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रांची : सरकारी अस्पतालों व ड्रग स्टोर में नहीं हैं फार्मासिस्ट

Updated at : 22 Oct 2018 8:49 AM (IST)
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रांची : सरकारी अस्पतालों व ड्रग स्टोर में नहीं हैं फार्मासिस्ट

संजय रांची : दवा का भंडार व इसकी बिक्री सहित इसके संधारण का काम फार्मासिस्ट ही करता है. सरकार सभी निजी दवा दुकानों में यह सुनिश्चित करती है कि वहां फार्मासिस्ट जरूर हों, पर सरकार के अपने ही ड्रग स्टोर में कोई फार्मासिस्ट नहीं है. वहां भी नहीं जहां महंगे तथा संवेदनशील टीका (वैक्सिन) का […]

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संजय
रांची : दवा का भंडार व इसकी बिक्री सहित इसके संधारण का काम फार्मासिस्ट ही करता है. सरकार सभी निजी दवा दुकानों में यह सुनिश्चित करती है कि वहां फार्मासिस्ट जरूर हों, पर सरकार के अपने ही ड्रग स्टोर में कोई फार्मासिस्ट नहीं है. वहां भी नहीं जहां महंगे तथा संवेदनशील टीका (वैक्सिन) का रखरखाव किया जाता है. एनएचएम परिसर, नामकुम में बच्चों के लिए नौ तरह के वैक्सीन स्टोर किये जाते हैं.
इनमें बीसीजी, अोरल पोलियो वैक्सीन (अोपीवी), हेपेटाइटिस-बी, रोटा वायरस, पेंटावेलेंट, एफआइपीवी, मिजिल्स-रूबेला, डीपीटी व टीटी वैक्सीन शामिल हैं. गोदाम संख्या तीन में रखे ऐसे वैक्सीन की डोज संख्या लाखों में है, पर यहां कोई फार्मासिस्ट नहीं है.
सूत्रों के अनुसार दवा खरीद में हुई गड़बड़ी के बाद जब सीबीआइ ने वर्ष 2009 में दवा गोदामों में रेड किया था, उसी वक्त वहां फार्मासिस्ट नहीं होने का मुद्दा उठा था. पर करीब 10 वर्ष बाद भी स्थिति वही है. उधर, राज्य के किसी सरकारी अस्पताल सह मेडिकल कॉलेज में हॉस्पिटल फार्मेसी की सुविधा नहीं है. रिम्स में भी नहीं. दवाओं की पैकेजिंग, स्टोरिंग व इसके रख-रखाव सहित मरीजों की काउंसेलिंग का काम हॉस्पिटल फार्मेसी सर्विस के जरिये होता है. इसके बगैर मरीजों के स्वास्थ्य की जाने-अनजाने न सिर्फ अनदेखी हो रही है, बल्कि दवाओं का बेहतर भंडारण व रख-रखाव नहीं होने से इनके खराब होने की खबरें भी अक्सर आती रहती हैं.
जानकारों का कहना है कि जहां दवा हो, वहां फार्मासिस्ट जरूरी है. पर सरकार के अपने ही महकमे में यह कानून फेल है. उधर, स्वास्थ्य विभाग ने दवाअों सहित अन्य साजो-सामान की खरीद के लिए मेडिकल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रोक्योरमेंट एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड का गठन किया है.
राज्य भर के लिए जरूरी दवाअों की खरीद इसी कॉरपोरेशन (निगम) के जरिये होती है. पर इस निगम के पास ड्रग लाइसेंस नहीं है, जबकि इन मामलों की जांच करनेवाला निदेशक अौषधि (डायरेक्टर, ड्रग) का कार्यालय भी एनएचएम परिसर में ही है.
सरकारी अस्पतालों में फार्मासिस्ट रहने चाहिए. स्टोर के लिए फार्मासिस्ट रखने की बाध्यता संभवत: नहीं है. निगम के लिए ड्रग लाइसेंस लेने का मामला अभी प्रक्रियाधीन है.
ऋतु सहाय, निदेशक अौषधि
जहां दवाएं स्टोर की जाती हो, वहां भी फार्मासिस्ट जरूरी है. ड्रग रूल एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1947 के तहत जहां भी दवा है, वहां फार्मासिस्ट होना चाहिए.
डॉ आरएन गुप्ता, अध्यक्ष इंडियन फार्मास्युटिकल एसोसिएशन, झारखंड
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