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रांची : विद्यार्थी पढ़ाई के साथ अन्य क्षेत्रों में भी अव्वल

Updated at : 21 Dec 2018 9:02 AM (IST)
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रांची : विद्यार्थी पढ़ाई के साथ अन्य क्षेत्रों में भी अव्वल

रांची : जेवीएम श्यामली स्कूल का वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम द हरबींजर्स एक सांस्कृतिक महोत्सव गुरुवार को मेकन कम्युनिटी हॉल में हुआ. मुख्य अतिथि श्यामली महिला समिति की अध्यक्षा नूपुर भट्ट ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया. उन्होंने कहा कि स्कूल के विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी अपना नाम और स्कूल का नाम रोशन […]

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रांची : जेवीएम श्यामली स्कूल का वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम द हरबींजर्स एक सांस्कृतिक महोत्सव गुरुवार को मेकन कम्युनिटी हॉल में हुआ. मुख्य अतिथि श्यामली महिला समिति की अध्यक्षा नूपुर भट्ट ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया. उन्होंने कहा कि स्कूल के विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी अपना नाम और स्कूल का नाम रोशन कर रहे हैं. जेवीएम श्यामली के छात्र देश-विदेश में प्रतिष्ठित पदों पर हैं.
स्कूल के विद्यार्थी मेडिकल, इंजीनियरिंग, नासा, न्यायपालिका, खेल में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी आदि अनेक क्षेत्र में हैं. विशिष्ट अतिथि डीपीएस के प्राचार्य डॉ राम सिंह ने कहा कि जेवीएम श्यामली बहुत ही पुराना स्कूल है और शिक्षा के क्षेत्र में स्कूल का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. इस अवसर पर स्कूल की विद्यालय प्रबंधन समिति के उपाध्यक्ष संजीव कुमार, प्राचार्य समरजीत जाना, उप प्राचार्य एसके घोष मुख्य रूप से उपस्थित थे.
विद्यार्थियों ने दिखायी गुरु चाणक्य और चंद्रगुप्त मौर्य की अतीत की गौरव गाथा : कार्यक्रम का शुभारंभ भरतनाट्यम नृत्य से हुआ. स्कूल की संगीत मंडली द्वारा भावना का दीप है शुभकामना की आरती… बोल पर स्वागत गीत प्रस्तुत किया. इसके बाद छात्राआें ने तीन गीतों का मिश्रण सूफियाना गीत जिसके बोल थे पिया घर आवे…, ओ रे पिया…, लागी तुमसे मन की लगन… प्रस्तुत किया. सीनियर सेकेंडरी के विद्यार्थियों ने अंग्रेजी नाटिका दिस इज द टेस्ट प्रस्तुत किया.
इसमें दिखाया कि एलिश नाम की एक छात्रा है, जो सपने में देखती है कि विल्लियंस नामक उसके शिक्षक तथा उसके शरारती सहपाठियों द्वारा उसे परेशान किया जा रहा है तथा उसकी जिस विश्वविद्यालय में नामांकन कराने की तमन्ना है, वह पूरी नहीं हो पा रही है. तभी अचानक एलिस की मां आकर उसे जगाते हुए यह बताती है कि उसका नामांकन उसके सपने के विश्वविद्यालय में हो गया है.
रोचकता व हास्य से परिपूर्ण नाटक देख कर लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो गये. इसके बाद छात्राआें ने फ्यूजन नृत्य प्रस्तुत किया. इस नृत्य से यह संदेश दिया कि नृत्य से बढ़ कर कोई दूसरा व्यायाम नहीं है. विद्यार्थियों ने गुरु चाणक्य और चंद्रगुप्त मौर्य पर आधारित एक नृत्य लघु नाटिका शीर्षक अतीत के झरोखे से प्रस्तुत किया.
इसमें दिखाया गया कि कैसे एक विद्वान दूरदर्शी तथा दृढ़ संकल्पी गुरु चाणक्य अपने शिष्य चंद्रगुप्त मौर्य को साधारण से असाधारण बना देते हैं और चंद्रगुप्त मौर्य को सम्राट बना देता है. इस नृत्य नाटिका द्वारा गुरु चाणक्य और चंद्रगुप्त मौर्य की अतीत की गौरव गाथा की याद दिलाते हुए मन में राष्ट्रीय चेतना को जागृत किया.
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