रांची : फर्जी बिल पर अत्याधिक राशि भुगतान का मामला, नौ बिजली अफसरों पर नहीं हो रही है कार्रवाई
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Mar 2019 7:46 AM
विज्ञापन
सुनील चौधरी रांची : राज्य का बिजली महकमा निजी कंपनियों को साढ़े तीन करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान करनेवाले नौ आरोपियों पर वितरण निगम कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है, जबकि 25 फरवरी 2019 को निदेशक मंडल की हुई बैठक में सभी आरोपियों पर अभियोजन चलाने की स्वीकृति दे दी गयी थी. इसके बावजूद […]
विज्ञापन
सुनील चौधरी
रांची : राज्य का बिजली महकमा निजी कंपनियों को साढ़े तीन करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान करनेवाले नौ आरोपियों पर वितरण निगम कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है, जबकि 25 फरवरी 2019 को निदेशक मंडल की हुई बैठक में सभी आरोपियों पर अभियोजन चलाने की स्वीकृति दे दी गयी थी.
इसके बावजूद निदेशक मंडल के आदेश को दरकिनार कर दिया गया और सभी आरोपी अभी भी महत्वपूर्ण पदों पर जमे हुए हैं. उल्लेखनीय है कि लगभग नौ साल पुराने इस मामले में शुरुआती दौर में 19 अफसरों के नाम सामने आये थे. लेकिन इस दौरान कार्रवाई नहीं हुई और 10 पदाधिकारी रिटायर भी हो गये.
2011 में दर्ज कराया गया था केस : यह मामला विद्युत आपूर्ति प्रमंडल आदित्यपुर, जमशेदपुर और घाटशिला का है. इसमें बिलिंग एजेंसी को फर्जी बिल के आधार अत्यधिक भुगतान करने का आरोप है. इस बाबत जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाना में 12 सितंबर 2011 को केस (कांड संख्या 150/11) दर्ज कराया गया था. तत्कालीन जेएसइबी ने भी पांच सदस्यीय जांच समिति बनाकर मामले की जांच करायी थी. इस समिति में अमित बनर्जी, शिव कुमार श्रीवास्तव, सुधीर कुमार, आरके अग्रवाल व अशोक कुमार थे.
इन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी थी. इसमें बताया गया था कि सितंबर 2002 से बिलिंग एजेंसी क्रिस्टल कंप्यूटर इन्फॉरमेशन प्रालि जमशेदपुर, इंफो सॉफ्ट डाटा सर्विस आदित्यपुर, प्रकृति इंटरप्राइजेज जमशेदपुर और वीएक्सएल कंप्यूटर जमशेदपुर द्वारा कार्यादेश की शर्तों उल्लंघन करते हुए फर्जी एवं मनगढ़ंत बिल जमाकर करोड़ों रुपये हड़प लिये गये. इसमें बोर्ड के पदाधिकारियों की संलिप्तता एवं संरक्षण होने के कारण 12.9.2011 को जमशेदपुर के उपलेखा निदेशक अजय कुमारन ने बिष्टुपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी.
एसआइटी ने भी जांच में अफसरों की संलिप्तता पायी थी : सरकार ने इस मामले में जमशेदपुर के तत्कालीन एसपी की अध्यक्षता में एसआइटी गठित की. एसआइटी द्वारा की गयी जांच में इन पदाधिकारियों की संलिप्तता पायी गयी.
इनके खिलाफ धारा 409, 420, 467, 471, 120 के तहत मामला सत्य पाया गये और इनके विरुद्ध अभियोजन चलाने की अनुमति मांगी गयी.
मामला ऊर्जा विभाग के संज्ञान में आया. विभाग द्वारा विभागीय विधि परामर्शी से सलाह ली गयी. इसमें कहा गया कि नौ पदाधिकारियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं. इसमें यह प्रमाणित होता कि वित्तीय अनियमितता में उनकी भूमिका रही है. इसके बाद विभाग द्वारा अभियोजन चलाने की अनुशंसा की गयी. जिस पर निदेशक मंडल ने अनुमति दे दी है.
पर ये पदाधिकारी आज भी अपने पद पर बने हुए हैं. इनमें रांची एरिया बोर्ड के जीएम, अधीक्षण अभियंता, ग्रामीण विद्युतीकरण के मुख्य अभियंता के पद पर हैं. सूत्रों ने बताया कि बोर्ड में फिलहाल मामले को दबाने का प्रयास चल रहा है.
इन अफसरों के खिलाफ है अभियोजन की स्वीकृति
1.एचके सिंह (तत्कालीन इइ जमशेदपुर)-मेसर्स क्रिस्टल, मेसर्स प्रकृति इंटरप्राइजेज को कुल 1,55,08800 रुपये ज्यादा भुगतान का आरोप़
2.धनेश झा (तत्कालीन इइ आदित्यपुर)-इंफो सॉफ्ट डाटा को 49,28,319 रुपये का ज्यादा भुगतान किया.
3.प्रतोष कुमार (तत्कालीन इइ आदित्यपुर)-इंफो सॉफ्ट डाटा को 19,62,863 रुपये का भुगतान किया गया.
4.सुकरू खड़िया (तत्कालीन इइ घाटशिला)-73,79,360 रुपये का ज्यादा भुगतान किया.
5.गोपाल मांझी (तत्कालीन इइ जमशेदपुर)-4,80,252 रुपये का अधिक भुगतान.
6.मुकुल गरवारे (तत्कालीन इइ सरायकेला)-1,34,252 रुपये का अधिक भुगतान.
7.संजय कुमार (तत्कालीन इइ चाईबासा)-5,87,052 का ज्यादा भुगतान किया.
8.अजीत कुमार (तत्कालीन इइ चक्रधरपुर)-49,19,567 रुपये का अधिक भुगतान किया.
9.ओपी अंबष्ठ (तत्कालीन इइ)-सभी बिल पर प्रति हस्ताक्षर किया.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










