रांची : राजभवन के समक्ष पारा शिक्षकों ने दिया धरना
Updated at : 31 Oct 2018 9:50 AM (IST)
विज्ञापन

आज संताल परगना प्रमंडल के पारा शिक्षक देंगे धरना, दी गयी चेतावनी रांची : एकीककृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा झारखंड प्रदेश के तत्वावधान में मंगलवार को दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल रांची के सैकड़ों पारा शिक्षकों ने राजभवन के समक्ष रोषपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारी छत्तीसगढ़ की तर्ज पर स्थायीकरण करने आैर पूर्ण वेतनमान देने की मांग कर […]
विज्ञापन
आज संताल परगना प्रमंडल के पारा शिक्षक देंगे धरना, दी गयी चेतावनी
रांची : एकीककृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा झारखंड प्रदेश के तत्वावधान में मंगलवार को दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल रांची के सैकड़ों पारा शिक्षकों ने राजभवन के समक्ष रोषपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारी छत्तीसगढ़ की तर्ज पर स्थायीकरण करने आैर पूर्ण वेतनमान देने की मांग कर रहे थे.
टेट उर्त्तीण पारा शिक्षकों को सरकारी शिक्षक के पद पर समायोजित करने की भी मांग की गयी. प्रदर्शन का नेतृत्व मोर्चा के ऋषिकेश पाठक, बिनोद बिहारी महतो, बजरंग प्रसाद, मोहन मंडल कर रहे थे.
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए वक्ताअों ने कहा कि भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार पारा शिक्षकों के प्रति संवेदनहीन है. पारा शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. प्रमंडलवार चलनेवाले इस प्रदर्शन में 31 अक्तूबर को संताल परगना प्रमंडल, एक नवंबर को उतरी छोटानागपुर प्रमंडल व दो नवंबर को कोल्हान प्रमंडल के पारा शिक्षक शामिल होंगे.
पारा शिक्षकों का स्थायीकरण करते हुए यदि सरकार ने वेतनमान नहीं दिया, तो सभी 67000 पारा शिक्षक राज्य स्थापना दिवस 15 नवंबर को मोरहाबादी मैदान में जुटेंगे. 16 नवंबर से घेरा डालो-डेरा डालो कार्यक्रम शुरू होगा. इस अवसर पर प्रमोद कुमार, मो शकील, महताब आलम, बलराम महतो, सोनी, रामदयाल महतो, नेली, संजय कुमार पाठक, रोहित कुमार, सुखदेव, संतोषी पांडेय, हसन अंसारी, साधु उरांव, उमाशंकर लाल, धनीराम, बिंदेश्वर यादव सहित सैकड़ों शिक्षक उपस्थित थे.
रांची : जीवन से तनाव को दूर करने का सबसे बढ़िया उपाय मेडिटेशन होता है. हालांकि मेडिटेशन कोई नयी चीज नहीं है. हमारी भारतीय सभ्यता-संस्कृति में यह पहले से ही विद्यमान है. इसके बारे में कहा जाता है कि यह बिना दवा और खर्च के ही कई बीमारियों का इलाज करता है. अपने जीवन में मेडिटेशन का अनुभव करने के बाद डॉ अनुराधा पालटा ने एक किताब लिखी है. इसमें मेडिटेशन क्या है, इसके क्या फायदे हैं आदि का जिक्र है.
मेडिटेशन एंड क्वालिटी ऑफ लाइफ : ए क्लिनिकल इनसाइट फॉर बिगिनर्स के नाम से लिखी इस किताब में मेडिटेशन के काफी फायदे बताये गये हैं. डॉ अनुराधा पालटा ने कहा कि इस किताब के जरिये मैंने यह बताया है कि आप मेडिटेशन कहीं भी और किसी भी काम को करने के दौरान कर सकते हैं.
किताब लिखने की प्रेरणा के बारे में उन्होंने कहा कि इस मेडिटेशन को मैंने अपनी लाइफ में अनुभव किया है. लगातार मेडिटेशन करने से मुझे काफी फायदा हुआ. लेखनी की शुरुआत साल 2000 में की. गौरतलब है कि डॉ अनुराधा पालटा ने साइकोलॉजी से पीजी की पढ़ाई की है. इसके बाद रांची यूनिवर्सिटी से साल 2003-2009 में पीएचडी पूरी की. इन्होंने मेडिटेशन के सहजयोग ध्यान और विपस्सना ध्यान पर रिसर्च किया है. इसके बाद उन्होंने किताब लिखी. डॉ अनुराधा पालटा एडीजी अनिल पालटा की पत्नी हैं.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




