रांची : हिंसा के दौरान सरकारी-निजी संपत्ति को नुकसान होने पर देना होगा मुआवजा
Updated at : 20 Jan 2019 4:13 AM (IST)
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर डीजीपी ने प्रस्ताव तैयार कर जारी किया पुलिस ऑर्डर रांची : झारखंड में भीड़ द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शन, संस्थान पर हमला के दौरान अगर सरकारी या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है, तो इसके लिए संबंधित व्यक्ति, समूह या संगठन को क्षति की भरपाई के लिए मुआवजा देना होगा. […]
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर डीजीपी ने प्रस्ताव तैयार कर जारी किया पुलिस ऑर्डर
रांची : झारखंड में भीड़ द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शन, संस्थान पर हमला के दौरान अगर सरकारी या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है, तो इसके लिए संबंधित व्यक्ति, समूह या संगठन को क्षति की भरपाई के लिए मुआवजा देना होगा. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर डीजीपी डीके पांडेय ने प्रस्ताव तैयार कर इससे संबंधित पुलिस ऑर्डर जारी कर दिया है. ऐसे हमलों को रोकने के लिए डीजीपी ने संबंधित जिला के एसएसपी और एसपी को नोडल पदाधिकारी के रूप में चिह्नित किया है.
सीआइडी के लिए नोडल अफसर के रूप में एटीएस एसपी को चिह्नित किया गया. भीड़ द्वारा की जा रही हिंसा की सूचना एकत्र करने के लिए प्रत्येक जिला में एक हेल्पलाइन नंबर स्थापित करने तथा प्रत्येक जिला में भीड़ द्वारा निजी या सरकारी संपत्ति की क्षति पहुंचाने से संबंधित सूचना प्राप्त करने के लिए साइबर सूचना पोर्टल स्थापित करने का निर्णय लिया गया है.
डीजीपी की ओर से जारी किये गये पुलिस ऑर्डर के प्रमुख निर्देश
यदि किसी सांस्कृतिक संस्थान के विरुद्ध किसी प्रकार का जुलूस निकाला जाता है और उसमें शामिल लोग किसी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र के साथ प्रदर्शन करते हैं, तब यह माना जायेगा कि उक्त लोगों की मंशा हिंसा करने की है. ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी.
सभी नोडल अफसर सांस्कृतिक संस्थान, रंगशाला, सिनेमा हॉल, संगीत आयोजन के स्थान या हॉल और आर्ट गैलरी पर भीड़ द्वारा किये गये हमले को रोकने के लिए क्यूआरटी का गठन करेंगे.
भीड़ द्वारा हिंसा करने पर उसे नियंत्रित करने के लिए गैर घातक हथियार जैसे वाटर कैनन, अश्रु गैस और प्लास्टिक बुलेट का प्रयोग किया जाये, ताकि पीड़ित को कम से कम चोट लगे.
प्रदर्शन के क्रम में अगर हिंसा हो जाये और संपत्ति को क्षति पहुंचायी जाये, तो आयोजक के खिलाफ मामले में धारा 153ए, 295ए/ 298/425 के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जाये.
यदि किसी समूह या संगठन द्वारा प्रदर्शन या विरोध के दौरान हिंसा की घटना होती है, जिसके कारण संपत्ति को नुकसान पहुंचता है, तो उस संगठन या समूह के नेता या पदाधिकारी को 24 घंटे के अंदर संबंधित थाना में उपस्थित होने का निर्देश दिया जाये. अनुपालन नहीं करने पर फरार घोषित कर कानूनी कार्रवाई की जाये.
सभी नोडल पदाधिकारी की यह जिम्मेवारी होगी कि भीड़ द्वारा सांस्कृतिक संस्थानों या स्थानों एवं उसकी संपत्ति को क्षति होने से बचाया जाये. हिंसा से संबंधित घटना में तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर उसका अनुसंधान समय पर पूरा करने की जिम्मेदारी नोडल पदाधिकारी की होगी. शिथिलता बरतने पर नोडल पदाधिकारी दोषी माने जायेंगे.
भीड़ द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम के विरुद्ध की गयी हिंसा के कारण हुए नुकसान के लिए उक्त व्यक्ति या समूह जिसके द्वारा घटना को अंजाम देने के लिए उकसाया गया, वह जिम्मेवार होगा. मुआवजा भी उसे ही देना होगा.भीड़ द्वारा की गयी हिंसा के कारण हुई क्षति का आकलन कर मुआवजा के दावों का निराकरण किया जायेगा.
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