कांग्रेस में किचकिचः वरिष्ठ नेता ने कहा- ना बिहारी, ना झारखंडी, मद्रासी को लाने की क्या जरूरत

Updated at : 17 Jul 2019 8:49 AM (IST)
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कांग्रेस में किचकिचः  वरिष्ठ नेता ने कहा-  ना बिहारी, ना झारखंडी, मद्रासी को लाने की क्या जरूरत

रांची : पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरीय नेता सुबोधकांत सहाय ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है़ उन्होंने कहा कि झारखंड में कई मुद्दे है़ं यहां लोकल लड़ाई है़ झारखंड में बहुत सारे लोग हैं. ना बिहारी, ना झारखंडी, मद्रासी को लाने की क्या जरूरत है़. […]

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रांची : पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरीय नेता सुबोधकांत सहाय ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है़ उन्होंने कहा कि झारखंड में कई मुद्दे है़ं यहां लोकल लड़ाई है़ झारखंड में बहुत सारे लोग हैं. ना बिहारी, ना झारखंडी, मद्रासी को लाने की क्या जरूरत है़. बहुत हो गया़, गलती हो गयी, इसे सुधारने की जरूरत है़
श्री सहाय ने कहा कि लोकसभा चुनाव में इस गलती का परिणाम हमने देख लिया है़ लोकसभा चुनाव में पार्टी के पदाधिकारियों की भूमिका जीरो बट्टा, जीरो रही. उन्होंने कहा कि झारखंड का मामला तब तक नहीं सुलझेगा, जब तक दिल्ली में पार्टी के नये कार्यकारी अध्यक्ष की घोषणा नहीं हो जाती है़ महाराष्ट्र, हरियाणा का मामला सुलझा लिया गया था, लेकिन उसी बीच राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने पद से हटने की घोषणा कर दी़ यूपीए में गठबंधन पर भी उन्होंने कहा कि अभी थोड़ी लाचारी है़
हम क्षेत्रीय दल नहीं हैं. हमें राष्ट्रीय नेतृत्व के दिशा-निर्देश का इंतजार है़ राष्ट्रीय स्तर पर अंतरिम व्यवस्था बन जायेगी, तो फिर झारखंड को लेकर भी फैसला हो जायेगा़ कांग्रेस गठबंधन का न्यूक्लियस है़ श्री सहाय ने कहा कि जब तक हमें केंद्रीय नेतृत्व का मार्गदर्शन नहीं मिलता है, तब तक यूपीए के दल ग्राउंड वर्क करे़ं इसके बाद गठबंधन पर फैसला लेना आसान होगा़
कुछ लोग नफरत की राजनीति करते हैं, प्रतिद्वंद्वी भाजपा से संस्कार सीखने की जरूरत : डॉ अजय
इधर, डॉ अजय कुमार ने सुबोधकांत सहाय का नाम लिये बिना कहा कि कुछ लोग नफरत की राजनीति करते है़ं बाहरी-भीतरी की बात करते है़ं 20 वर्ष से ज्यादा हो गया, मैं झारखंड की सेवा कर रहा हू़ं
यहां नौकरी करने आया और इसी मिट्टी से अपना रिश्ता बनाये रखा. ऐसे में वर्षों से रह रहे लोग बाहरी हो गये़ ऐसे नेताओं को प्रतिद्वंद्वी भाजपा से कुछ संस्कार सीखना चाहिए़ मुख्यमंत्री के कितने भी विरोधी कोई नेता उनकी पार्टी का क्यों ना हो, कभी उनको बाहरी नहीं कहा़ विरोधी भी हैं, तो उनकी अच्छी संस्कृति से सीखना चाहिए़
डॉ कुमार ने कहा कि ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण और कटुता फैलाने वाले बयान से ही व्यक्तित्व का पता चलता है़ मेरे काम की आलोचना होनी चाहिए, लेकिन बाहरी-भीतरी की बात कर रहे है़ं इस तरह की राजनीतिक बहस की शुरुआत कर मुद्दों की राजनीति को गायब करने का प्रयास हो रहा है़
ऐसे झारखंडी से क्या फायदा, जो राज्यहित की नहीं सोचे. सबको साथ लेकर चलना नहीं जानता है़ डॉ अजय ने कहा कि सवाल झारखंडी और गैर झारखंडी का नही है़ं ईमानदार राजनीति की बात होनी चाहिए़ पुलिस सेवा से लेकर राजनीति तक मेरे ऊपर कोई आरोप नहीं लगा सकता है़ मैंने झारखंड की सेवा की है. इसको कभी बदनाम नहीं किया है़
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