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43 शेल कंपनियां बना कर व्यापारियों ने पहुंचाया 586 करोड़ रुपये का नुकसान

Updated at : 20 Jul 2019 2:06 AM (IST)
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43 शेल कंपनियां बना कर व्यापारियों ने पहुंचाया 586 करोड़ रुपये का नुकसान

विवेक चंद्र, रांची : व्यापारियों ने 43 शेल कंपनियां बना कर राज्य सरकार को 586.30 करोड़ का नुकसान पहुंचाया है. 20 कंपनियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है. शेष 23 कंपनियों के खिलाफ जांच जारी है. ऐसी कंपनियों व व्यापारिक प्रतिष्ठान द्वारा रजिस्ट्रेशन कराने के लिए फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल करने पर वाणिज्य कर […]

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विवेक चंद्र, रांची : व्यापारियों ने 43 शेल कंपनियां बना कर राज्य सरकार को 586.30 करोड़ का नुकसान पहुंचाया है. 20 कंपनियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है. शेष 23 कंपनियों के खिलाफ जांच जारी है. ऐसी कंपनियों व व्यापारिक प्रतिष्ठान द्वारा रजिस्ट्रेशन कराने के लिए फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल करने पर वाणिज्य कर विभाग ने साइबर क्राइम सेल से मदद मांगी है.

साथ ही साइबर क्राइम सेल से कंपनियों का रजिस्ट्रेशन लेने के लिए इस्तेमाल किये गये कंप्यूटर का पता लगाने का अनुरोध किया है. साइबर क्राइम सेल कंप्यूटर के आइपी एड्रेस से जालसाज व्यापारियों की पहचान में जुटा है.
वाणिज्य कर विभाग को ऑनलाइन रिटर्न की जांच के दौरान इस बात की जानकारी मिली है कि कई व्यापारी दो-तीन महीने व्यापार करने के बाद प्रतिष्ठान बंद कर दे रहे हैं. रजिस्ट्रेशन लेने के लिए इस्तेमाल किये गये पते और कागजात आदि फर्जी होने की वजह से जालसाजी करने वाले व्यापारियों की पहचान करने में दिक्कत हो रही है.
दस्तावेजों की जांच के लिए अधिनियम में संशोधन की मांग : झारखंड सहित देश के कई राज्यों ने व्यापारियों द्वारा फर्जी कागजात पर रजिस्ट्रेशन कराने और व्यापार के बाद प्रतिष्ठान बंद करने की घटनाओं के मद्देनजर जीएसटी एक्ट में संशोधन की मांग की है.
वहीं जीएसटी काउंसिल में राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि जीएसटी में रजिस्ट्रेशन के समय व्यापारियों के दस्तावेज की जांच का प्रावधान नहीं है. इसी का फायदा व्यापारी उठा रहे हैं. ऐसे व्यापारी छोटी अवधि तक व्यापार करने के बाद जीएसटी जमा करने का समय आने पर कंपनी बंद कर बिना टैक्स भरे गायब हो गये हैं. इस कारण से राज्यों ने दस्तावेजों की जांच का प्रावधान करने की मांग की है.
20 के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज, 23 की जांच जारी
ऐसे फर्जीवाड़ा िकया व्यापारियों ने
प्रारंभिक जांच में पाया गया कि रांची, धनबाद, जमशेदपुर, बोकारो, चाईबासा, कतरास के व्यापारियों ने किसी कर्मचारी या रिश्तेदार के नाम का इस्तेमाल कर कंपनी के रजिस्ट्रेशन के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किये. फिर रजिस्ट्रेशन करा कर व्यापार किया और जब रिटर्न दाखिल कर जीएसटी की राशि सरकारी खजाने में जमा करने का समय आया, तो प्रतिष्ठान बंद कर गायब हो गये.ऐसी फर्जीवाड़ा कर 43 व्यापारियों ने 586.30 करोड़ रुपये का राजस्व जमा नहीं किया.
अब तक शेल कंपनियां बना कर राजस्व चुकाने में गड़बड़ी करने वाली 43 कंपनियों या व्यापारिक प्रतिष्ठानों की पहचान की गयी है. उनमें से 20 पर एफआइआर किया जा चुका है. जीएसटी काउंसिल को मामले की जानकारी देते हुए रजिस्ट्रेशन के लिए किये गये प्रावधान में संशोधन का अाग्रह किया गया है.
प्रशांत कुमार, सचिव, वाणिज्य कर विभाग
इन पर किया गया एफआइआर
फर्म का नाम व्यापारी का नाम
अन्नपूर्णा इंटरप्राइजेज, रांची चंद्रिका सिंह
बिघ्नेश इंटरप्राइजेज, धनबाद दीपक झा
पूर्वा इंटरप्राइजेज, धनबाद डेविड कु दास
देव ट्रेडर्स, धनबाद विनय कुमार
भूतनाथ इंटरप्राइजेज, धनबाद मुकेश अग्रवाल
ऋषभ सेल्स, धनबाद आनंद कु साव
भगवती इंटरप्राइजेज, धनबाद अश्विनी कु प्रसाद
शिव शक्ति ट्रेडर्स, धनबाद वरुण भगत
चंद्रकला, कतरास विनय यादव
ओम ट्रेडिंग, देवघर रोहित सिंह
साहा इंटरप्राइजेज, देवघर मोती साव
इन पर किया गया एफआइआर
तिरूपति इंटरप्राइजेज, चाईबासा राकेश कु गर्ग
बालाजी इंटरप्राइजेज, चाईबासा ब्रजेश प्र तिवारी
कृष्णा इंटरप्राइजेज, जमशेदपुर अंकित कुमार शर्मा
कंचन एलॉयज एंड स्टील, जमशेदपुर महाबीर प्रसाद
पीके ट्रेडर्स, जमशेदपुर पंकज कुमार सिंह
शाकांभरी मेटालिक्स, जमशेदपुर मनोज पारिक
सिद्धि विनायक मेटल एंड सॉल्ट, बोकारो सत्यप्रकाश सिंह
रेणु राज इंटरप्राइजेज, बोकारो रेणु सिंह
श्रीराम एलॉयज एंड इन्गॉट प्रालि, बोकारो नीकित कु मित्तल
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