रांची : नहीं बंट पायेगा केंदू पत्ता मजदूरों के बीच 100 करोड़
Updated at : 29 Apr 2019 8:58 AM (IST)
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मात्र 12 करोड़ रुपये में बिका केंदू पत्ता दो साल पहले 129 करोड़ की लगी थी बोली रांची : केंदू पत्ता मजदूरों के बीच चालू साल में करीब मजदूरी का 100 करोड़ रुपये नहीं बांटा जा सकेगा. ऐसा केंदू पत्ता की बिक्री नहीं होने के कारण हुआ है. इससे करीब 40 लाख मानव दिवस का […]
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मात्र 12 करोड़ रुपये में बिका केंदू पत्ता
दो साल पहले 129 करोड़ की लगी थी बोली
रांची : केंदू पत्ता मजदूरों के बीच चालू साल में करीब मजदूरी का 100 करोड़ रुपये नहीं बांटा जा सकेगा. ऐसा केंदू पत्ता की बिक्री नहीं होने के कारण हुआ है. इससे करीब 40 लाख मानव दिवस का सृजन नहीं हो पायेगा.
मजदूरों को प्रतिदिन करीब 250 रुपये के हिसाब से मजदूरी का भुगतान किया जाता है. चालू वित्तीय वर्ष में मात्र 12 करोड़ रुपये का ही केंदू पत्ता बिक पाया है. केंदू पत्ते की तोड़ाई भी शुरू हो गयी है. 15 अप्रैल से 15 जून तक इसकी तोड़ाई होती है. दो साल पहले 129 करोड़ रुपये में केंदू पत्ते की बिक्री हुई थी. पिछले साल भी करीब 65 करोड़ रुपये के केंदू पत्ते की बिक्री हुई थी. राज्य में वन विकास निगम केंदू पत्ते की बिक्री करता है.
गढ़वा में 3.93 करोड़ रुपये की बिक्री : राज्य में सबसे अधिक गढ़वा प्रमंडल में करीब 3.93 करोड़ रुपये के केंदू पत्ते की बिक्री हुई है. रांची में 2.90, डालटनगंज में 2.72, हजारीबाग में 1.01, गिरिडीह में करीब 56 लाख और धालभूम में 30 लाख रुपये के केंदू पत्ते की बिक्री हुई है.
विभाग खुद तोड़वा सकता है पत्ता : केंदू पत्ता नीति-2015 में जिक्र है कि अगर केंदू पत्ते की बिक्री नहीं हो पाती है, तो विभाग अपने स्तर से पत्ता तोड़वा कर मजदूरी बांट सकता है. विभाग को इसके लिए प्रयास करना पड़ता है. अब तक विभाग ने इसका प्रयास शुरू नहीं किया है. तोड़ाई का समय शुरू हो जाने के कारण मजदूरों को मजदूरी नहीं मिल पा रही है.
क्या कहता है प्रबंधन
निगम के प्रबंध निदेशक ने अध्यक्ष को लिखा है कि पिछले पांच वर्षों के केंदू पत्ते की बिक्री की समीक्षा में पाया गया कि हर पांच साल पर बिक्री अच्छी होती है. उसके अगले वर्ष से बिक्री में गिरावट होने लगती है. पिछले साल (2018) में भी केंदू पत्ते की बिक्री 2017 की तुलना में कम हुई थी. ऐसा आसपास के राज्यों में भी हुआ था. बाजार में मंदी के चलते 2017 और 2018 की राशि भी क्रेताओं से वसूली नहीं जा सकी है.
पड़ोसी राज्यों में हर दिन हो रही नीलामी
पड़ोसी राज्यों (मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़) में हर दिन केंदू पत्ते की नीलामी की जा रही है. सुबह में टेंडर हो रहा है, शाम में उसको फाइनल किया जा रहा है.
मजदूरों को नकद भुगतान करने का आदेश जारी किया गया है. इससे झारखंड में काम करनेवाले कई केंदू पत्ता के व्यापारी भी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में काम कर रहे हैं.
वर्ष राजस्व (करोड़ में)
2002-03 7.68
2003-04 6.48
2004-05 6.41
2005-06 7.53
2006-07 15.29
2008-09 15.11
2009-10 16.93
2010-11 21.06
2011-12 29.12
2012-13 41.24
2013-14 24.04
2014-15 16.29
2015-16 19.12
2016-17 60.00
2017-18 108.00
2018-19 48.00
2019-20 12.00
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