झारखंड में खरीदे गये इंजेक्शन में दवा की जगह निकला पानी, उपयोग नहीं करने का आदेश

Updated at : 17 Mar 2019 8:01 AM (IST)
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झारखंड में खरीदे गये इंजेक्शन में दवा की जगह निकला पानी, उपयोग नहीं करने का आदेश

संजय रांची : स्वास्थ्य विभाग से संबद्ध झारखंड राज्य मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड की खरीदी दवा नकली निकल गयी है. इसमें दवा की जगह सिर्फ लिक्विड है. कॉरपोरेशन ने 2018 में एंटी रिएक्टिव इंजेक्शन (डेक्सामेथासोन सोडियम फॉस्फेट) की खरीद की थी. इसका निर्माण जैक्सन लेबोरेटरी प्रा लि मजीठा रोड, अमृतसर ने किया […]

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संजय

रांची : स्वास्थ्य विभाग से संबद्ध झारखंड राज्य मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड की खरीदी दवा नकली निकल गयी है. इसमें दवा की जगह सिर्फ लिक्विड है. कॉरपोरेशन ने 2018 में एंटी रिएक्टिव इंजेक्शन (डेक्सामेथासोन सोडियम फॉस्फेट) की खरीद की थी. इसका निर्माण जैक्सन लेबोरेटरी प्रा लि मजीठा रोड, अमृतसर ने किया है. उक्त इंजेक्शन का दिसंबर 2017 में बने एक बैच (संख्या 1-15826) का सैंपल, जांच में जाली पाया गया है.

सूचना के अनुसार इस बैच का करीब 65 हजार वॉयल इंजेक्शन था. अौषधि निदेशालय के अनुसार उक्त इंजेक्शन में सिर्फ पानी है. इसमें दवा डाली ही नहीं गयी है. हालांकि विभिन्न जिलों में भेजी गये इस इंजेक्शन में से ज्यादातर उपयोग हो गये हैं. इस एंटी रियेक्टिव इंजेक्शन का उपयोग किसी एलर्जी को दूर करने में होता है. कॉरपोरेशन ने इस इंजेक्शन की जांच दिल्ली के किसी मुल्तानी लैब से करायी थी. इस लैब की जांच में इंजेक्शन को ठीक बताया गया था.

इसके बाद कंपनी को भुगतान कर दवा राज्य भर में वितरित कर दी गयी. श्रावणी मेला के दौरान राज्य के अौषधि निरीक्षक (ड्रग इंस्पेक्टर) ने देवघर से इस इंजेक्शन का सैंपल लिया था. सरकारी लैब में इसकी जांच करायी गयी, जिसकी रिपोर्ट अभी आठ मार्च को भेजी गयी है.

जांच व खरीद में लापरवाही का मामला

मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉरपोरेशन ने 2018 में खरीदा था इंजेक्शन

जैक्सन लेबोरेटरी प्राइवेट लिमिटेड मजीठा रोड, अमृतसर ने किया है इन इंजेक्शनों का निर्माण

दिसंबर 2017 में निर्मित इंजेक्शन का बैच नंबर 1-15826 का सैंपल जांच में जाली पाया गया

इंजेक्शन बनानेवाली कंपनी पर ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के प्रावधानों के तहत होगी कार्रवाई

खरीद के दौरान सूचीबद्ध लैब में करायी जाती है दवाओं की जांच

दरअसल, कॉरपोरेशन ने सरकार से निबंधित देश की कुछ निजी ड्रग टेस्ट लैब को सूचीबद्ध (इंपैनल्ड) किया है. दवा की खरीद के दौरान इन्हीं लैब में सभी दवाअों की जांच करायी जाती है. इसकी रिपोर्ट के आधार पर दवाअों की खरीद फाइनल होती है तथा दवाअों को उपयोग के लिए राज्य भर के सरकारी अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों में भेजा जाता है. हालांकि सरकार के अपने लैब की जांच को ही मान्यता दी जाती है. अब उक्त इंजेक्शन की निर्माता कंपनी पर ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के प्रावधानों के तहत कार्रवाई होगी.

इंजेक्शन का उपयोग नहीं करने का आदेश

जांच में पाया गया कि उक्त इंजेक्शन में दवा थी ही नहीं. हम दूसरे बैच की भी जांच कर रहे हैं. अब प्राथमिकता इस दवा के उपयोग को रोकने की है. सभी जिलों से कहा गया है कि वे इस इंजेक्शन का उपयोग तत्काल रोक कर स्टॉक की सूचना अौषधि निदेशालय को दें. अब तक जमशेदपुर में इंजेक्शन का 11 हजार तथा कोडरमा, चतरा, दुमका व गोड्डा जिले में करीब चार-चार हजार वॉयल स्टॉक में होने का पता चला है.

ऋतु सहाय, निदेशक अौषधि

कार्रवाई करेंगे

यह पूरा इंजेक्शन दो बैच में था. एक बैच का इंजेक्शन खराब पाया गया है. सरकारी लैब की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित निर्माता कंपनी पर ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत हम कार्रवाई करेंगे.

शैलेंद्र श्रीवास्तव, अोएसडी कॉरपोरेशन

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