केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड में 10 दिवसीय शोध कार्यशाला का सफल आयोजन

Updated at : 10 Apr 2019 8:24 PM (IST)
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केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड में 10 दिवसीय शोध कार्यशाला का सफल आयोजन

रांची : केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के ट्राइबल कस्‍टमरी लॉ डिपार्टमेंट के तत्वाधान में ( भारतीय सामाजिक शोध परिषद के द्वारा वित्तीय सहयोग ) 10 दिवसीय शोध कार्यशाला का आयोजन किया गया. 1 अप्रैल से 10 अप्रैल 2019 तक आयोजित इस कार्यशाला में देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालय से पीएचडी शोध छात्रों ने हिस्‍सा लिया. इस कार्यशाला […]

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रांची : केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के ट्राइबल कस्‍टमरी लॉ डिपार्टमेंट के तत्वाधान में ( भारतीय सामाजिक शोध परिषद के द्वारा वित्तीय सहयोग ) 10 दिवसीय शोध कार्यशाला का आयोजन किया गया.

1 अप्रैल से 10 अप्रैल 2019 तक आयोजित इस कार्यशाला में देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालय से पीएचडी शोध छात्रों ने हिस्‍सा लिया. इस कार्यशाला में रिसोर्स पर्सन के रूप में देश के विभिन्न विश्वविद्यालय से विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया था.

इस दौरान प्रतिभागियों को फील्ड वर्क के लिए 100 साल से अधिक पुराने स्कॉटिश बस्ती में ले जाया गया. इस कार्यशाला मेंअलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, सेंट्रल यूनिवर्सिटी गुजरात, सिक्किम यूनिवर्सिटी और टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस मुंबई के छात्रों ने हिस्‍सा लिया. इस कार्यक्रम में शिलांग से भी एक छात्र की भागीदारी रही. कार्यशाला में 30 से अधिक पीएचडी शोध छात्र झारखंड के बाहर से आये थे, जो विश्वविद्यालय परिसर में रहकर यहां के प्रतिभागियों के साथ नये सांस्कृतिक अनुभवों को साझा किया.

कार्यशाला पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या अधिक थी. 70 शोधार्थियों ने इस कार्यशाला में विभिन्न विषयों पर अपनी बातें रखी. कार्यशाला का उद्घाटन विनोबा भावे यूनिवर्सिटी के कुलपति ने किया. कोर्स निदेशक डॉ अशोक निमेश ने बताया कि कार्यशाला को लेकर प्रतिभागी काफी सक्रिय थे. साथ में उन्होंने फील्ड वर्क और ट्राईबल मेला में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया.

कार्यशाला के समापन समारोह में दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ रवि रंजन मौजूद थे. उन्‍होंने कार्यशाला में मौजूद सभी प्रतिभागियों से बात की और उनके अनुभवों को जाना. प्रतिभागियों ने बताया कि शिक्षा पद्धति के दृष्टिकोण से इस तरह के कार्यशाला आवश्यक हैं, जिससे उच्च शिक्षा को और शोध को बल मिल सके.

कार्यशाला का मुख्य आकर्षण था, लेखों को प्रकाशित करने से लेकर डाटा विज्ञान को समझने का मौक़ा. डाटा विश्लेषण करने की सूक्ष्म तकनीकों पर गंभीरता से चर्चा की गई, एसपीएसएस जैसे पैकेजे के बारे में भी चर्चा हुई. बहुत सारे प्रतिभागियों को गुणात्मक शोध के बारे में बताया गया.

रवि रंजन ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय सामाजिक विज्ञान शोध परिषद, नयी दिल्ली इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि आने वाले समय में उच्च शिक्षा की भूमिका को देखते हुए शोध को बढ़ावा दिया जाना चाहिए. उन्होंने प्रतिभागियों को संस्थान के द्वारा दिए जा रहे विभिन्न योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी. इस मौके पर डीन ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिये.

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