चंदनकियारी-गोविंदपुर ट्रांसमिशन लाइन की फाइल बंगाल में अटकी
Updated at : 07 Jul 2019 9:33 AM (IST)
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सुनील चौधरी झारखंड ऊर्जा संचरण निगम कई बार लगा चुका है गुहार रांची : चंदनकियारी-धनबाद ट्रांसमिशन लाइन का भविष्य बंगाल सरकार तय करेगी. पिछले पांच महीने से पश्चिम बंगाल सरकार के यहां फाइल अटकी हुई है. जिसके कारण धनबाद स्थित गोविंदपुर और चंदनकियारी बिजली नेटवर्क से जुड़ नहीं पा रहे हैं. चंदनकियारी में बना ग्रिड […]
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सुनील चौधरी
झारखंड ऊर्जा संचरण निगम कई बार लगा चुका है गुहार
रांची : चंदनकियारी-धनबाद ट्रांसमिशन लाइन का भविष्य बंगाल सरकार तय करेगी. पिछले पांच महीने से पश्चिम बंगाल सरकार के यहां फाइल अटकी हुई है.
जिसके कारण धनबाद स्थित गोविंदपुर और चंदनकियारी बिजली नेटवर्क से जुड़ नहीं पा रहे हैं. चंदनकियारी में बना ग्रिड सबस्टेशन भी लाइन नहीं जुड़ने की वजह से चालू नहीं हो सका है. झारखंड ऊर्जा संचरण निगम लिमिटेड के द्वारा कई बार बंगाल सरकार से गुहार लगायी गयी है, लेकिन अभी तक अनुमति नहीं मिली है. कहा जा रहा है कि झारखंड और बंगाल में दो अलग-अलग दलों की सरकार है और फाइल अटकने के पीछे कारण राजनीतिक रंजिश है.
क्या है मामला
चंदनकियारी में ग्रिड बना हुआ है और इसे धनबाद के गोविंदपुर ग्रिड से जोड़ना है. इसके लिए ट्रांसमिशन लाइन बनना है. इस लाइन के बनने से धनबाद जहां सेंट्रल ग्रिड से जुड़ जायेगा, वहीं धनबाद व बोकारो में डीवीसी पर बिजली के लिए निर्भरता समाप्त हो जायेगी. झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड धनबाद और बोकारो में बिजली की आपूर्ति कर सकेगा. वर्तमान में दोनों जिलों में डीवीसी से ही अापूर्ति की जाती है.
बताया गया कि पूर्व में चंदनकियारी-गोविंदपुर लाइन को झारखंड क्षेत्र से ही होकर गुजरना था, लेकिन बीच में सेल की कोयला खदान आ जा रही थी. ऐसे में सेल से अनुमति नहीं मिली. इसके बाद वैकल्पिक रूट बनाया गया. जो चंदनकियारी से सटे हुए बंगाल के हिस्से में पड़ने वाले संथालडीह होकर जायेगा. लगभग छह किमी लाइन बंगाल के हिस्से में पड़ती है.
यहां 26 टावर का निर्माण होना है. झारखंड ऊर्जा संचरण निगम लिमिटेड के आग्रह पर बंगाल की ट्रांसमिशन कंपनी कोलकाता ट्रांसमिशन ने अनुमति दे दी. फिर ऊर्जा विभाग प. बंगाल से भी अनुमति मिल गयी. लेकिन दो राज्यों के बीच का मामला देखते हुए अनुमति के लिए बंगाल के ऊर्जा विभाग ने प. बंगाल मुख्यमंत्री कार्यालय को फाइल भेज दी. पिछले पांच माह से यहां फाइल अटकी हुई है. इधर चंदनकियारी-गोविंदपुर लाइन का काम भी अटका हुआ है.
राजनीतिक वजह भी कारण
बिजली से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि बंगाल में टीएमसी की सरकार है और झारखंड में भाजपा की. वहीं दोनों के बीच अभी तालमेल सही नहीं है. ट्रांसमिशन लाइन की अनुमति नहीं मिलने के पीछे राजनीतिक रंजिश भी कारण बताया जा रहा है.
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