रांची : डीएमएफ की 28% राशि ही खर्च कर सकी सरकार

Updated at : 11 Jun 2019 9:10 AM (IST)
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रांची : डीएमएफ की 28% राशि ही खर्च कर सकी सरकार

रांची : राज्य सरकार जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) की 28 फीसदी राशि ही खर्च कर पायी है. पिछले चार वर्षों में झारखंड डीएमएफ फंड में लगभग 4,083 करोड़ रुपये विभिन्न जिलों को मिले. पीएमकेकेकेवाइ के केंद्र सरकार द्वारा बनाये पोर्टल से मिली जानकारी के अनुसार राज्य में अब तक 1,165 करोड़ रुपये ही खर्च हो […]

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रांची : राज्य सरकार जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) की 28 फीसदी राशि ही खर्च कर पायी है. पिछले चार वर्षों में झारखंड डीएमएफ फंड में लगभग 4,083 करोड़ रुपये विभिन्न जिलों को मिले.
पीएमकेकेकेवाइ के केंद्र सरकार द्वारा बनाये पोर्टल से मिली जानकारी के अनुसार राज्य में अब तक 1,165 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाये हैं. ग्रामीण पेयजल आपूर्ति बढ़ाने और शौचालय बनाने के लिए ज्यादा पैसे खर्च किये जा रहे हैं. राज्य सरकार ने 2016 में इसके लिए एक निर्देश जारी किया था. इसमें कहा गया था कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में पीने के पानी की समस्या है.
कुपोषण और स्वास्थ्य सेवा आज भी है मुद्दा
खनन वाले इलाकों में बच्चों के बीच पोषण की स्थिति में सुधार, स्वास्थ्य सेवा और संसाधनों को बेहतर बनाना आज भी चुनौती है. लगभग सभी बड़े खनन जिलों में बाल कुपोषण की समस्या है. पश्चिम सिंहभूम में बाल कुपोषण से पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर खतरनाक है. इसके अलावा लगभग सभी प्रमुख खनन जिलों के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आबादी के हिसाब से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की क्षमता आधे से भी कम है.
जिला और उपजिला अस्पतालों में भी संसाधनों और कर्मचारियों की कमी है. डीएमएफ पर झारखंड में काम कर रही सेंटर फॉर साइंस इनवायरमेंट की श्रेष्ठा बनर्जी कहती हैं कि डीएमएफ अब अपने कार्यान्वयन के चौथे वर्ष में है. अब इन समस्याओं के निवारण के लिए डीएमएफ का उपयोग होना चाहिए. हर जिले में समस्याओं का स्तर अलग-अलग है. डीएमएफ के लिए ग्राम सभा की सहभागिता के साथ जरूरत आधारित प्लानिंग की आवश्यकता है.
ये नाले साफ न हुए, तो मॉनसून की बारिश में फजीहत तय है
रांची नगर निगम राजधानी के नाले-नालियों की सफाई पर ध्यान नहीं देता है, जिसकी वजह से हर साल बारिश के मौसम में शहर के कई हिस्सों में जलजमाव की समस्या उत्पन्न हो जाती है. सबसे ज्यादा परेशानी निचले इलाकों में होती है. इस बार भी हालात बहुत अच्छे नहीं हैं. मौसम विभाग की मानें, तो 10 दिनों बाद मॉनसून की बारिश शुरू हो जायेगी. ऐसे में अगर इससे पहले शहर के बड़े नालों की सफाई नहीं करायी गयी, तो स्थिति और भी खराब हो सकती है.
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