सीआइडी के तत्कालीन एसपी पी मुरूगन ने समीक्षा के बाद छात्रा की मौत को हत्या बताया था, अब जांच कर रही है एसआइटी, नहीं मिल रहे हैं साक्ष्य
Updated at : 20 Apr 2019 2:42 AM (IST)
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रांची : बरियातू रोड स्थित हाइक्यू इंटरनेशल स्कूल की छात्रा विदिशा राय की मौत का केस जिसे सीआइडी के तत्कालीन एसपी पी मुरूगन ने समीक्षा के बाद हत्या की बात बतायी थी, अब उस केस की दोबारा जांच के लिए सीआइडी एडीजी ने एसआइटी का गठन किया है. एसआइटी का गठन सीआइडी के एसपी मनोज […]
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रांची : बरियातू रोड स्थित हाइक्यू इंटरनेशल स्कूल की छात्रा विदिशा राय की मौत का केस जिसे सीआइडी के तत्कालीन एसपी पी मुरूगन ने समीक्षा के बाद हत्या की बात बतायी थी, अब उस केस की दोबारा जांच के लिए सीआइडी एडीजी ने एसआइटी का गठन किया है.
एसआइटी का गठन सीआइडी के एसपी मनोज रतन चौथे का नेतृत्व में किया गया है. हालांकि एसआइटी को प्रारंभिक जांच में हत्या से संबंधित कोई ठोस तथ्य या साक्ष्य नहीं मिले हैं.
गौरतलब है कि छात्रा की मौत के दिन स्कूल के संचालक हरिनारायण चतुर्वेदी के दिल्ली में होने की पुष्टि हुई है. जिसके बाद पूर्व की जांच में सीआइडी के अधिकारियों पर सवाल उठाये गये हैं. मामले में एसपी पी मुरूगन से जवाब भी मांगा गया है. मालूम हो कि पूर्व में पी मुरूगन के नेतृत्व में जांच के लिए एसआइटी बनी थी़
सीआइडी ने अगस्त 2015 से शुरू किया था अनुसंधान : उल्लेखनीय है कि छात्रा की मौत को लेकर चतरा निवासी पिता विकास राय की शिकायत पर बरियातू थाना में केस दर्ज हुआ था. केस हत्या के आरोप में स्कूल का संचालन करनेवाले फाउंडेशन के अध्यक्ष हरिनारायण चतुर्वेदी और स्कूल के प्रशासनिक पदाधिकारी सुभाष क्रिपेकर पर था.
जांच के दौरान पुलिस को हत्या से संबंधित कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले थे. इसलिए पुलिस अधिकारियों ने साक्ष्य की कमी दिखाते हुए फाइनल रिपोर्ट न्यायालय में भेजने का निर्णय लिया था.
बाद में केस सीआइडी को ट्रांसफर किया गया था. केस का अनुसंधान सीआइडी ने सात अगस्त 2015 से आरंभ किया. तब केस का सुपरविजन सीआइडी के तत्कालीन डीएसपी दीपक अंबष्ट ने किया था. उन्होंने विदिशा राय की मौत को प्रथम दृष्टया आत्महत्या बताया था. लेकिन मामले में अंतिम निर्णय लेने से पहले कुछ बिंदुओं पर जांच का निर्देश दिया था.
लेकिन बाद में केस की समीक्षा सीआइडी के तत्कालीन एसपी पी मुरूगन ने की. तब उन्होंने समीक्षा रिपोर्ट में लिखा कि पूर्व के अनुसंधान के दौरान छात्रा की निजी डायरी को सुसाइड नोट बना दिया गया था. जबकि डायरी में कहीं भी सुसाइड की चर्चा नहीं है. छात्रा डायरी में अपने मन की बात लिखती थी.
जिसे सुसाइड नोट बताया जा रहा है, वह वास्तव में एक कविता है. जिसका शीर्षक है (अलविदा). यह घटना के छह माह पूर्व लिखी गयी थी. इसलिए इसे सुसाइड नोट मान लेना उचित नहीं है. इसलिए छात्रा की मौत को आत्महत्या का केस मान लेना उचित नहीं है.
क्या कहा था सीआइडी ने: सीआइडी के तत्कालीन एसपी ने समीक्षा रिपोर्ट में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट, आरोपियों का बयान जांच में गलत पाये जाने और परिस्थिति जनक साक्ष्य के आधार पर छात्रा की मौत को हत्या बताया था.
लेकिन दोनों प्राथमिकी के दोनों आरोपियों की संलिप्तता पर निर्णय लेने से पहले कुछ बिंदुओं पर जांच का निर्देश दिया था. एसआइटी ने भी कुछ बिंदुओं पर फिर से जांच का निर्णय लिया है. इसके बाद केस में एसआइटी अंतिम निर्णय लेगी.
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