रांची : अलगाववादी संगठन के रूप में पनप रहा नालसा
Updated at : 05 Jan 2019 12:17 AM (IST)
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रांची : खुफिया विभाग की रिपोर्ट के अनुसार संताल परगना इलाके में इन दिनों नेशनल संथाल लिबरेशन आर्मी (नालसा) अलगाववादी संगठन के रूप में पनप रहा है. नेशनल संथाल लिबरेशन आर्मी असम के पांच उग्रवादी संगठन आदिवासी पीपुल्स आर्मी, आदिवासी कोबरा मिलिटेंट्स ऑफ असम, बिरसा कमांडो फोर्स, संथाली टाइगर फोर्स और आदिवासी नेशनल लिबरेशन आर्मी […]
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रांची : खुफिया विभाग की रिपोर्ट के अनुसार संताल परगना इलाके में इन दिनों नेशनल संथाल लिबरेशन आर्मी (नालसा) अलगाववादी संगठन के रूप में पनप रहा है. नेशनल संथाल लिबरेशन आर्मी असम के पांच उग्रवादी संगठन आदिवासी पीपुल्स आर्मी, आदिवासी कोबरा मिलिटेंट्स ऑफ असम, बिरसा कमांडो फोर्स, संथाली टाइगर फोर्स और आदिवासी नेशनल लिबरेशन आर्मी से निकल कर बना है. जिसका मुख्य मकसद है संताल परगना क्षेत्र में दबदबा कायम कर राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे विकास को बाधित करना.
जिससे विपक्षी पार्टी को आने वाले चुनाव में लाभ पहुंचाया जा सके. जिस तरह असम में यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम का गठन कर राजनीतिक दबदबा कायम किया गया है. यह असम सरकार के द्वारा प्रतिबंधित जातीय संगठन है.
इस संगठन के चीफ हाफना हेंब्रम को गोड्डा जिले से असम की खुफिया एजेंसी की सूचना पर 12 दिसंबर 2015 को गिरफ्तार किया गया था. उसी प्रकार नेशनल संथाल लिबरेशन आर्मी का गठन किया गया है.
क्या है नालसा का मकसद
जानकारी के मुताबिक छह नवंबर 2018 को असम में नेशनल संथाल लिबरेशन आर्मी संगठन के ही नृपेण हांसदा को पुलिस और कोबरा बटालियन से संयुक्त रूप से गिरफ्तार किया था. वर्तमान में यह साहेबगंज जिला के कुछ गांवों में सक्रिय हो चुका है.
इलाके के एक गांव के दो युवकों के सहयोग से असम से 10-15 लोग आये हैं. वे रात में इलाके के कुछ स्थानों में बैठक करते हैं. असम से आये लड़कों के पास हथियार होने का भी संदेह है. वे इलाके में घूम- घूम कर राशन डीलरों को धमकी भी दे रहे हैं कि अगर उन्हें 50- 50 किलो चावल नहीं मिला तो वे राशन डीलर को गोली मार देंगे.
खुफिया विभाग की रिपोर्ट के अनुसार बैठक में शामिल होने वाले युवकों को स्थानीय कुछ लोगों द्वारा सहयोग भी प्रदान किया जा रहा है. चावल नहीं देने पर उन लोगों को अपने बारे में आतंकवादी होने की धमकी दी जाती है. असम से आये लड़कों ने नेशनल संथाल लिबरेशन आर्मी नाम के लेटर पैड पर राशन डीलरों के नाम पर पत्र भी जारी किया है.
खुफिया विभाग को इस बात की भी सूचना मिली है कि असम से आये लड़कों को विपक्षी पार्टी और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से लगातार सहयोग मिल रहा है. एक राजनीतिक पार्टी और पाॅपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की योजना है कि संताल के जिन क्षेत्रों में भाजपा की स्थिति मजबूत है.
उन क्षेत्रों में चुनाव बहिष्कार किया जाये या मतदाता को धमका कर चुनावी नतीजे अपने पक्ष में कराया जाये. उनकी इच्छा यह भी है कि असम राज्य की तर्ज पर झारखंड में होने वाली एआरसी पर भी रोक लगायी जाये और भारतीय मुद्रा को क्षति पहुंचाने के लिए असम, पश्चिम बंगाल और साहेबगंज के रास्ते नकली नोटों का बड़ा कारोबार किया जा सके.
रिपोर्ट के अनुसार जिस तरह से खूंटी, सरायकेला, चाईबासा, गुमला, सिमडेगा जिला में पत्थलगड़ी के नाम पर प्रशासनिक और बाहरी लोगों को गांव में प्रवेश से वर्जित किया गया था. जिसके पीछे उद्देश्य था वहां की खनिज संपदा और अफीम तस्करी को बढ़ावा देना. उसी तरह सरकारी योजनाओं का विरोध कर नालसा भी सरकार के लिए आगे समस्या पैदा कर सकती है.
सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पीजीटी डाकिया योजना, जो संताल में शुरू की गयी है. जिससे क्षेत्र के पहाड़िया आदिवासी जनजाति सीधे राशन प्राप्त कर रहे है. इस वजह से उनकी आस्था सरकार के प्रति बढ़ी है. उस आस्था को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया तोड़ने के उद्देश्य से नेशनल संथाल लिबरेशन आर्मी का सहयोग कर रही है.
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