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रांची : रसोइया दर्द से छटपटाती रही, देर से पहुंची एंबुलेंस

Updated at : 17 Nov 2018 1:27 AM (IST)
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रांची :  रसोइया दर्द से छटपटाती रही, देर से पहुंची एंबुलेंस

रांची : 15 सूत्री लंबित मांगों को लेकर झारखंड प्रदेश विद्यालय रसोइया, संयोजिका, अध्यक्ष संघ के तत्वावधान में राजभवन के समक्ष अनिश्चितकालीन घेरा डालो-डेरा डालो कार्यक्रम चलाया जा रहा है. यह आंदोलन शुक्रवार को खेलगांव स्थित अस्थायी कैंप जेल में भी जारी रहा. जिला प्रशासन ने राजभवन के समक्ष आंदोलनरत रसोइया, संयोजिका व अध्यक्ष संघ […]

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रांची : 15 सूत्री लंबित मांगों को लेकर झारखंड प्रदेश विद्यालय रसोइया, संयोजिका, अध्यक्ष संघ के तत्वावधान में राजभवन के समक्ष अनिश्चितकालीन घेरा डालो-डेरा डालो कार्यक्रम चलाया जा रहा है. यह आंदोलन शुक्रवार को खेलगांव स्थित अस्थायी कैंप जेल में भी जारी रहा. जिला प्रशासन ने राजभवन के समक्ष आंदोलनरत रसोइया, संयोजिका व अध्यक्ष संघ के सदस्यों को 14 नवंबर की रात गिरफ्तार कर खेलगांव स्थित कैंप जेल में रखा गया था.

तब से आंदोलनकारी वहां पर जमे हुए हैं. आंदोलन में शामिल दो रसोइया संयोजिकाएं गर्भवती हैं. गुरुवार की देर रात से एक गर्भवती रसोइया प्रसव पीड़ा से परेशान थी. संघ ने कहा कि रसोइया संयोजिका द्वारा बार-बार अनुरोध के बावजूद समय पर एंबुलेंस नहीं भेजी गयी. शुक्रवार की दोपहर एंबुलेंस मंगायी गयी तथा दर्द से कराह रही रसोइया को रिम्स भेजा गया.

उनके साथ कई रसोइया भी रिम्स गयी हैं. संघ की अोर से 25 सितंबर से डेरा डालो-घेरा डालो कार्यक्रम चलाया जा रहा है. इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष अजीत प्रजापति, प्रदेश महासचिव प्रेमनाथ विश्वकर्मा, कोषाध्यक्ष अनिता देवी सहित कई आंदोलनकारी उपस्थित थीं.

रसोइया संघ 25 सितंबर से है अनिश्चितकालीन आंदोलन पर, संघ की प्रमुख मांगें
केंद्र सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये देने, तमिलनाडु की तर्ज पर चतुर्थ वर्गीय पदों पर समायोजित करने, सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी देने, पांच लाख का जीवन बीमा करने, हटाये गये कर्मियों को वापस लेने, पोशाक देने, 10,000 स्कूलों को बंद करने का निर्णय वापस लेने सहित 15 सूत्री मांगें शामिल हैं.
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