jharkhand@18 : पढ़ें इस सीरीज की अंतिम कड़ी, 70 साल इंतजार के बाद जब गांव में आयी बिजली

Updated at : 10 Dec 2018 11:26 AM (IST)
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jharkhand@18 : पढ़ें इस सीरीज की अंतिम कड़ी, 70 साल इंतजार के बाद जब गांव में आयी बिजली

झारखंड स्थापना के 18 साल पूरे होने पर हमने एक सीरीज शुरू की और झारखंड की 18 कहानियां आपके सामने रखी. इन कहानियों से हमने गांव, शहर, विकास, योजना, युवा सभी विषयों को आपके सामने रखा. इन कहानियों के माध्यम से हमने समझने की कोशिश की झारखंड के अबतक के सफर को. यह झारखंड स्थापना […]

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झारखंड स्थापना के 18 साल पूरे होने पर हमने एक सीरीज शुरू की और झारखंड की 18 कहानियां आपके सामने रखी. इन कहानियों से हमने गांव, शहर, विकास, योजना, युवा सभी विषयों को आपके सामने रखा. इन कहानियों के माध्यम से हमने समझने की कोशिश की झारखंड के अबतक के सफर को. यह झारखंड स्थापना दिवस पर शुरू हुई सीरीज की 18वीं और अंतिम कड़ी है. गांव में पहली बार बिजली पहुंचने की खुशी इस अंतिम कड़ी में हम आपके साथ साझा कर रहे हैं.

रांची जिला अंतर्गत अनगड़ा प्रखंड का एक गांव है छोटकी गोड़ांग. इसी गांव में एक टोली है, महतो टोली. यहां सरकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंच रहा है. हालांकि, बीसा पंचायत अंतर्गत आनेवाले इस टोले में विकास की रफ्तार काफी धीमी है. यहां तक पहुंचने के लिए ऊबड़-खाबड़ रास्ते से भी आपको गुजरना होगा. गांव में घुसते ही मिलुआ महतो का घर मिलता है. वह प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत आवास बनवाने में व्यस्त दिखे. पूरा परिवार मिलकर घर बनाने में जुटा है.
गांव में बिजली आ गयी, इस सवाल पर मिलुआ कहते हैं कि 70 साल के लंबे इंतजार के बाद अब जाकर गांव में बिजली आयी है. अब उनके घर में भी बल्ब जल रहा है. उनके पास राशन कार्ड नहीं है. पहले रोशनी के लिए केरोसिन तेल लेने के लिए दो किलोमीटर दूर छोटकी गोड़ांग जाना पड़ता था. पैसे भी अधिक खर्च करने पड़ते थे. अब बिजली आने से इससे मुक्ति मिल गयी. आजादी के बाद से अंधेरे में रहने के बाद इस साल दिपावली से दो दिन पहले महतोटोली में बिजली आयी है. इस क्षेत्र में बिजली आने से ग्रामीण काफी खुश हैं.
एक महीने में ही कितना बदला गांव
महतो टोली में 30 से 35 परिवार रहते हैं. खेती-बारी, मजदूरी और वनोत्पाद ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य स्त्रोत है. पहले गांव में बिजली नहीं होने के कारण ग्रामीण कृषि के लिए आधुनिक उपकरण का उपयोग नहीं कर पाते थे, लेकिन अब ग्रामीण उत्साहित हैं कि वो भी अब मशीनों का इस्तेमाल कर पायेंगे. हालांकि, बहुत ज्यादा बदलाव अभी महतो टोली में देखने को नहीं मिलता है, क्योंकि गांव में बिजली पहुंचे अभी एक महीने भी नहीं हुए हैं.
किरोसिन से छुटकारा
ग्रामीण मिलुआ महतो बताते हैं कि गांव में लगभग 16 घंटे बिजली उपलब्ध रहती है. रात में बिजली रहती है, जिस कारण अब रात में घर से बाहर निकलने में डर नहीं लगता है. साथ ही रोशनी भी पर्याप्त मिलती है. गांव में बिजली आने से अब ग्रामीणों को केरोसिन तेल लेने के झंझट से छुटकारा मिल गया है. बच्चे अब पहले की अपेक्षा अच्छी तरह पढ़ाई कर पा रहे हैं. पहले ग्रामीण रात के सात-आठ बजे ही सो जाते थे, पर बिजली आने के बाद अब ग्रामीण रात के नौ- दस बजे सोने लगे हैं.
देश दुनिया से जुड़ा कनेक्शन
गिलुआ महतो कहते हैं कि मुद्दत के बाद बिजली आयी है. काफी खुशी हो रही है. अब वे भी घर बैठे ही देश-दुनिया की खबर टीवी से ले सकेंगे. सिंचाई कार्य में भी ज्यादा पैसे नहीं खर्च करने पड़ेंगे.
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