रांची : झालसा व पीएलवी मंगला पूर्वी क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ घोषित

Updated at : 18 Dec 2018 12:58 AM (IST)
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रांची  :  झालसा व पीएलवी मंगला पूर्वी क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ घोषित

रांची : पूर्वी क्षेत्र में झारखंड के राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) व तिलियाचक काठीकुंड दुमका के लीगल सर्विस क्लिनिक के पारा लीगल वोलेंटियर (पीएलवी) मंगला देहरी को सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया है. विगत दिनों दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में केंद्रीय विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद व नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस मदन […]

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रांची : पूर्वी क्षेत्र में झारखंड के राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) व तिलियाचक काठीकुंड दुमका के लीगल सर्विस क्लिनिक के पारा लीगल वोलेंटियर (पीएलवी) मंगला देहरी को सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया है.
विगत दिनों दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में केंद्रीय विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद व नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस मदन बी लोकुर ने झालसा व पीएलवी मंगला देहरी को शील्ड व प्रमाण पत्र प्रदान किया.
झालसा की अोर से सदस्य सचिव एके राय ने अवार्ड प्राप्त किया था. पहली बार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार का पुरस्कार शुरू किया गया, जिसमें पूर्वी क्षेत्र के राज्यों में से झालसा को चुना गया.
पूर्वी क्षेत्र में झालसा को सर्वश्रेष्ठ राज्य विधिक सेवा प्राधिकार का पुरस्कार मिलने से झारखंड का गौरव बढ़ा
झालसा के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस डीएन पटेल ने डोरंडा स्थित न्याय सदन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि पूर्वी क्षेत्र के झारखंड सहित उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओड़िशा, छत्तीसगढ़ राज्यों में झालसा को सर्वश्रेष्ठ राज्य विधिक सेवा प्राधिकार का पुरस्कार मिलने से झारखंड का गाैरव बढ़ा है.
झालसा जो करता है, वह बाद में पूरे देश में लागू हो जाता है. ऐसे कई उदाहरण हैं. झालसा का नाम लिम्का बुक अॉफ रिकॉर्ड में भी दर्ज है.
झालसा ने ट्रेनिंग का माड्यूल तैयार किया, जो देश के सभी राज्यों में लागू हुआ है. जस्टिस पटेल ने कहा कि लोगों को मध्यस्थता से लाभ उठाना चाहिए. मध्यस्थता की सफलता की दर 60 प्रतिशत है. मध्यस्थता से मामला निष्पादित होने के बाद उसकी अपील नहीं की जा सकती है. आदेश फाइनल होता है.
काैन हैं पीएलवी मंगला
मंगला देहरी को बेस्ट पारा लीगल वोलेंटियर (पीएलवी) चुना गया है. दिल्ली के कार्यक्रम में जाने के लिए श्री देहरी के पास ढंग के कपड़े भी नहीं थे. वे पहली बार दिल्ली गये. झालसा ने उन्हें कपड़ा उपलब्ध कराया.
जस्टिस डीएन पटेल ने बताया कि आदिवासी मंगला देहरी शिकारीपाड़ा में रहते हैं. बिना सड़क के पहाड़ों व जंगलों से होते हुए 15 किमी का रास्ता तय कर मरीज को अपने कंधे पर लाकर अस्पताल पहुंचाने का दुरूह कार्य करते हैं.
उन्होंने पांच पीड़ितों को मुआवजा दिलवाया है. लोगों को जागरूक करने के लिए उन्होंने 30 जागरूकता कैंप का आयोजन किया. उन्होंने 250 लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया है. दो बच्चों को बचाया. उनके कार्यों को देखते हुए नालसा ने पूर्वी क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ पीएलवी का अवार्ड उन्हें प्रदान किया.
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