रांची : आंदोलन के दौरान पारा शिक्षकों का हुआ था निधन, मिला निर्देश, परिजनों को दिये जायेंगे एक-एक लाख रुपये

By Prabhat Khabar Digital Desk
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एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिला
पारा शिक्षकों के कल्याण के लिए दस करोड़ मिलेंगे
रांची : पारा शिक्षकों के आंदोलन के दौरान जिन पारा शिक्षकों की मौत हुई थी, उनके परिजनों को मुआवजा देने के लिए सत्यापन का कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है. 24 पारा शिक्षकों के परिजनों को दस दिनों के अंदर एक-एक लाख का मुआवजा दे दिया जायेगा. इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिया गया है. पारा शिक्षकों की समस्याओं को लेकर एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा का प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को मुख्यमंत्री रघुवर दास से मिला. राज्य में पारा शिक्षकों के लिए सेवा शर्त नियमावली बनाने की प्रक्रिया चल रही है.
इसे जल्द से जल्द पूरा कर लिया जायेगा. प्रतिनिधिमंडल ने आंदोलन के दौरान पारा शिक्षकों पर हुए मुकदमा का मामला भी मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया. पारा शिक्षकों के कल्याण कोष के लिए सरकार दस करोड़ रुपये देगी. शिक्षक पात्रता परीक्षा के प्रमाण पत्र की मान्यता बढ़ाकर सात वर्ष कर दी गयी है. प्रतिनिधिमंडल में संजय कुमार दूबे, हृषिकेश पाठक, बजरंग प्रसाद, प्रद्युम्न सिंह, नरोत्तम सिंह मुंडा समेत अन्य पारा शिक्षक शामिल थे.
राज्य में सितंबर में होगी शिक्षक पात्रता परीक्षा
राज्य में शिक्षक पात्रता परीक्षा सितंबर में होगी. परीक्षा के अायोजन को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. यह निर्णय मंगलवार को शिक्षा मंत्री डॉ नीरा यादव की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय कमेटी की बैठक में लिया गया. बैठक में इस वर्ष जनवरी में पारा शिक्षकों के साथ हुए समझौते के विभिन्न बिंदुओं पर अब तक हुई कार्रवाई की समीक्षा की गयी. बैठक में पारा शिक्षकों की सेवा शर्त नियमावली के बारे में बताया गया . इसे लेकर अन्य राज्यों से सेवा शर्त मंगायी गयी है.
सभी राज्यों की नियमावली के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गयी है. इसे जल्द कमेटी के समक्ष रखा जायेगा. पारा शिक्षकों के बकाया मानदेय भुगतान भी जल्द कर दिया जायेगा. पारा शिक्षकों को एक सप्ताह के अंदर बकाया मानदेय का भुगतान कर दिया जायेगा. पारा शिक्षकों को इस वित्तीय वर्ष में मई व जून के मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है.
आंदोलन के दौरान पारा शिक्षकों पर जो मुकदमा हुआ था, उसे वापस लेने की प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जायेगी. जिन पारा शिक्षकों की नियुक्ति के अनुमोदन से संबंधित कागजात नहीं मिले हैं, उसके संबंध में कागजात संबंधित प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी व प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी से मांगा जायेगा.
तब तक उनके जून तक का मानदेय दिया जायेगा. बैठक में विकास आयुक्त सुखदेव सिंह, वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव केके खंडेलवाल, स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग के प्रधान सचिव एपी सिंह, परियोजना निदेशक उमाशंकर सिंह उपस्थित थे.
4812 अप्रशिक्षित शिक्षकों को राहत नहीं : बैठक में पारा शिक्षकों ने अप्रशिक्षित 4812 शिक्षकों को एक और अवसर देने की मांग की. बैठक में सरकार की ओर से बताया कि भारत सरकार द्वारा कहा गया है कि 31 मार्च 2019 के बाद केवल प्रशिक्षित पारा शिक्षकों को ही पढ़ाने की अनुमति होगी. ऐसे में इस मामले में संवैधानिक प्रावधान के अनुरूप ही कार्य किया जायेगा. मिली जानकारी के अनुसार बैठक में अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों को फिलहाल कोई राहत देने पर कोई सहमति नहीं बनी.
3000 बीआरपी-सीआरपी का आंदोलन आठ जुलाई से
रांची : राज्य के बीआरपी-सीआरपी ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है. आंदोलन के प्रथम चरण में आठ से दस जुलाई तक तीन हजार बीअारपी-सीआरपी, ज्ञान सेतु और ई-विद्या वाहिनी कार्यक्रम का विरोध करेंगे. इस दौरान दस जुलाई को पूरे राज्य के बीआरपी-सीआरपी राज्य परियोजना कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन करेंगे. बीआरपी-सीआरपी महासंघ के प्रवक्ता अमर खत्री ने बताया कि यह निर्णय मंगलवार को मोरहाबादी में महासंघ की हुई बैठक में लिया गया.
सभी मंत्रियों और विधायकों को संघ सौंपेगा मांग पत्र : आंदोलन के दूसरे चरण में महासंघ राज्य के सभी मंत्रियों और विधायकों काे अपना मांग पत्र सौंपेगा. इसके बाद भी मांग पूरी नहीं होने पर 22 जुलाई से बीआरपी-सीआरपी ज्ञान सेतु और ई-विद्या वाहिनी का अनिश्चितकालीन बहिष्कार करेंगे. इसके बाद विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान विधानसभा के समक्ष प्रदर्शन करेंगे. महासंघ 375 नये बीआरपी की नियुक्ति का विरोध कर रहा है. नयी नियुक्ति के बदले योग्य सीआरपी से पद भरने की मांग कर रहा है.
रसोइयों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिलेगा
रांची : झारखंड प्रदेश विद्यालय रसोइया-संयोजिका अध्यक्ष संघ का प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को मुख्यमंत्री रघुवर दास से मिला. प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें अपनी मांगों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया. प्रतिनिधिमंडल ने रसोइया का मानदेय बढ़ाने, हटाये गये रसोइया को फिर से विद्यालय में नियुक्त करने और बकाया मानदेय का जल्द भुगतान करने की मांग की.
मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया. राज्यभर के सभी रसोइयों को आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा जायेगा. उन्हें पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिल सकेगा. इसके बाद प्रतिनिधिमंडल शिक्षा मंत्री से मिला. प्रतिनिधिमंडल में अजीत प्रजापति, प्रेमनाथ विश्वकर्मा, अनिता देवी शामिल थीं.
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