लकड़ी माफिया ने दिन दहाड़े दर्जनों पेड़ काटे, ग्रामीणों के विरोध पर मारने की दी धमकी

– दर्जनों पेड़ों को काटने के लिए किया गया है चिन्हित सिल्ली : सिल्ली प्रखंड के नीलगिरि इको पार्क से ठीक सटे जंगल में लकड़ी माफिया ने रविवार को दिनदहाड़े ही दर्जनों पेड़ काट डाले. इन पेड़ों में जामुन, नीम, आसन, सेमर, शिरीश, कॉऊज समेत कई इमारती लकड़ियों के पेड़ शामिल हैं. माफिया ने ईको […]
– दर्जनों पेड़ों को काटने के लिए किया गया है चिन्हित
सिल्ली : सिल्ली प्रखंड के नीलगिरि इको पार्क से ठीक सटे जंगल में लकड़ी माफिया ने रविवार को दिनदहाड़े ही दर्जनों पेड़ काट डाले. इन पेड़ों में जामुन, नीम, आसन, सेमर, शिरीश, कॉऊज समेत कई इमारती लकड़ियों के पेड़ शामिल हैं. माफिया ने ईको पार्क के घेराव से सटे चार पेड़ भी काट दिये. इसके अलावे उसी जंगल में करीब चालीस से भी ज्यादा पेड़ों को काटने के लिए चिन्हित किया गया था.
जिन जगहों पर पेड़ काटे गये हैं उनमें पार्क से सटे फॉरेस्ट विभाग के जमीन समेत रैयती जमीन के भी पेड़ शामिल हैं. दिन के करीब आठ बजे छोटाचांगरु के बेनीलाल महतो अपने जमीन पर उसी रास्ते जा रहे थे तो उन्होंने दर्जनों लोगों को पेड़ काटते हुए देखा. मना करने पर लोगों ने इनको ही काट डालने की धमकी दी. इसकी सूचना उन्होंने लोगों को दी.
थोड़ी ही देर में घटना की सूचना उपायुक्त, अनुमंडलाधिकारी व जिला वन पदाधिकारी को भी हो गयी. वन विभाग के लोगों के घटनास्थल पर पहुंचते ही पेड़ काटने वाले लोग भाग गये. बेनीलाल महतो ने बताया कि फॉरेस्ट पार्क के बगल में अधिकतर पेड़ उनकी ही जमीन पर से काटे गये हैं. लेकिन उनको किसी प्रकार की सूचना नहीं है. सारी जमीन उनके दादाजी गुना महतो के नाम से है.
पार्क के गार्ड्स ने नहीं दी सूचना
सिल्ली के इको पार्क में वन विभाग की ओर से चार की संख्या में गार्ड ड्यूटी कर रहे थे. जानकारी के मुताबिक जब पेड़ काटे जा रहे थे तब भी इसकी सूचना उन्होंने विभाग को नहीं दी. विडंबना है कि पार्क के बाउंड्री पर से ही चार पेड़ काटे गये इसकी भी जानकारी उनको नहीं मिली.
विभाग के मिलीभगत की आशंका, उच्चस्तरीय जांच की मांग
पूरे मामले में रांची जिला कांग्रेस कमेटी के जिला उपाध्यक्ष नगेन्द्र नाथ गोस्वामी ने सरकार से घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है. उन्होंने इस संबंध में विभाग के सचिव को एक पत्र लिखकर कहा है कि जिस तरीके से दिन दहाड़े ही पेड़ काटे जा रहे थे, सरे आम पेड़ों को टोना बनाकर ले जाने की तैयारी की गयी थी. इस काम मे जितने लोग लगाये गये थे. पूरी घटना को विभाग के एक बड़े प्रतिष्ठान इको पार्क के ठीक बगल में अंजाम दिया जा रहा था. इन परिस्थितियों को देखकर ग्रामीणो का मानना है कि इतनी बड़ी योजना बिना विभाग के मिली भगत के नहीं हो सकती. इसकी जांच करके दोषियों को सजा दी जाए.
दिनभर में अधिक से अधिक पेड़ काटने की थी तैयारी
पेड़ों को काटने में जितने लोग लगाये गये थे, जिस रफ्तार से पेड़ों को काटा गया और जितने पेड़ काटने के लिये चिन्हित किये गये थे. उसको देखकर ऐसा लगता है कि लकड़ी माफिया की योजना दिनभर में अधिक से अधिक पेड़ काटने की योजना थी. पेड़ों को काटने के लिए करीब 25 से भी ज्यादा लोग लगाये गये थे. दो ही घंटे में लगभग दर्जन भर पेड़ों को काट कर उनको गाड़ियों पर लोड करने के लिए साइज भी कर लिया गया था. पेड़ के कटे भाग को देखने से ऐसा लगता है कि ये पोर्टेबल मशीनयुक्त आरी से काटे गये हैं.
रेंजर ने कहा कड़ी कार्रवाई होगी
विभाग के रेंजर आर के सिंह ने बताया कि फॉरेस्ट पार्क के बगल ने छह पेड़ काटे गये हैं. अलावे बाकी के पेड़ रैयती इलाके में कटे है. सभी पेड़ों को फिलहाल जप्त किया जा रहा है. फॉरेस्ट की जमीन पर और रैयती जमीन पर कितने पेड़ कटे हैं यह जांच का विषय है. जिस हाल में भी काटे गये हैं यह गंभीर अपराध है और दोषियों को जरूर सजा मिलेगी.
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