत्र हुए और एनएमसी बिल के विरोध में जारेबाजी की. इसके बाद वह पुरानी बिल्डिंग के पंजीयन काउंटर के सामने गये. वहां मरीजों को बताया कि एनएमसी बिल के पास होने से झोलाछाप भी एमबीबीएस के समान मरीजों को सेवा देने के लिए अधिकृत हो जायेंगे. देश के बाहर से पढ़ कर आये विद्यार्थी भी पीजी में शामिल हो पायेंगे, जिससे मेडिकल का स्तर गिर जायेगा.
रांची : राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में बुधवार को झोलाछाप सावन कुमार बेदिया मेडिसिन वार्ड में भर्ती मरीज स्नेह कुमारी का झाड़फूक करते हुए पकड़ा गया. वह मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम को चुनौती देते हुए अपनी पद्धति से इलाज करने आया था.
झाड़फूक करने व जड़ी बूटी देते देख लोगों ने इसकी जानकारी वार्ड के नर्स को दी. इसके बाद वार्ड में झाड़फूक कर रहे झोलाछाप की जानकारी बरियातू पुलिस को दी गयी. जानकारी होने पर पुलिस ने उसे पकड़ लिया. वह रिम्स में घूमने वाले दलालों के सहयोग से मरीजाें को ठगता था. इलाज के लिए वह ग्रामीणों से 10,000 से ज्यादा पैसा लेता था. जान बचाने की खौफ से लोग उसे पैसा भी देते थे.
गौरतलब है कि इससे पहले वह रिम्स में सांप काटने के बाद इलाज कराने आयी तीजनी देवी का इमरजेंसी में इलाज किया था, जिसकी बाद में मौत हो गई थी. इधर, सावन ने पुलिस को बताया कि कहा कि वह आयुर्वेद पद्धति से सांप काटने वाले मरीज का इलाज करता है.
करैत सांप व नाग सांप का उसके पास शर्तिया इलाज है. मरीज के परिजन मुझे इलाज करने के लिए फोन करते हैं. वहीं महिला की स्थिति गंभीर है. वहीं बरियातू पुलिस का कहना है कि मरीज व आरोपी के बीच समझौता होने के बाद उसे छोड़ दिया गया है.
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