रांची : जनजातीय किसानों ने पपीता से कमाये 59 हजार
Updated at : 22 Jul 2019 9:56 AM (IST)
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जेटीडीएस ने पूरे राज्य में 150 एकड़ जमीन पर पपीता की बागवानी करने का निर्णय लिया रांची : पपीता बेच कर खूंटी के नौ जनजातीय किसानों ने 59 हजार रुपये की कमाई की है. वह भी उस टांड़ जमीन से, जो बंजर रहती थी. बागवानी योजना के तहत खूंटी के कर्रा प्रखंड के मेहा गांव […]
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जेटीडीएस ने पूरे राज्य में 150 एकड़ जमीन पर पपीता की बागवानी करने का निर्णय लिया
रांची : पपीता बेच कर खूंटी के नौ जनजातीय किसानों ने 59 हजार रुपये की कमाई की है. वह भी उस टांड़ जमीन से, जो बंजर रहती थी. बागवानी योजना के तहत खूंटी के कर्रा प्रखंड के मेहा गांव की पांच एकड़ तथा दुमका जिले की ढाई एकड़ जमीन में पपीता के पौधे लगाये गये. खूंटी व दुमका के अलावा नौ अन्य जिले में भी पपीता के पौधे लगाये गये हैं, जो अब फल देने लगे हैं. इन सभी जिलों में ताइवान की रेड क्वीन प्रजाति के पौधे लगे हैं, जिसे राष्ट्रीय बागवानी शोध संस्थान, पलांडू तथा बिरसा कृषि विवि कांके, रांची ने तैयार किया है.
इस प्रजाति के एक पौधे से औसतन 60 किलो पपीता का सालाना उत्पादन होता है. दरअसल, कल्याण विभाग से संबद्ध झारखंड ट्राइबल डेवलपमेंट सोसाइटी (जेटीडीएस) राज्य भर के 32 प्रखंडों के जनजातीय इलाके में बेहतर आजीविका के लिए कार्य कर रही है. दरअसल जेटीडीएस ने राज्य भर में कुल 150 एकड़ जमीन पर पपीता की बागवानी का निर्णय लिया है. इनमें से 42 एकड़ में पौधे लगाये जा चुके हैं. फलने भी लगे हैं. प्रति एकड़ जमीन पर एक हजार पौधे लगाये जाते हैं.
14 जिलों की 4300 एकड़ जमीन पर आम के पौधे
इधर, राज्य की ऊंची, टांड़ व बंजर भूमि पर मनरेगा के जरिये भी बागवानी हो रही है. बिरसा मुंडा बागवानी योजना के तहत राज्य के 14 जिलों की 4300 एकड़ जमीन पर मल्लिका व आम्रपाली वेराइटी के साढ़े चार लाख आम के पौधे लगे हैं. पाकुड़ जिले के पाकुड़िया प्रखंड के कई ग्रामीणों का पलायन इस योजना से रुक गया है. ग्रामीणों को इस योजना से दोहरा लाभ मिल रहा है. एक तो उनकी बंजर या टांड़ (ऊपरी) जमीन पर आम के बागान विकसित हो रहे हैं, वहीं उन्हें मजदूरी भी मिल रही है.
42 एकड़ जमीन पर लगा पपीता
11 जिलों खूंटी, दुमका, गोड्डा, साहेबगंज, जामताड़ा, पू.सिंहभूम, प.सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, गुमला, लोहरदगा व सिमडेगा की 42 एकड़ जमीन पर 42 हजार पपीता के पौधे लग गये हैं.
ये टांड़ जमीन स्थानीय रैयतों की है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह जमीन रसीले फलों की बागवानी के लिए उपयुक्त है. जेटीडीएस ने पपीता के अलावा अपने 14 प्रोजेक्ट जिलों में कलमी बेल, बारहमासी कटहल, शरीफा, जामुन व आंवला की बागवानी की योजना बनायी है. कुल 1.10 लाख परिवार इससे जुड़ेंगे.
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