रांची : एक सितंबर 1960 को शुरू हुआ था पहला सत्र, डॉ एनएल मित्रा ने ली थी पहली क्लास
Updated at : 04 Dec 2018 8:35 AM (IST)
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पुनर्मिलन-2018. आरएमसीएच के पहले सत्र के एलुमनी डॉ गोपाल सिन्हा ने कहा क्लिनिकल की पढ़ाई के लिए तीन बस में सदर अस्पताल जाते थे छात्र रांची : एसोसिएशन ऑफ आरएमसीएच/रिम्स एलुमनी ने सोमवार को एलुमनी मीट पुनर्मिलन-2018 का आयोजन रिम्स ऑडिटोरियम में किया. इसमें देश-विदेश से आये करीब 150 से ज्यादा विद्यार्थियाें ने भाग लिया. […]
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पुनर्मिलन-2018. आरएमसीएच के पहले सत्र के एलुमनी डॉ गोपाल सिन्हा ने कहा
क्लिनिकल की पढ़ाई के लिए तीन बस में सदर अस्पताल जाते थे छात्र
रांची : एसोसिएशन ऑफ आरएमसीएच/रिम्स एलुमनी ने सोमवार को एलुमनी मीट पुनर्मिलन-2018 का आयोजन रिम्स ऑडिटोरियम में किया. इसमें देश-विदेश से आये करीब 150 से ज्यादा विद्यार्थियाें ने भाग लिया. कॉलेज परिसर में 58 साल बाद आने की खुशी डॉक्टरों के चेहरे पर देखते बन रही थी.
अपनी पत्नी व पति को सभी स्थान दिखा कर सब अपनी पुरानी यादों को बता रहे थे. न्यू जर्सी अमेरिका में सेवा दे रहे आरएमसीएच के पहले सत्र (1960 बैच) के विद्यार्थी रहे डॉ गोपाल सिन्हा ने कहा कि एक सितंबर 1960 को हॉस्टल संख्या-1 (वर्तमान मेें हॉस्टल संख्या-2 ) डायनिंग हॉल में पहली क्लास हुई थी. पहले दिन तीन क्लास ली गयी थीं. पहली क्लास एनाटोमी की डॉ एलएन मित्रा ने ली थी.
डॉ बीपी राय ने फिजियोलॉजी व डॉ सिन्हा ने बायोकेमेस्ट्री की कक्षाएं ली थीं. उन्हाेंने कहा कि सत्र में उस समय 100 विद्यार्थी कक्षा के लिए उपस्थित थे. हमारे कॉलेज में अस्पताल नहीं था. एमबीबीएस के तीसरे साल में पहुंचने पर क्लिनिकल पढ़ाई की आवश्यकता पड़ी. इसके लिए सदर अस्पताल में हमें भेजा जाने लगा.
तीन बस में हमलोग लद कर सदर अस्पताल जाते थे. वहां भी एक्का-दुक्का मरीज ही इलाज के लिए अाते थे. मुश्किल से क्लिनिकल की पढ़ाई हुई. वर्ष 1964 में आरएमसीएच की क्लास शुरू हुई. कार्यक्रम में लोगाें ने अपनी-अपनी पुरानी यादें ताजी की. मंच पर आकर अपने अनुभव व खट्टे-मीठे पल बताये. आयोजन को सफल बनाने के लिए आयोजन समिति के चेयरमैन डॉ वीके जैन व सचिव डॉ मिन्नी रानी अखौरी ने सबका आभार व्यक्त किया.
पुराने शिक्षकों को देख कर झुके सिर पैरों पर पड़े हाथ
एलुमनी मीट में पटना पीएमसीएच से सेवानिवृत्त डॉक्टर गोपाल शरण सिंह ने कहा कि मेरे कई शिक्षक आज पुनर्मिलन समारोह में मिले, जिन्हें देखकर उनकी क्लास की पढ़ाई याद आ गयी. हम क्लास शुरू होने से पहले ही अपनी क्लास में हाेते थे. क्लास के समय पूरी शांति होती थी. उन्होंने बताया कि उस समय शिक्षक व शिष्य की बातें ही अलग थी. आज भी हम अपने गुरु के सामने सर ऊपर कर नहीं खड़े हो सकते हैं. आज के विद्यार्थी इसको ज्यादा महत्व नहीं देते हैं.
म्यूजिकल चेयर व कप गिराओ प्रतियोगिता में लिया भाग
पुनर्मिलन समारोह में शामिल होने आये लोगाें के लिए कई प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गयी थीं. महिलाअों के लिए म्यूजिकल चेयर व कप गिराओ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. 50, 55 व 60 साल की महिला डॉक्टरों ने काफी उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया. कप गिराओ प्रतियोगिता में कप गिराने के लिए सबने निशाना साधा. कप गिरने के बाद लोग खुशी से कूदते हुए दिखे.
इन्हें किया गया सम्मानित
कार्यक्रम में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ एनपी साहू व डॉ जनार्दन को सम्मानित किया गया. वहीं, फस्ट प्रोफेशनल (एनाटॉमी) में 2016 बैच की टॉपर मोहिनी पांडेय, फस्ट प्रोफेशनल (फिजियोलॉजी) में 2016 बैच की टॉपर रही मिनाक्षी अग्रवाल, सेकेंड प्रोफेशनल में सना नाज व फाइनल टॉपर में नेहा कुमारी को पुरस्कृत किया गया. वहीं बेस्ट ग्रेजुएट का पुरस्कार उत्कर्ष को दिया गया.
ह्वाट्सएप से एलुमनी को जोड़ने का होगा प्रयास
एसोसिएशन ऑफ आरएमसीएच/रिम्स एलुमनी की बैठक कार्यक्रम के अंत में आयोजित की गयी. इस दौरान पुनर्मिलन में अधिक से अधिक लोगों के शामिल होने पर जोर दिया गया. एक दिन पहले गोल्डेन जुबली बैच के लाेगों को पुनर्मिलन में शामिल होने को आवश्यक करने पर सहमति बनी. ह्वाट्सएप ग्रुप व साेशल नेटवर्क द्वारा लोगाें को जोड़ने पर विशेष बल दिया गया.
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