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झाविमो अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी पर 10 करोड़ की मानहानि का मुकदमा

Updated at : 06 Oct 2018 1:46 AM (IST)
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झाविमो अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी पर 10 करोड़ की मानहानि का मुकदमा

रांची : भाजपा सांसद रवींद्र राय ने झाविमो अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी पर 10 करोड़ की मानहानि का मुकदमा न्यायालय में दर्ज कराया है. रांची में सब जज वन विजय कुमार श्रीवास्तव के न्यायालय में मानहानि का मुकदमा दायर किया गया है़ श्री राय ने शुक्रवार को पत्रकारों को इसकी जानकारी देते हुए […]

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रांची : भाजपा सांसद रवींद्र राय ने झाविमो अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी पर 10 करोड़ की मानहानि का मुकदमा न्यायालय में दर्ज कराया है. रांची में सब जज वन विजय कुमार श्रीवास्तव के न्यायालय में मानहानि का मुकदमा दायर किया गया है़ श्री राय ने शुक्रवार को पत्रकारों को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि तीन माह पहले बाबूलाल मरांडी ने पत्र के द्वारा विधायक खरीदने का अारोप लगाया था. इस बाबत उन्हें नोटिस भी भेजा गया. नोटिस का उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. इसके बाद उन्होंने मुकदमा दर्ज कराया है.
श्री राय ने कहा कि पत्र में मेरा हस्ताक्षर नहीं है. पुराने लेटर हेड में जाली हस्ताक्षर किया गया था. यह एक आपराधिक मामला है. उन्हाेंने कहा कि मरांडी ने शुरू से ही भाजपा को धोखा देने का काम किया है. 2009 में उन्होंने कहा था कि झाविमो सभी 81 विधानसभा सीटाें पर चुनाव लड़ेगी, लेकिन चुनाव के समय कांग्रेस के साथ समझौता कर लिया.
इससे जेवीएम के नेता और कार्यकर्ता ठगा सा महसूस करने लगे. बाबूलाल कांग्रेस की राजनीति व रणनीति का हिस्सा बन कर रह गये हैं. उन्हाेंने कहा कि बीजेपी को बदनाम करने की साजिश में वह कभी सफल नहीं हो पायेंगे. बीजेपी से अलग होकर उन्होंने जेएमएम का विकल्प होने का सपना राज्य की जनता को दिखाया, लेकिन अब झाविमो हेमंत सोरेन को ही अपना नेता मान रहा है. झाविमो अब लोकसभा की दो सीट गोड्डा व कोडरमा के लिए कांग्रेस व जेएमएम के सामने गिड़गिड़ा रहा है.
मरांडी ने राज्यपाल को सौंपा था पत्र
झाविमो अध्यक्ष ने छह जुलाई को राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से मिल कर रवींद्र राय का हस्ताक्षर युक्त एक पत्र सौंपते हुए आरोप लगाया था कि झाविमो से जीत कर आये छह विधायकों को भाजपा शामिल कराने के लिए विधायकों को दो-दो करोड़ रुपये दिये और पद का प्रलोभन दिया गया़ विधायकों को पैसे पहुंचाने के लिए भाजपा के अलग-अलग नेताओं की जिम्मेवारी तय की गयी थी़
इसमें सांसद महेश पोद्दार, मंत्री सीपी सिंह, विधायक अनंत ओझा, दीपक प्रकाश सहित कई भाजपा नेताओं का नाम लेते हुए आरोप लगाया था़ मरांडी ने राज्यपाल को जो पत्र सौंपा था,उसमें रवींद्र राय को किसान मोरचा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बताया गया था़ कथित पत्र 19 जनवरी 2015 की तिथि से लिखा गया था़
ये विधायक हुए थे शामिल : नवीन जायसवाल, रणधीर सिंह, अमर कुमार बाउरी, आलोक चौरसिया, गणेश गंझू और जानकी यादव
साढ़े तीन वर्ष से चल रहा है दलबदल का मामला
झाविमो अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी व विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने झाविमो छोड़ भाजपा में शामिल होने वाले विधायकों पर 10वीं अनुसूची के तहत दलबदल का मामला चलाने का आवेदन स्पीकर दिनेश उरांव को दिया था़ पिछले तीन वर्ष सात महीने से स्पीकर इस मामले को सुन रहे है़ं फिलहाल इस मामले में प्रतिवादी पक्ष की ओर से बहस की जा रही है़ मामले की सुनवाई अंतिम चरण में है़
केस-मुकदमा से डरने वाले नहीं : झाविमो
बाबूलाल मरांडी पर मुकदमा दर्ज किये जाने के मामले पर झाविमो विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि इस तरह का केस कर भाजपा अपनी गलती छिपाने का प्रयास कर रही है़ ऐसे केस-मुकदमा से झाविमो डरनेवाला नहीं है़ भाजपा इस पूरे मामले की सीबीआइ से जांच करा ले़ दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा़ श्री यादव ने कहा कि भाजपा नेताओं में थोड़ी भी शर्मिंदगी बची है, तो ऐसा काम नहीं करते़ पार्टी नेता बंधु तिर्की ने कहा कि भाजपा पैंतरा ना करे़ पूरे मामले की सीबीआइ से जांच करा ले़
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