रांची : बालू घाटों के पर्यावरण स्वीकृति के लिए जेएसएमडीसी जिम्मेवार : सिया

Updated at : 13 Jun 2019 9:04 AM (IST)
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रांची : बालू घाटों के पर्यावरण स्वीकृति के लिए जेएसएमडीसी जिम्मेवार : सिया

रांची : बालू घाटों को विलंब से पर्यावरण स्वीकृति मिलने के पीछे स्टेट लेवल इनवायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (सिया) जेएसएमडीसी को ही जिम्मेवार ठहरा रहा है. इस बाबत सिया के सदस्य सचिव ने अपना पक्ष देते हुए लिखा है कि झारखंड राज्य खान विकास निगम (जेएसएमडीसी) द्वारा 20 बालू घाटों का परियोजना प्रस्ताव 23,24, 27, […]

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रांची : बालू घाटों को विलंब से पर्यावरण स्वीकृति मिलने के पीछे स्टेट लेवल इनवायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (सिया) जेएसएमडीसी को ही जिम्मेवार ठहरा रहा है.
इस बाबत सिया के सदस्य सचिव ने अपना पक्ष देते हुए लिखा है कि झारखंड राज्य खान विकास निगम (जेएसएमडीसी) द्वारा 20 बालू घाटों का परियोजना प्रस्ताव 23,24, 27, 28 एवं 29 मई को सिया में समर्पित किया गया था तथा राज्य स्तरीय विशेषज्ञ आकलन समिति (एसइएसी) झारखंड द्वारा पूर्व नियोजित बैठक 27-29 मई को निर्धारित थी. इसकी अवधि को विस्तारित करते हुए इन मामलों का तकनीकी परीक्षण किया गया. सिया/एसइएसी झारखंड का कार्य पूर्णत: तकनीकी व वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित है. पर्यावरण स्वीकृति के लिए उसी परियोजना प्रस्ताव को बैठक में शामिल करने के लिए सात दिनों पूर्व आवेदन उपलब्ध कराया जाता है.
एसइएसी द्वारा अपनी अनुशंसा 1.6.2019 को सिया में समर्पित किया गया. तत्पश्चात सिया द्वारा तीन जून को हुई 73वीं बैठक में पर्यावरण स्वीकृति निर्गत करने का निर्णय लिया गया एवं पांच जून को पर्यावरणीय स्वीकृति (इसी) पत्र निर्गत किया गया. सिया द्वारा जेएसएमडीसी के प्रस्ताव पर पांच दिनों में निर्णय लेते हुए इसी निर्गत किया गया. इसे प्राप्त करने में देरी के लिए जेएसएमडीसी स्वयं जिम्मेवार है.
लोगों में भय पैदा करने की कोशिश : महासभा
रांची़ झारखंड जन अधिकार महासभा ने सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी के घर बार-बार हो रही छापेमारी व अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की निंदा की है़ महासभा के सोलोमन, आलोका, बीबी चौधरी व सिराज दत्ता ने कहा है कि स्टेन स्वामी झारखंड के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता हैं.
उन्होंने विशेष रूप से विस्थापन, कंपनियों द्वारा संसाधनों की लूट, विचाराधीन कैदियों, वनाधिकार और पेसा कानून के मुद्दों पर काम किया है. उन्हाेंने सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण कानूनों में संशोधन करने कोशिशों की आलोचना भी की है. पिछले साल कई सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि ये छापेमारी और गिरफ्तारियां वंचित समूहों के अधिकार के लिए कार्यरत लोगों में भय पैदा करने का सरकार के प्रयास है.
महासभा ने कहा कि झारखंड जन अधिकार महासभा सत्ताधारी दल व सरकार की आलोचना करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं व बुद्धिजीवियों की प्रताड़ना व गिरफ्तारी से हैरान है. पिछले साल छह जून को सुरेंद्र गाडलिंग, सुधीर धावले, महेश राउत, शोमा सेन व रोना विलसन को गिरफ्तार किया गया था. वे अब तक येरवाड़ा सेंट्रल जेल में हैं. झारखंड जनाधिकार महासभा मांग करती है कि छापेमारी बंद हो़
माले ने की निंदा
रांची़ भाकपा माले के झारखंड राज्य सचिव जनार्दन प्रसाद व पूर्व विधायक विनोद सिंह ने संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी कर फादर स्टेन स्वामी के अावास पर दूसरी बार हुई छापेमारी की निंदा की है. नेता द्वय ने कहा है कि यह इस बात का सबूत है कि सरकार भूमि लूट के खिलाफ संघर्षरत शक्तियों की आवाज को कुचलने के लिए हर नियम-कानून ताक पर रख रही है. नेता द्वय ने मांग की है कि सरकार स्टेन को प्रताड़ित करना बंद करे.
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