रांची : आप वॉल्व खरीदते रह जायेंगे और मरीज चल बसेगा स्थायी टेंडर निकाल कर एजेंसी का चयन कीजिए

Updated at : 01 Nov 2018 9:06 AM (IST)
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रांची : आप वॉल्व खरीदते रह जायेंगे और मरीज चल बसेगा स्थायी टेंडर निकाल कर एजेंसी का चयन कीजिए

रिम्स में समीक्षा बैठक. स्वास्थ्य मंत्री थे खामोश, सचिव ने ही ली प्रबंधन की क्लास, बोले रांची : स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी और स्वास्थ्य सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी दोपहर 12 बजे रिम्स पहुंच गये थे. दोपहर 2:15 बजे तक बैठक के बाद दोनों यहां से रवाना हो गये. श्री कुलकर्णी सचिव का प्रभार लेने […]

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रिम्स में समीक्षा बैठक. स्वास्थ्य मंत्री थे खामोश, सचिव ने ही ली प्रबंधन की क्लास, बोले
रांची : स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी और स्वास्थ्य सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी दोपहर 12 बजे रिम्स पहुंच गये थे. दोपहर 2:15 बजे तक बैठक के बाद दोनों यहां से रवाना हो गये. श्री कुलकर्णी सचिव का प्रभार लेने के बाद पहली बार रिम्स में आये थे. बैठक शुरू होते ही उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के अधिकारियों से एक-एक अस्पताल की सभी सेवाओं की जानकारी ली. साथ ही कमियां गिनाते हुए उनके समाधान के रास्ते भी बताये.
स्वास्थ्य सचिव ने आयुष्मान भारत के तहत उपकरण और दवाओं की खरीद की जानकारी मांगी. बताया गया कि मरीज भर्ती होता है, तो जरूरत के अनुसार तीन कोटेशन डाले जाते हैं. एक दिन में उपकरण व सामान की खरीदारी कर ली जाती है. इतना सुनते ही सचिव ने कहा : मरीज को वाल्व रिप्लेसमेंट करना है और आप खरीदारी करते रहेंगे. ऐसे में मरीज तो चल बसेगा. स्थायी टेंडर निकाल कर एजेंसी का चयन कीजिए. मैनपावर के मुद्दे पर स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि नियुक्ति पर शासी परिषद में ही निर्णय लिया जा सकता है.
क्लास फोर्थ की नियुक्ति आउटसोर्सिंग एजेंसी से करायें. वहीं, तृृतीय वर्ग की नियुक्ति के लिए किसी एजेंसी का सहारा लें. इससे पारदर्शिता रहेगी और सवाल भी नहीं उठेगा. इमरजेंसी के सामने वाहन खड़ा रहने पर वह काफी नाराज दिखे. कहा कि प्रवेश द्वार से ही अतिक्रमण दिखायी देता है. रिम्स मुख्य द्वारा पर पूजा पंडाल बनाने पर भी उन्होंने सवाल उठाया. कहा : यह मरीजों के अस्पताल तक आने-जाने का रास्ता है. किसकी अनुमति से यहां पंडाल बनाया जाता है? उन्होंने अस्पताल में ग्रीन एरिया डेवेलप करने का आदेश भी दिया.
बैठक में ये लोग भी थे मौजूद :बैठक में अपर निदेशक (प्रशासन) अमित कुमार, डिप्टी डायरेक्टर गिरिजा शंकर प्रसाद, अधीक्षक डॉ विवेक कश्यप, उपाधीक्षक डॉ संजय कुमार, मेडिकल अफसर स्टोर डॉ रघुनाथ सहित कई विभागाध्यक्ष शामिल थे.
स्वास्थ्य सचिव ने रिम्स निदेशक डाॅ आरके श्रीवास्तव ने कहा कि डायरेक्टर के पास बहुत पावर होता है, लेकिन आप अपने पावर का इस्तेमाल ही नहीं करते हैं. छोटी-छोटी चीजों की खरीद के लिए अपने अधिकार का इस्तेमाल करें. इससे समस्या का तुरंत समाधान हो जायेगा.
बैठक के बाद निदेशक कार्यालय से बाहर निकले हुए स्वास्थ्य सचिव थोड़ी देर के लिए रुक गये. उन्होंने निदेशक से कहा कमरे के बार पौधों वाले गमले रखवाइये. इससे सकारात्मक माहौल बनता है. रिम्स से निकलते समय डायरेक्टर कार्यालय के सामने लगे ठेला को देखकर नाराज हो गये. उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि सुरक्षाकर्मी किस तरह अपनी सेवा देते हैं. बैठक के बाद रिम्स निदेशक ने पत्रकारों को बताया कि मंत्री व सचिव ने बिंदुवार सभी सेवाओं पर चर्चा की. मैनपावर पर उन्होंने कहा कि बुधवार को रोस्टर पर फैसला ले लिया जायेगा.
सफाई
रिम्स की सफाई एजेंसी के पैसे का मामला आते ही स्वास्थ्य सचिव ने एजेंसी के संचालक को बुलवाया. संचालक के आने पर सचिव ने पूछा : क्या सफाई व्यवस्था सही है? मरीज के वार्ड के शौचालय का प्रयोग करने चलें, वहां सफाई मिलेगी? संचालक ने कहा : सर! एकदम मिलेगी. इसके बाद उन्होंने निदेशक को दीपावली से पहले भुगतान करने का आदेश दिया.
किचन
स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि किचन के कर्मचारी टोपी व हाथ में ग्लब्स लगाये नहीं दिखते हैं. हमेशा मरीजों द्वारा किचन की शिकायत मिलती है. इस पर एजेंसी के सुपरवाइजर ने कहा : सर! कर्मचारी वर्दी व ग्लब्स लगाये रहते हैं. सचिव ने कहा कि आपके किचन की व्यवस्था ऐसी हो कि डॉक्टर या सचिव भी जाकर खाना खा सकें. आप अपनी व्यवस्था दुरुस्त कीजिए, हम कभी भी आ सकते हैं.
मेडाॅल
सचिव ने निजी जांच एजेंसी मेडाॅल को अपनी सेवाएं दुरुस्त करने का आदेश दिया. कहा : लॉग बुक रखें. ब्लड सैंपल लेने व रिपोर्ट देने का समय अंकित करें, ताकि यह पता चले कि आप कितनी देर में मरीज को रिपोर्ट देते हैं. सुनिश्चित करें कि रिपोर्ट के लिए खिड़की पर भीड़ न लगे. बेड-टू-बेड मरीज को सुविधा दें. महत्वपूर्ण डिपार्टमेंट में सैंपल कलेक्शन के लिए उपस्थित रहें.
पानी रिम्स के विभिन्न वार्डों में पानी की समस्या पर सचिव ने नाराजगी जतायी. कहा : हमेशा अखबारों में खबर छपती है कि वार्डों में पानी के लिए मरीज और उनके परिजन परेशान हैं. पीएचइडी विभाग के कर्मचारी वार्ड में घूम-घूम कर यह सुनिश्चित करें कि कहां पानी नहीं मिल रहा है. एेसा दोबारा सुनने को नहीं मिलना चाहिए कि पानी के लिए मरीजों को दौड़ लगानी पड़ रही है.
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