रांची : डॉक्टर भले ही बाहर की दवाएं लिखें, लेकिन रिम्स की चयनित एजेंसी से ही मंगायी जायेगी

Updated at : 14 Oct 2018 8:44 AM (IST)
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रांची : डॉक्टर भले ही बाहर की दवाएं लिखें, लेकिन रिम्स की चयनित एजेंसी से ही मंगायी जायेगी

रिम्स के डॉक्टरों द्वारा खास दवा दुकान की दवाएं लिखने पर निदेशक सख्त रांची : आयुष्मान भारत योजना के तहत रिम्स में भर्ती मरीजों के लिए दवाएं भी रिम्स के कई डॉक्टर बाहर की दवाएं लिख रहे हैं. डॉक्टर वैसी दवाएं लिख रहे हैं, जो किसी खास दुकान पर ही मिलती है. ऐसे में रिम्स […]

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रिम्स के डॉक्टरों द्वारा खास दवा दुकान की दवाएं लिखने पर निदेशक सख्त
रांची : आयुष्मान भारत योजना के तहत रिम्स में भर्ती मरीजों के लिए दवाएं भी रिम्स के कई डॉक्टर बाहर की दवाएं लिख रहे हैं. डॉक्टर वैसी दवाएं लिख रहे हैं, जो किसी खास दुकान पर ही मिलती है. ऐसे में रिम्स प्रबंधन को दवा मुहैया कराने में परेशानी हो रही है. नियम है कि डॉक्टर जो दवाएं लिख रहे हैं, उसे तीन एजेंसी या सप्लायर से कोटेशन लेना है.
जिस कंपनी की सबसे कम कीमत होगी, उससे ही दवा लेनी है. आयुष्मान भारत के नोडल ऑफिसर डॉ संजय कुमार व मेडिकल ऑफिसर स्टोर डॉ रघुनाथ ने शनिवार को रिम्स निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव से मिल कर इस संबंध में जानकारी दी. इस पर निदेशक ने स्पष्ट निर्देश दिया कि डॉक्टर कोई भी दवा लिखें, लेकिन उसे रिम्स की चार चयनित एजेंसी से ही मंगाना है. डॉक्टरों की सेटिंग वाली दवा दुकान से नहीं लेना है. निदेशक ने यूनिट इंचार्ज को निर्देश दिया है कि वह एक-दो दिन के बजाय एक सप्ताह की दवाएं मंगायें.
यूनिट इंचार्ज नहीं कर रहे हस्ताक्षर : रिम्स में आयुष्मान भारत योजना के लाभुकों को यूनिट इंचार्ज हस्ताक्षर के लिए दौड़ा रहे हैं. फाॅर्म की प्रक्रिया पूरी करने के बाद नोडल ऑफिसर हस्ताक्षर कर दे रहे हैं, लेकिन यूनिट इंचार्ज हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं. इससे मरीज के परिजनों को परेशानी हो रही है. इस संबंध में मरीजों के परिजनों ने रिम्स निदेशक से शिकायत की. परिजनों के साथ उपाधीक्षक व आयुष्मान भारत के नोडल ऑफिसर भी मौजूद थे.
योजना को हर हाल में सफल बनाना है : निदेशक
नोडल आॅफिसर डॉ संजय कुमार व उनकी टीम को निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव ने कहा कि आयुष्मान भारत को सफल बनाना हमारे लिए चुनौती है, लेकिन इसे हर हाल में सफल बनाना है. शुरू में परेशानी होगी. डॉक्टरों को असहज लगेगा, लेकिन बाद में यह उनके दैनिक कार्य में शामिल हो जायेगा.
केस स्टडी : रिम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती 12 साल की तमन्ना खातून का गोल्डेन कार्ड बन गया है. लाभुक ने सभी प्रक्रिया पूरी कर ली है. नोडल ऑफिसर ने फॉर्म पर हस्ताक्षर कर दिया है, लेकिन यूनिट इंचार्ज हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं. शिकायत के बाद निदेशक ने परिजनों को इस संबंध में यूनिट इंचार्ज से बात करने का आश्वासन दिया.
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