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रांची : सीएनआइ की संपत्ति पर देश भर के कई डायसिस में चल रहा विवाद

Updated at : 25 Mar 2019 9:34 AM (IST)
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रांची : सीएनआइ की संपत्ति पर देश भर के कई डायसिस में चल रहा विवाद

रांची : चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (सीएनआइ) की संपत्ति पर देश भर के कई डायसिस में विवाद चल रहा है. कुछ ऐसी ही स्थिति छोटानागपुर डायसिस में भी है़ एक पक्ष के अनुसार, जब 29 नवंबर 1970 को चर्च ऑफ इंडिया, पाकिस्तान, बर्मा एंड सिलोन, यूनाइटेड चर्च ऑफ नॉर्दर्न इंडिया, बैप्टिस्ट चर्च ऑफ द ब्रेदर्न, […]

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रांची : चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (सीएनआइ) की संपत्ति पर देश भर के कई डायसिस में विवाद चल रहा है. कुछ ऐसी ही स्थिति छोटानागपुर डायसिस में भी है़
एक पक्ष के अनुसार, जब 29 नवंबर 1970 को चर्च ऑफ इंडिया, पाकिस्तान, बर्मा एंड सिलोन, यूनाइटेड चर्च ऑफ नॉर्दर्न इंडिया, बैप्टिस्ट चर्च ऑफ द ब्रेदर्न, मेथोडिस्ट चर्च व डिसाइपल्स अाॅफ क्राइस्ट चर्च ने मिल कर सीएनआइ (चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया) का गठन किया, तब उनकी संपत्तियां सीएनआइ की संपत्ति बन गयी. वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि चर्च की संपत्ति मूल चर्च के साथ ही रह गयी है, क्योंकि सीएनआइ बनने के बाद इस संपत्ति के हस्तांतरण के लिए कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं अपनायी गयी़ सुप्रीम कोर्ट ने भी 2013 के अपने एक निर्णय (सिविल अपील संख्या 8800- 8801/ 2013 जो स्पेशल लीव पिटीशन सिविल संख्या 16575- 16576/ 2012 पर था) में कहा है कि विभिन्न चर्च का विलय रिजोल्यूशन (संकल्प) से हुआ था, पर इसके लिए कोई भी कानूनी प्रक्रिया नहीं अपनायी गयी है़
शर्त के साथ दी गयी थी जमीन
दूसरे पक्ष का कहना है कि ‘चर्च आॅफ इंग्लैंड इन इंडिया’ ब्रिटेन के संसदीय कानून से बना था़ देश की आजादी से पहले वर्ष 1927 में इस चर्च का नाम चर्च ऑफ इंडिया कर दिया गया़ छोटानागपुर डायसिसन ट्रस्ट एसोसिएशन (सीएनडीटीए) एक कंपनी के रूप में निबंधित है और इसका निबंधन 29 मई 1929 को कराया गया था़ इस संसदीय कानून को ब्रिटेन की संसद ने बनाया था.
इसलिए इसे रद्द करने का अधिकार उसे ही है़ विलय के समय भी चर्च आॅफ इंडिया के सभी लोग सीएनआइ में शामिल नहीं हुए़ इसलिए सीएनआइ के नाम पर चर्च ऑफ इंडिया की संपत्ति का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता़ चर्च आॅफ इंडिया की सोसाइटी फॉर द प्रोपोगेशन ऑफ गॉस्पल ( एसपीजी) ने जब तीन दिसंबर 1960 को सीएनडीटीए को होल्डिंग ट्रस्टी बनाया, तब यह शर्त रखी गयी थी कि इस संपत्ति का व इस जमीन का उपयोग मसीही विश्वास, सिद्धांत व परंपराओं पर आधारित धार्मिक व सामाजिक कार्यों के लिए किया जाना है़ इसलिए किसी भी स्थिति में इसकी जमीन पर अपार्टमेंट बनाना इस शर्त का उल्लंघन है़
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