रांची : गंदे पानी का हौज बन कर रह गया बड़ा तालाब
Updated at : 22 Jul 2019 9:54 AM (IST)
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रांची : शहर की हृदयस्थली में स्थित बड़ा तालाब की पहचान एक गंदे पानी का हौज के रूप में बन चुकी है. इस तालाब के सौंदर्यीकरण के नाम पर तालाब के बीचाेबीच एक टापू पर स्वामी विवेकानंद की आदमकद प्रतिमा लगायी गयी है. इसके बाद सौंदर्यीकरण का काम पूरी तरह से ठप पड़ गया है. […]
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रांची : शहर की हृदयस्थली में स्थित बड़ा तालाब की पहचान एक गंदे पानी का हौज के रूप में बन चुकी है. इस तालाब के सौंदर्यीकरण के नाम पर तालाब के बीचाेबीच एक टापू पर स्वामी विवेकानंद की आदमकद प्रतिमा लगायी गयी है. इसके बाद सौंदर्यीकरण का काम पूरी तरह से ठप पड़ गया है.
सौंदर्यीकरण के नाम पर कभी कभार दो चार मजदूर यहां दिख जाते हैं. लेकिन काम की रफ्तार जैसी है, उसे देखकर लगता है कि इसे पूरा होने में अभी कई साल लग जायेंगे. इधर, सेवा सदन के समीप नाले से होता हुआ अपर बाजार का गंदा पानी आज भी बड़ा तालाब में गिर रहा है. इस कारण पूरे तालाब का पानी मटमैला हो चुका है. तालाब के पानी से बदबू उठ रही है. वहीं, जलकुंभी ने आधे तालाब को पूरी तरह से ढक दिया है.
पाथ-वे बनाने के लिए तालाब में ही भरी गयी मिट्टी : तालाब के चारों ओर आमलोगों के टहलने के लिए पाथ-वे बनाया जा रहा है. लेकिन यहां भी पाथ-वे बनाने के लिए जगह-जगह तालाब में ही मिट्टी डंप कर दी गयी है. नगर निगम की इस योजना की सिविल सोसाइटी के सदस्य आलोचना भी कर रहे हैं कि जब सौंदर्यीकरण के तहत तालाब का गहरीकरण करना था, तो फिर तालाब में मिट्टी भर कर पाथ-वे बनाने का क्या औचित्य है. इससे तो तालाब ही छोटा हो जायेगा.
30 करोड़ की लागत से हो रहा सौंदर्यीकरण : बड़ा तालाब का सौंदर्यीकरण कार्य पिछले दो साल से चल रहा है. इसके लिए भवन निर्माण विभाग व रांची नगर निगम द्वारा अलग-अलग काम चल रहा है. भवन निर्माण विभाग द्वारा यहां पुल का निर्माण कर आदमकद प्रतिमा को तालाब के बीच में लगाना था. वहीं, रांची नगर निगम को तालाब के चारों ओर पाथ-वे, बैठने के लिए बेंच डेस्क, सुरक्षा के दृष्टिकोण से सीसीटीवी, गंदे पानी के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए एसटीपी का निर्माण करना है.
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हम कैसा विकास का प्लान बना रहे हैं
राजधानी के किसी मोहल्ले में कभी भी पीने के पानी के लिए इतनी किल्लत नहीं होती थी, जैसा हाल के दिनों में देखने को मिल रहा है. इसके लिए हम सभी को गहन चिंतन करना होगा कि आखिर इस शहर में हम कैसा विकास का प्लान बना रहे हैं.
आज अगर इस पर हम गंभीर नहीं हुए तो, वह दिन भी दूर नहीं, जब लोगों काे घर छोड़ कर पलायन करना होगा. आज शहर के नदियों व तालाबों की हालत किसी से छुपी हुई नहीं है. सौंदर्यीकरण के नाम पर कांक्रिट से तालाबों को घेरा जा रहा है. इसे बंद करने की जरूरत है. तालाब के किनारे जहां भी खाली जगह है, वहां पेड़ लगाये जायें. सबसे महत्वपूर्ण बात सरकार जलापूर्ति सिस्टम को पूरी तरह से दुरुस्त करे. इसके लिए नया डैम बनवाया जाये. जब हर घर के लोगों को सप्लाई पानी उपलब्ध हो जायेगा, तो लोग खुद-ब-खुद बोरिंग कराना बंद कर देंगे.
ऐसा देखने को मिल रहा है कि राजधानी रांची में बड़े बड़े अपार्टमेंट तो बन जा रहे हैं, लेकिन शहर का विस्तार नहीं हो रहा है. जबकि इस शहर का विस्तार भी रामगढ़, पतरातू, खूंटी व टाटा रोड में होना चाहिए. न सिर्फ शहर का विस्तार हो, बल्कि इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सरकार बेहतर नागरिक सुविधा भी उपलब्ध कराये.
डॉ नीतीश प्रियदर्शी, भूगर्भशास्त्री
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