सियासी बिसात में रिश्ते का धर्मसंकट: खूंटी में BJP के नीलकंठ अर्जुन के साथ, तो भाई कालीचरण हैं कांग्रेस के उम्मीदवार

Updated at : 17 Apr 2019 8:18 AM (IST)
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सियासी बिसात में रिश्ते का धर्मसंकट: खूंटी में BJP के नीलकंठ अर्जुन के साथ, तो भाई कालीचरण हैं कांग्रेस के उम्मीदवार

सतीश कुमार भाजपा के विरोधी यशवंत के बेटे जयंत हजारीबाग से उम्मीदवार गोड्डा पर भी रहेगी नजर घात-प्रतिघात का खेल रांची : वर्तमान लोकसभा चुनाव के दौरान झारखंड की राजनीति ने रिश्तों को धर्मसंकट में डाल दिया है. राजनीति ने ऐसी करवट ली है कि रिश्तों परीक्षा भी होनी है़ चुनावी जंग में इन रिश्तों […]

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सतीश कुमार
भाजपा के विरोधी यशवंत के बेटे जयंत हजारीबाग से उम्मीदवार
गोड्डा पर भी रहेगी नजर घात-प्रतिघात का खेल
रांची : वर्तमान लोकसभा चुनाव के दौरान झारखंड की राजनीति ने रिश्तों को धर्मसंकट में डाल दिया है. राजनीति ने ऐसी करवट ली है कि रिश्तों परीक्षा भी होनी है़
चुनावी जंग में इन रिश्तों को निभानेवालों पर नजर है़ खून के रिश्ते भी सियासत में विरोधियों की कतार में खड़े हो गये है़ं भाई-भाई, पिता-पुत्र और पिता-पुत्री के रिश्ते भी राजनीतिक सवालों के दायरे में आ गये है़ं प्रदेश में खूंटी, हजारीबाग और गोड्डा ऐसी संसदीय सीटें हैं, जहां सियासत और रिश्तों के बीच की टकराहट देखे जायेंगे़
खूंटी एक तरफ राजनीतिक गुरु तो दूसरी ओर भाई : खूंटी लोकसभा सीट से भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को प्रत्याशी बनाया है.
वहीं कांग्रेस ने कालीचरण मुंडा को मैदान में उतारा है. काली चरण मुंडा टी मुचि राय मुंडा के पुत्र हैं. कालीचरण मुंडा के छोटे भाई नीलकंठ सिंह मुंडा फिलहाल भाजपा में ग्रामीण विकास मंत्री हैं. साथ ही लंबे समय से भाजपा से जुड़े रहे हैं.
कालीचरण मुंडा इससे पहले विधायक भी रह चुके हैं. अर्जुन मुंडा व कालीचरण मुंडा के आमने-सामने की लड़ाई के बीच नीलकंठ सिंह मुंडा के लिए रिश्तों का धर्मसंकट है़, लेकिन सियासत भारी है और नीलकंठ पूरी तरह से भाजपा के लिए पसीना बहा रहे है़ं एक तरफ नीलकंठ सिंह मुंडा के राजनीतिक गुरु अर्जुन मुंडा खड़े हैं, तो दूसरी तरफ सगे भाई कालीचरण मुंडा है़ं खूंटी की चुनावी सरगरमी के बीच इसकी चर्चा खूब है़
हजारीबाग भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलनेवाले पिता के सामने हैं पुत्र : हजारीबाग लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा के पुत्र जयंत सिन्हा को प्रत्याशी बनाया है. लंबे समय तक यशवंत सिन्हा भाजपा के साथ रहे हैं, लेकिन पिछले तीन वर्षों से भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल कर बैठे हैं. हाल तक यशवंत सिन्हा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए सार्वजनिक मंच पर आलोचना करते रहे हैं.
इस दौरान उन्होंने ट्विटर पर बेटे के खिलाफ भी बात कही. हालांकि हजारीबाग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में यशवंत सिन्हा तो नहीं गये थे, लेकिन उनकी पत्नी समारोह में मौजूद थीं. अब यशवंत सिन्हा के सामने चुनौती है कि वे अपने बेटे का साथ खड़ा होते हैं या फिर मोदी सरकार के खिलाफ यूपीए के साथ.
रांची पार्टी छोड़ कर पिता के साथ खड़ा हुआ बेटा : रांची लोकसभा सीट से सांसद रामटहल चौधरी का टिकट भाजपा ने काट दिया है. रामटहल जनसंघ काल से भाजपा के साथ जुड़े हुए थे. रामटहल चौधरी पांच बार सांसद व दो बार विधायक भी रह चुके हैं.
भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने उम्र का हवाला देते हुए इनका टिकट काट दिया है. इधर रामटहल चौधरी ने बगावती तेवर दिखाते हुए पार्टी छोड़ कर निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए नामांकन कर दिया है. श्री चौधरी ने अपना इस्तीफा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा को भेज दिया.
ऐसी स्थिति में उनके बेटे रणधीर चौधरी के सामने धर्मसंकट की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी. रणधीर चौधरी भाजपा रांची जिला ग्रामीण के अध्यक्ष थे. अंतत: रणधीर चौधरी ने भी भाजपा से इस्तीफा देकर पिता रामटहल चौधरी के साथ खड़े हो गये़
गोड्डा बेटी निर्दलीय लड़ने की तैयारी में, पिता व बेटा के सामने पार्टी की निष्ठा : यूपीए महागठबंधन में गोड्डा सीट झाविमो के खाते में चली गयी है.
यहां से कांग्रेस के दिग्गज नेता फुरकान अंसारी चुनाव लड़ने को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ी. सांसद रह चुके फुरकान अंसारी और उनके विधायक बेटे इरफान अंसारी ने दिल्ली दरबार तक दौड़ लगायी. इरफान अंसारी फिलहाल जामताड़ा के विधायक हैं.
इरफान ने राहुल गांधी की रांची में आयोजित सभा में सार्वजनिक रूप से अपने पिता के लिए टिकट देने की मांग की थी. इसके बाद पार्टी के रवैये से पिता-पुत्र नाराज चल रहे हैं. फुरकान की पुत्री शबाना खातून ने बगावती तेवर दिखाते हुए चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है. ऐसे में फुरकान अंसारी व इरफान अंसारी के साथ चुनौती होगी कि वे दल की निष्ठा का साथ देंगे या फिर घर की बेटी का.
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