झारखंड में पोषण की स्थिति अच्छी नहीं, विशेष ध्यान दें : राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू

Updated at : 07 Sep 2018 6:37 AM (IST)
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झारखंड में पोषण की स्थिति अच्छी नहीं, विशेष ध्यान दें : राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू

पोषण सखी एवं तेजस्विनी का लाभ जनजातीय समूहों को मिले रांची : राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि यह चिंताजनक बात है कि देश में पोषण के क्षेत्र में झारखंड राज्य की स्थिति अच्छी नहीं है. पांच वर्ष से कम आयु के लगभग 50 प्रतिशत बच्चे मानक वजन से कम (न्यूनतम वजन) के हैं. […]

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पोषण सखी एवं तेजस्विनी का लाभ जनजातीय समूहों को मिले
रांची : राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि यह चिंताजनक बात है कि देश में पोषण के क्षेत्र में झारखंड राज्य की स्थिति अच्छी नहीं है. पांच वर्ष से कम आयु के लगभग 50 प्रतिशत बच्चे मानक वजन से कम (न्यूनतम वजन) के हैं. वे कुपोषण और खून की कमी की गंभीर समस्या से ग्रस्त हैं.
राज्य में कुपोषण, एनीमिया एवं ट्रैफिकिंग बहुत ही गंभीर समस्या हो गयी है. इसका निदान सभी को सक्रियता से करना होगा. राज्य की अनुसूचित जनजातियों विशेष कर पीवीटीजी के लोग इन समस्याअों से अधिक ग्रसित हैं. इसलिए इस दिशा में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है.
राज्यपाल गुरुवार को राजभवन में झारखंड राज्य में पोषण की स्थिति की समीक्षा कर रही थीं. उन्होंने निर्देश दिया है कि प्रत्येक जिले के संबंधित अधिकारी जहां भी पीवीटीजी के लोग हैं, उसका सर्वेक्षण करायें अौर नियमित स्वास्थ्य जांच करायें. पोषण सखी एवं तेजस्विनी जैसी योजनाओं का लाभ पीवीटीजी को मिले, यह सुनिश्चित हो. उन्होंने राज्य में बाल विकास परियोजना अंतर्गत पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) आदि के रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति करने का निर्देश दिया.
इस अवसर पर राज्यपाल के प्रधान सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी, समाज कल्याण सचिव अमिताभ कौशल, पोषण मिशन के महानिदेशक डीके सक्सेना, एनएसएम के अभियान निदेशक केएन झा, विशेष सचिव दीपांकर पंडा, समाज कल्याण निदेशक, यूनिसेफ झारखंड प्रमुख मधुलिका जोनाथन सहित कई पदाधिकारी उपस्थित थे.
ग्रामीण क्षेत्रों में रहनेवाले परिवारों को अब गेहूं भी मिलेगा : बैठक में समाज कल्याण सचिव अमिताभ कौशल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जन-वितरण प्रणाली के तहत लाभुकों को चावल प्रदान किया जा रहा है. साथ ही शहरी क्षेत्रों में चावल के साथ गेहूं भी दिया जा रहा है. उन्होंने राज्यपाल को जानकारी दी कि जन-वितरण प्रणाली के तहत दाल भी दिये जाने का प्रस्ताव है. ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग गेहूं की भी मांग कर रहे हैं.
इसे देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लाभुक परिवारों को भी अब गेहूं दिया जायेगा. उन्होंने यह भी कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों द्वारा सप्ताह में तीन दिन अंडा बच्चों को देना आरंभ कर दिया गया है. मध्याह्न भोजन के तहत अंडा पूर्व से ही दिया जाता था. राज्यपाल को यह भी बताया गया कि पोषण मिशन के द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविका-सहायिका का प्रशिक्षण राज्य के छह जिलों में आयोजित किया जा रहा है.
अनुसूचित जनजाति बाहुल्य 14 जिलों में इसे शीघ्र ही आरंभ किया जायेगा. राज्यपाल को यह भी जानकारी दी गयी कि समेकित बाल विकास योजना में 340 पर्यवेक्षक के पद रिक्त हैं, इन पदों पर नियुक्ति के लिए झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग को अधियाचना भेज दी गयी है. इस अवसर पर यूनिसेफ की मधुलिका ने कहा कि कुपोषण की समस्या राज्य में अनुसूचित जनजाति में 15 प्रतिशत अधिक है एवं अनुसूचित जाति में 10 प्रतिशत अधिक है.
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