झारखंड में समाप्त होगी वित्तरहित शिक्षा नीति

Updated at : 06 Feb 2019 9:13 AM (IST)
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झारखंड में समाप्त होगी वित्तरहित शिक्षा नीति

मुख्य सचिव से मिला वित्तरहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा का प्रतिनिधिमंडल हाइकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में बनेगी कमेटी रांची : राज्य में वित्तरहित शिक्षा नीति समाप्त होगी. इसको लेकर हाइकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में कमेटी बनेगी. इसकी प्रक्रिया जल्द शुरू की जायेगी. यह आश्वासन मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी ने मंगलवार को […]

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  • मुख्य सचिव से मिला वित्तरहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा का प्रतिनिधिमंडल
  • हाइकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में बनेगी कमेटी
रांची : राज्य में वित्तरहित शिक्षा नीति समाप्त होगी. इसको लेकर हाइकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में कमेटी बनेगी. इसकी प्रक्रिया जल्द शुरू की जायेगी. यह आश्वासन मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी ने मंगलवार को उनसे मिलने गये झारखंड राज्य वित्तरहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल को दिया. प्रतिनिधिमंडल विधायक शिवशंकर उरांव के नेतृत्व में मुख्य सचिव से मिला.
प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के स्थापना अनुमति प्राप्त हाइस्कूल, इंटर कॉलेज, संस्कृत विद्यालय व मदरसा की समस्या मुख्य सचिव के समक्ष रखी. मुख्य सचिव ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि राज्य में इंटरमीडिएट सेवा शर्त नियमावली को कैबिनेट की स्वीकृति के लिए जल्द भेजा जायेगा.
एक ही बिंदु पर स्कूल-कॉलेजों की बार-बार जांच नहीं की जायेगी. संस्कृत एवं मदरसा विद्यालयों का नियमानुसार अनुदान दोगुना किया जायेगा. स्कूल-कॉलेज की जमीन से संबंधित मामले पर जल्द निर्णय लिया जायेगा. जिन स्कूल-कॉलेजों को गत वर्ष अनुदान नहीं मिला था, उन पर सरकार सहानुभूति पूर्वक विचार करेगी.
वित्तरहित शिक्षा नीति समाप्त करने को लेकर गठित की जानेवाली कमेटी की अनुशंसा के अनुरूप कॉलेजों के अधिग्रहण या घाटानुदान देने पर निर्णय लिया जायेगा. प्रतिनिधिमंडल में सुरेंद्र झा, रघुनाथ सिंह, विजय कुमार झा, रंजीत मिश्रा, डॉ देवनाथ सिंह, नरेश घोष, अरविंद सिंह शामिल थे. उल्लेखनीय है कि गत दिनों मोर्चा का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से भी मिला था.
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