रांची : आयोग की मानी गयी, तो छह अधिकारी होंगे बर्खास्त, रद्द विज्ञापन पर की गयी थी नियुक्ति
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 12 Sep 2018 6:47 AM
बिहार में हटाये गये सात लोगों को सहायक के पद पर किया गया था बहाल रांची : विधानसभा में छह उप सचिव और अवर सचिव स्तर के अधिकारी बर्खास्त हो सकते हैं. विधानसभा नियुक्ति-प्रोन्नति घोटाले की जांच करने वाली विक्रमादित्य आयोग की अनुशंसा मान ली गयी, तो इनको हटाया जाना तय है. आयोग ने इन […]
बिहार में हटाये गये सात लोगों को सहायक के पद पर किया गया था बहाल
रांची : विधानसभा में छह उप सचिव और अवर सचिव स्तर के अधिकारी बर्खास्त हो सकते हैं. विधानसभा नियुक्ति-प्रोन्नति घोटाले की जांच करने वाली विक्रमादित्य आयोग की अनुशंसा मान ली गयी, तो इनको हटाया जाना तय है. आयोग ने इन अधिकारियों की नियुक्ति को ही अवैध करार दिया है.
सभी अधिकारी बिहार विधानसभा में नियुक्त हुए थे. बाद में कोर्ट के आदेश के आलोक में बिहार विधानसभा ने इनकी नियुक्त को अवैध करार देते हुए पदमुक्त कर दिया था. बिहार में 54 लोगों की नियुक्ति को अवैध बताया गया था. इनमें से सात लोगों को झारखंड विधानसभा में रख लिया गया.
एक लिखित परीक्षा को आधार बनाते हुए राज्य के पहले स्पीकर इंदर सिंह नामधारी के कार्यकाल में अस्थायी तौर पर बहाल किया गया था. श्री नामधारी के कार्यकाल में ही इनको नियमित भी कर दिया गया. प्रोन्नति के बाद वर्तमान में ये सभी उप सचिव और अवर सचिव स्तर के अधिकारी बन गये हैं. बहाल किये गये लोगों में से एक रविशंकर पांडेय सेवानिवृत्त भी हो गये हैं.
इन पर है बर्खास्तगी का खतरा
गुरुचरण सिंकू-उप सचिव, अनुप कुमार लाल-उप सचिव, किरण सुमन बाखला-उप सचिव, शरद सहाय-अवर सचिव, नीता कुमारी-अवर सचिव, रीता बसावतिया-अवर सचिव, रविशंकर पांडेय-सेवानिवृत्त
क्या हुआ था खेल
बिहार विधानसभा से हटाये गये लोगों को बहाल करने के लिए विधायी जानकारी को आवश्यक करते हुए विधानसभा से विज्ञापन निकाला गया.
बिहार विधानसभा में बहाल किये गये 54 लोगों की नियुक्ति को न्यायालय ने अवैध करा दे दिया. इसके बाद ये लोग हटा दिये गये.
झारखंड में विधायी कार्य की जानकारी से संबंधित विज्ञापन को झारखंड हाइकोर्ट ने अमान्य कर दिया. एक अभ्यर्थी ने यह कहते हुए कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी कि विधायी विषय की कहीं पढ़ाई नहीं होती है. ऐसे में इस क्षेत्र में अनुभव संभव नहीं है.
इधर न्यायालय ने विज्ञापन रद्द करने का फैसला दिया, उधर पहले ही विधानसभा ने लिखित परीक्षा ले ली. उसी लिखित परीक्षा के आधार पर सात लोगों को बहाल कर लिया गया.
जांच आयोग ने क्या माना
सात लोगों को गलत तरीके से बहाल किया गया.
विधानसभा से बहाली के लिए कोई नया विज्ञापन नहीं निकला, तो फिर किस आधार पर नियुक्ति हुई.
अस्थायी तौर पर बहाल करने की प्रक्रिया भी सही नहीं थी.
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