रांची : माता बम के नाम से मशहूर हैं 100 वर्षीय उमा सरावगी, हर साल कांवर ले जाती हैं माता बम

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Jul 2019 6:56 AM

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पंकज कुमार पाठक बनी भक्ति की मिसाल 100 साल की माता बम ने कहा -गिनना छोड़ा, कब से बाबा के पास जा रही हूं रांची : नाम-उमा सरावगी. उम्र-100 के पार. जोश इतना कि 25 साल के युवा भी शरमा जायें. माता रेलवे स्टेशन पर जैसे ही चुनरी प्रिंट साड़ी में पहुंचीं कि जोर-जोर से […]

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पंकज कुमार पाठक
बनी भक्ति की मिसाल
100 साल की माता बम ने कहा -गिनना छोड़ा, कब से बाबा के पास जा रही हूं
रांची : नाम-उमा सरावगी. उम्र-100 के पार. जोश इतना कि 25 साल के युवा भी शरमा जायें. माता रेलवे स्टेशन पर जैसे ही चुनरी प्रिंट साड़ी में पहुंचीं कि जोर-जोर से बोल बम का नारा लगाने लगीं. सभी माता का उत्साह देखकर हैरान थे. उनके साथ आया कांवरियों का जत्था भी बोल बम के नारे में साथ देने लगा. स्टेशन 100 से ज्यादा कांवरियों के नारों से गूंज उठा.
माता बम के नाम से मशहूर उमा सरावगी हर साल बाबाधाम जाती हैं. सुलतानगंज से जल लेती हैं और बाबा को चढ़ाती हैं. उमा सरस सत्संग मंडल ग्रुप के साथ जुड़ी हैं और इस ग्रुप के लोग हर साल माता बम के रूप में उमा को ले जाते हैं. इस अवसर पर ग्रुप के सदस्यों के बीच गजब का उत्साह रहता है. माता बम के रहने से यह दोगुना हो जाता है. बोल बम के लिए रवाना होने के समय स्टेशन बोल बम के नारों से लगातार गूंज रहा था.
ग्रुप की महिलाएं रखती हैं ध्यान
ग्रुप के सदस्य बताते हैं कि माता 100 सावन से ज्यादा देख चुकीं हैं और बहुत दिनों से बाबा के दरबार में जा रही हैं. ग्रुप में 25 महिलाएं हैं और सभी मिलकर उमा का ध्यान रखती हैं. महिलाएं कहती हैं कि इनकी वजह से हममें उत्साह आता है. साल 1974 में स्थापित सरस सत्संग मंडल की 48वीं कांवर यात्रा है. उमा सरावगी पहाड़ी मंदिर की 400 से ज्यादा सीढ़ियां भी चढ़ जाती हैं. वह सावन में पहाड़ी मंदिर में जाकर शरबत भी पिलाती हैं. माता मारवाड़ी भवन के पीछे रहती हैं.
तीन महीने पहले ही करा लेते हैं टिकट की बुकिंग
समूह में 25 से ज्यादा महिलाएं और 100 पुरुष हैं. गोविंद अग्रवाल बताते हैं कि हम सभी एक परिवार की तरह हैं. सब साथ जाते हैं. तीन महीने पहले ही टिकट की बुकिंग हो चुकी है. हमारा कुक और खाने का सामान सब बस से सुल्तानगंज पहुंच रहे हैं. हमारे साथ भजन मंडली चलती है.हमें सुल्तानगंज से बाबाधाम पहुंचने में चार दिन लगते हैं.
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