रांची : छोटी पुतली के मोतियाबिंद में ज्यादा कारगर है भारतीय रिंग : डॉ कश्यप

Updated at : 18 Mar 2019 9:28 AM (IST)
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रांची : छोटी पुतली के मोतियाबिंद में ज्यादा कारगर है भारतीय रिंग : डॉ कश्यप

रांची : नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ बीपी कश्यप ने बताया कि छाेटी पुतली के मोतियाबिंद में प्रयोग होने वाला भारतीय रिंग विदेशों के रिंग से ज्यादा कारगर है. ऑपरेशन में यह ध्यान देना जरूरी होता है कि किस मरीज में रिंग का या हुक का प्रयाेग किया जाये. डॉ कश्यप रविवार को झारखंड ऑप्थोमोलॉजिकल सोसाइटी […]

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रांची : नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ बीपी कश्यप ने बताया कि छाेटी पुतली के मोतियाबिंद में प्रयोग होने वाला भारतीय रिंग विदेशों के रिंग से ज्यादा कारगर है. ऑपरेशन में यह ध्यान देना जरूरी होता है कि किस मरीज में रिंग का या हुक का प्रयाेग किया जाये. डॉ कश्यप रविवार को झारखंड ऑप्थोमोलॉजिकल सोसाइटी व रांची ऑप्थोमोलॉजिकल फोरम के संयुक्त तत्वावधान में कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल सभागार में आयोजित पहले जोनल कॉन्फ्रेंस के वैज्ञानिक सत्र में नेत्र चिकित्सकाें को जानकारी दे रहे थे.
उन्होंने अलग-अलग मरीजों (जिनको छोटी पुतली का मोतियाबिंद था) में किस प्रकार के रिंग का प्रयोग किया गया है, इसकी जानकारी दी.
लाइव प्रेजेंटेशन में नेत्र चिकित्सकों ने डॉ कश्यप ने सवाल भी पूछे, जिसका उन्होंने जवाब भी दिया. दूसरे सत्र में डीलिंग विद स्माॅल प्यूपिल विषय पर नेत्र रोग विशेषज्ञ डाॅ भारती कश्यप ने बताया कि कब रिंग का प्रयोग करना है और कब हुक का प्रयोग करना है.
तीसरे सत्र में मैनुअल एसआइसीएस पर डॉ सतांशु माथुर ने बताया कि जब मोतियाबिंद में लेंस खिसक जाता है, तो क्या तकनीक अपनाना चाहिए. अलग-अलग मोतियाबिंद की सर्जरी में कौन सी तकनीक अपनी चाहिए. चौथे सत्र में डॉ मलय वर्मा ने कई जानकारी दी. इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ रिम्स निदेशक डॉ दिनेश कुमार सिंह ने किया. उन्होंने कहा कि सीएमई में भाग लेने से पीजी स्टूडेंट को क्रेडिट आवर मिलता है. इसलिए पीजी स्टूडेंट को भाग लेना चाहिए. लाइव सर्जरी में डॉ राजेश कुमार व डॉ प्रोतीश ने योगदान दिया.
वहीं वैज्ञानिक सत्र में डॉ राहुल प्रसाद, डॉ जीएम मंगत, डॉ रेणु व डॉ पंकज कुमार ने सहयोग किया. दूसरे सत्र में डॉ आर्यन, डाॅ सतांशु माथुर, डॉ विभूति भूषण, डॉ विनय, डॉ एसके मित्रा, डॉ विवेक, डॉ उत्पल, डॉ अनिंद्या अनुराधा, डॉ रंजन, डॉ बीके सिन्हा डॉ शैलेंद्र सिंह, डॉ आनंद, डॉ ललित जैन, डॉ सुजोय, डॉ राजीव रंजन, डॉ नागेंद्र, डॉ समिता, डॉ हेमलता, डॉ तीर्थजीत मैत्रा, डॉ रवि, डाॅ भारती शर्मा, डॉ अंशुमन, डॉ सीमा, डॉ रेखा, डॉ नीरज, डॉ साकेत आदि मौजूद थे.
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