अंडा व फल के लिए राशि अब सीधे आंगनबाड़ी को
Updated at : 21 Jun 2019 2:43 AM (IST)
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संजय, रांची : आंगनबाड़ी केंद्रों में तीन से छह वर्ष तक के करीब 10.20 लाख बच्चों को पोषाहार के रूप में मिलने वाला अंडा या फल अब आंगनबाड़ी के स्तर से ही खरीदा जायेगा. औसतन पांच रुपये प्रति अंडे की दर से करीब 80 करोड़ रुपये राज्य भर के 38432 आंगनबाड़ी केंद्रों की माता समिति […]
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संजय, रांची : आंगनबाड़ी केंद्रों में तीन से छह वर्ष तक के करीब 10.20 लाख बच्चों को पोषाहार के रूप में मिलने वाला अंडा या फल अब आंगनबाड़ी के स्तर से ही खरीदा जायेगा. औसतन पांच रुपये प्रति अंडे की दर से करीब 80 करोड़ रुपये राज्य भर के 38432 आंगनबाड़ी केंद्रों की माता समिति के खाते में डाले जायेंगे. माता समिति में आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका तथा लाभुक बच्चों में से किसी एक की मां होती है.
यह दोनों के नाम संयुक्त खाता होता है. समाज कल्याण मंत्री डॉ लुइस मरांडी ने इससे संबंधित प्रस्ताव पर सहमति दे दी है. इस मुद्दे पर पिछले कई महीने से विचार चल रहा था. मंत्री की सहमति के बाद अब इस मुद्दे पर कैबिनेट की सहमति ली जायेगी. विभाग इससे संबंधित प्रस्ताव तैयार कर रहा है.
गौरतलब है कि राज्य भर के आंगनबाड़ी केंद्रों में तीन से छह वर्षीय बच्चों को सप्ताह में तीन दिन (सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को) अंडा दिया जाता है. पूरक पोषाहार व प्रोटीन के बेहतर स्रोत के रूप में हर बच्चे को एक उबला हुआ अंडा मिलता है. जो बच्चे अंडा नहीं खाते, उन्हें मौसमी फल (सेब, केला, अमरूद व संतरा) देने का प्रावधान है. इससे पहले अंडा वितरण का काम तमिलनाडु के फर्म किसान पॉल्ट्री को मिला था. निविदा की शर्त के मुताबिक कंपनी का कार्यादेश 30 अप्रैल को समाप्त हो गया, पर लोकसभा चुनाव के दौरान लागू आचार संहिता के कारण सरकार नया निर्णय नहीं ले सकी थी.
विभागीय मंत्री ने दी मंजूरी, अब कैबिनेट की सहमति ली जायेगी
38432 आंगनबाड़ी केंद्रों को मिलेंगे सालाना करीब 80 करोड़
पोषाहार की खरीद माता समिति से ही
पूरक पोषाहार कार्यक्रम के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को दी जा रही खिचड़ी व अन्य खाद्य सामग्री का क्रय माता समिति के स्तर से ही होता है. इससे पहले गैर सरकारी संस्था भोजन का अधिकार ने भी मुख्यमंत्री को यह सुझाव दिया था कि स्कूलों में मध्याह्न भोजन की तर्ज पर आंगनबाड़ी केंद्रों को ही अंडे खरीदने के पैसे दिये जायें. इससे स्थानीय रोजगार भी पैदा होगा. गौरतलब है कि अंडा वितरण कार्यक्रम के तहत हर सप्ताह करीब 1.22 करोड़ अंडे की जरूरत होगी.
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