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रांची : गंदे किचेन में बना खाना खा रहे जूनियर डॉक्टर

Updated at : 04 Jul 2019 8:03 AM (IST)
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रांची : गंदे किचेन में बना खाना खा रहे जूनियर डॉक्टर

राजीव पांडेय रिम्स के हॉस्टल का हाल : डायरेक्टर साहब! जरा इधर भी नजर-ए-इनायत कीजिए रांची : राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में एमबीबीएस और पीजी की पढ़ाई करने के लिए राज्य और देश के काेने-कोने विद्यार्थी पढ़ने के लिए आते हैं. रिम्स के हॉस्टल में रहने और खाने की व्यवस्था तो है, लेकिन […]

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राजीव पांडेय
रिम्स के हॉस्टल का हाल : डायरेक्टर साहब! जरा इधर भी नजर-ए-इनायत कीजिए
रांची : राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में एमबीबीएस और पीजी की पढ़ाई करने के लिए राज्य और देश के काेने-कोने विद्यार्थी पढ़ने के लिए आते हैं. रिम्स के हॉस्टल में रहने और खाने की व्यवस्था तो है, लेकिन इनका किचेन पहली नजर में किसी दोयम दर्जे के ढाबे जैसा दिखता है. प्रभात खबर संवाददाता ने बुधवार को रिम्स के विभिन्न हॉस्टल में चल रहे मेस के किचेन का जायजा लिया.
दोपहर के 12:45 बजते ही हॉस्टल के कमरों से मेडिकल स्टूडेंट मेस के किचेन में खाना खाने पहुंचते हैं. मेस के कर्मचारी खाना बनाने में जुटे हैं. काेई रोटी बना रहा है, तो कोई चूल्हे पर चढ़ी हुई कढ़ाई से चिकन निकाल रहा है.
मेस में लगी कुर्सी पर बैठे विद्यार्थियों के सामने वेज और नॉनवेज की थाली परोसी जा रही है. मेडिकल स्टूडेंट और जूनियर डॉक्टर चटखारे लेकर खाना खा रहे हैं, लेकिन किसी को पता नहीं है कि जिस किचेन में खाना तैयार है, वह कितना हाइजीनिक है. ये वही डॉक्टर हैं, जो अस्पताल में इलाज कराने आये मरीजों को बीमारी से बचने के लिए साफ-सफाई की सलाह देते हैं. रिम्स के हॉस्टल हॉस्टल नंबर-1 से 8 तक के मेस के किचेन का कमोबेश यही हाल है.
गर्ल्स हॉस्टल का किचेन भी गंदा
गर्ल्स हॉस्टल के किचेन का भी यही हाल है. मेस में गैस पर छात्राओं के लिए खाना तैयार होता है, लेकिन गंदगी वैसी ही है. साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता है. छात्राओं ने बताया कि मेस में पानी की समस्या है. शौचालय में लगे नल से पानी टपकता है. कई बार शिकायत के बाद भी वार्डन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गयी है.
विद्यार्थियों की मांग पर हुआ था जीर्णोद्धार
विद्यार्थियों की मांग पर मेस का जीर्णोद्धार का कार्य किया गया. फर्श पर टाइल्स लगायी गयी. नयी कुर्सी लगा दी गयी, लेकिन किचेन जस का तस है. कोयले के चूल्हे पर खाना बनता है, जिससे मेस में धुआं भरा रहता है. ऐसे में मेडिकल स्टूडेंट के अस्थमा या क्रोनिकल ऑप्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज की चपेट में आने की आशंका बनी रहती है.
हॉस्टल के किचेन की स्थिति वास्तव में खराब है. कोयले के चूल्हे पर खाना नहीं बनाना चाहिए. सफाई का ख्याल रखना होगा. हॉस्टल वार्डन तो कभी आते ही नहीं है. स्टूडेंट तो बीमार होते ही रहते हैं.
डॉ अजीत कुमार, अध्यक्ष, जेडीए
रांची : रिम्स में मरीजों को भोजन मुहैया करानेवाली एजेंसी प्राइम सर्विसेज बिना अनुबंध के संचालित हो रही है. रिम्स प्रबंधन के साथ एजेंसी का अनुबंध पिछले माह छह जून को ही समाप्त हो चुका है. नये एजेंसी का चयन होने तक प्राइम सर्विसेज ही काम देखेगी. हालांकि, रिम्स में यह परंपरा बन गयी है कि एजेंसी का चयन होने में कई वर्ष लग जाते हैं और पुरानी एजेंसी काम करती रहती है.
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