मोबाइल पर 10 मिनट पहले मिल जायेगी वज्रपात की सूचना
Author Prabhat khabar digital desk
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संजय, रांची : झारखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (जेसैक) ने आम लोगों को वज्रपात की अग्रिम सूचना देने की नयी प्रणाली विकसित की है. इसके जरिये वज्रपात से करीब 10 मिनट पहले संबंधित इलाके के लोगों के मोबाइल पर वज्रपात की आशंका तथा सावधानी बरतने संबंधी संदेश जायेगा. यह तकनीक भारतीय मौसम विभाग (आइएमडी) द्वारा हर […]
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संजय, रांची : झारखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (जेसैक) ने आम लोगों को वज्रपात की अग्रिम सूचना देने की नयी प्रणाली विकसित की है. इसके जरिये वज्रपात से करीब 10 मिनट पहले संबंधित इलाके के लोगों के मोबाइल पर वज्रपात की आशंका तथा सावधानी बरतने संबंधी संदेश जायेगा. यह तकनीक भारतीय मौसम विभाग (आइएमडी) द्वारा हर 45 मिनट पर जारी एलर्ट पर आधारित है.
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इस एलर्ट को जेसैक अपने झारखंड के मैप के साथ कोरिलेट (परस्पर संबंध बनाना) कर काम में लायेगा. जेसैक ने इस काम के लिए जो साइट (अभी इसका एड्रेस सार्वजनिक नहीं किया गया है) बनायी है, उसमें वज्रपात की जगह को जूम करके गांव के स्तर पर भी देखा जा सकता है.
दरअसल यह साइट जियोग्राफिक इंफॉरमेशन सिस्टम (जीआइएस) से लैस है. इससे सॉफ्टवेयर की सहायता से वज्रपात की जगह के चारों अोर के क्षेत्र को अलग-अलग सर्किल (आधा से दो किमी रेडियस) की शक्ल में सेलेक्ट किया जा सकता है. रेडियस सेलेक्ट करते ही उसके अंदर स्थित सभी मोबाइल टावर का पोजिशन वहां दिखने लगता है.
अब यह सिस्टम वज्रपात के सबसे नजदीकी टावर व अन्य के संबंधित सर्विस प्रोवाइडर (बीएसएनएल, एयरटेल, जियो, आइडिया, वोडाफोन व अन्य जो भी हों) को अॉटोमेटिक तरीके से वेब इंफॉरमेशन (सूचना) देता है. इसके बाद संबंधित सर्विस प्रोवाइडर उस इलाके के अपने सभी मोबाइल ग्राहकों को वज्रपात होने तथा इससे बचने संबंधी संदेश (मैसेज) भेज देंगे. यह तकनीक जेसैक ने गृह, कारा व आपदा प्रबंधन विभाग के लिए विकसित की है.
शीघ्र लांच होगी साइट : जैसेक की इस तकनीक का कमांड आपदा प्रबंधन के पास होगा, जबकि डाटा जेसैक के पास. वज्रपात संबंधी इस साइट में दूसरी प्राकृतिक आपदा जैसे सूखा, बाढ़, भू-स्खलन व अन्य की भी पूरी जानकारी है. किसी लोकेशन पर पूर्व में हुए किसी भी प्राकृतिक अापदा के बारे में विस्तृत जानकारी ली जा सकती है. यानी पिछले कुछ वर्षों में वह आपदा कितनी बार हुई. उससे कितना नुकसान हुआ. सरकार जल्द ही यह साइट लांच करेगी.
झारखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर ने विकसित की है नयी प्रणाली
वज्रपात स्थल से निकलने का शॉर्टकट रास्ता भी
जेसैक द्वारा विकसित साइट में न सिर्फ मोबाइल टावर संबंधी सूचना दिखती है. इसमें चयनित सर्किल (जो रेडियस सेलेक्ट किया जाता है) के भीतर के सभी पुलिस स्टेशन भी दिखते हैं. साथ ही वज्रपात स्थल से निकल कर किसी सुरक्षित भवन तक पहुंचने का शॉर्टकट रास्ता भी दिखायी देता है. इन सबका इस्तेमाल आपात स्थिति में किया जा सकता है.
कुछ परेशानी भी
यह प्रणाली विकसित होने के बाद भी परेशानी यह है कि गांव-देहात के लोग जो खेत-खलिहानों व जंगलों में काम कर रहे होते हैं, उनके पास मोबाइल नहीं रहा, तो कोई लाभ नहीं होगा. वहीं दूर-दराज के इलाके में कई जगह नेटवर्क सही नहीं रहता है. जेसैक को उम्मीद है कि सरकार, सर्विस प्रोवाइडर, तकनीशियन व आम लोग मिल कर इस परेशानी का कोई हल निकाल लेंगे.
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