रांची : मेडिकल के उपकरणों को ठीक करने में सहयोग नहीं कर रहे रिम्स के कर्मचारी

Updated at : 09 Apr 2019 12:48 AM (IST)
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रांची : मेडिकल के उपकरणों को ठीक करने में सहयोग नहीं कर रहे रिम्स के कर्मचारी

मेडिसिटी हेल्थकेयर सर्विसेस प्रा लि ने एनएचएम के निदेशक से की शिकायत रांची : राज्य भर के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में खराब पड़े 2000 से अधिक मेडिकल उपकरणों को ठीक करने के काम में लगी कंपनी मेडिसिटी ने एनएचएम के निदेशक वित्त से रिम्स के संबंध में शिकायत की है. कहा गया है […]

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मेडिसिटी हेल्थकेयर सर्विसेस प्रा लि ने एनएचएम के निदेशक से की शिकायत
रांची : राज्य भर के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में खराब पड़े 2000 से अधिक मेडिकल उपकरणों को ठीक करने के काम में लगी कंपनी मेडिसिटी ने एनएचएम के निदेशक वित्त से रिम्स के संबंध में शिकायत की है.
कहा गया है कि रिम्स में खराब पड़े कई मेडिकल उपकरणों पर से बार कोड उखाड़ दिया गया है. चूंकि उपकरणों को ठीक करने से पहले संबंधित उपकरणों के बार कोड सहित अन्य विवरण देने पड़ते हैं. इसलिए इन मशीनों को ठीक करने में समस्या आ रही है. हालांकि, रिम्स के वर्तमान निदेशक को काम में सहयोगी बताया गया है.
यह पहली बार नहीं है जब कंपनी ने विभागीय अधिकारियों से लिखित शिकायत की है. पहले भी राज्य के तीन बड़े अस्पतालों सह मेडिकल कॉलेजों रिम्स, रांची, एमजीएम जमशेदपुर तथा पीएमसीएच धनबाद सहित कई अन्य अस्पतालों में खराब पड़े बायो मेडिकल उपकरणों को ठीक करने से अब भी रोका जा रहा था. इसके बाद निविदा के जरिये चयनित कंपनी मेडिसिटी हेल्थकेयर सर्विसेस प्रा लि ने लिखा था कि अस्पताल प्रबंधन व विभागाध्यक्ष उसे सहयोग नहीं कर रहे हैं.
कंपनी के तकनीशियनों के पहुंचने पर वे गायब रहते हैं, उन्हें काम करने से रोकते हैं, काम हो जाने पर सर्विस रिपोर्ट पर दस्तखत नहीं करते तथा टेक्निकल वेरिफिकेशन में विलंब करते हैं. यहां तक कि तकनीशियनों से दुर्व्यवहार करने की भी शिकायत की गयी थी. बाद में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) द्वारा संबंधित अस्पतालों को बार-बार कहने के बाद स्थिति में सुधार आया.
लेकिन, बाधा अब भी है. विभागीय सूत्रों व अन्य जानकारों के अनुसार रिम्स, एमजीएम व पीएमसीएच में कुछलोग नहीं चाहते कि खराब या बेकार पड़े कई महत्वपूर्ण मेडिकल उपकरण काम करना शुरू करें. इससे बाहरी दुकानदारी पर असर हो सकता है.
ये हैं शिकायतें
मेडिकल उपकरणों पर लगे बार कोड उखाड़ दिये जाते हैं, जिससे नहीं मिलता विवरण
कंपनी के टेक्नीशियन के पहुंचने पर नहीं मिलते कर्मचारी या काम करने से रोकते हैं
काम हो जाने पर सर्विस रिपोर्ट पर दस्तखत नहीं करते और वेरिफिकेशन में देर करते हैं
डायलिसिस समेत 439 उपकरण हैं बेकार
दो वर्ष पूर्व एनआरएचएम की ओर से सभी सरकारी अस्पतालों का सर्वे कराया गया था. इस सर्वे का मकसद उपकरणों की सही संख्या व स्थिति जानना तथा इनके इस्तेमाल के उपाय करना था. सर्वे रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ था कि रिम्स के कुल 2377 मेडिकल उपकरणों में से 439 खराब हैं.
इनमें हेमोडायलेसिस, वेंटिलेटर, सीआर्म इमेज इंटेसिफायर, अॉटोबायो केमेस्ट्री एनलाइजर, एक्स-रे, इसीजी रिकॉर्डर व डायलिसिस सहित अन्य उपकरण शामिल हैं. खराब उपकरणों की कीमत करीब आठ करोड़ अांकी गयी थी.
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