रांची : बाजार समिति में ई-ट्रेडिंग का चल रहा है फर्जीवाड़ा

Updated at : 31 Aug 2018 6:59 AM (IST)
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रांची : बाजार समिति में ई-ट्रेडिंग का चल रहा है फर्जीवाड़ा

किसान पहुंचते नहीं, हो रही है खरीद-बिक्री, एक से 25 अगस्त तक राज्य भर की बाजार समितियों ने दिखायी है 47 लाख की ई-ट्रेडिंग रांची : बाजार समितियों में ई-ट्रेडिंग के नाम पर जम कर फर्जीवाड़ा हो रहा है़ इसका प्रमाण है कि बाजार समितियों के माध्यम से 99 उत्पादों की ई-ट्रेडिंग करनी है़ इसके […]

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किसान पहुंचते नहीं, हो रही है खरीद-बिक्री, एक से 25 अगस्त तक राज्य भर की बाजार समितियों ने दिखायी है 47 लाख की ई-ट्रेडिंग
रांची : बाजार समितियों में ई-ट्रेडिंग के नाम पर जम कर फर्जीवाड़ा हो रहा है़ इसका प्रमाण है कि बाजार समितियों के माध्यम से 99 उत्पादों की ई-ट्रेडिंग करनी है़ इसके लिए राज्य भर के बाजार समितियों को ई-ट्रेडिंग के नाम पर टारगेट दिया जा रहा है़ लेकिन किसानों और व्यापारियों को इसकी जानकारी ही नहीं है़
दूसरी तरफ किसान अपने उत्पादों को लेकर मंडी नहीं पहुंच रहे है़ं वे अभी भी परंपरागत तरीके से ही अपने उत्पादों को लेकर बाजार में आ रहे है़ं व्यापारी उनसे राज्य के छोटे-छोटे मंडी में उत्पाद खरीद ले रहे है़ं लेकिन बाजार समिति कुछ व्यापारियों से सांठगांठ कर उनके नाम से ई-ट्रेडिंग दिखा रही है़
कई समितियों में एक-दो व्यापारी को ही हर महीने ई-ट्रेडिंग में शामिल किया जा रहा है़ विभागीय आंकड़े के अनुसार एक अगस्त से 25 अगस्त तक राज्य की 22 बाजार समितियों से 47 लाख की ई-ट्रेडिंग हुई है़ सबसे अधिक बोकारो में तीन लाख रुपये का 169़ 75 क्विंटल उत्पाद ई-ट्रेडिंग के माध्यम से खरीदा गया है़ रांची के पंडरा से 1़ 15 लाख रुपये में 68 क्विंटल उत्पादों की ई-ट्रेडिंग हुई. सरकारी आंकड़े के अनुसार लगभग 9़5 लाख रुपये का डिजिटल भुगतान किया गया है़
बाजार समितियों को दिया गया है टारगेट, किसान और व्यापारियों में ई-ट्रेडिंग को लेकर जानकारी नहीं
चाईबासा, गुमला, पाकुड़ और सिमडेगा में नहीं हुई ई-ट्रेडिंग : दूसरी तरफ चाईबासा, गुमला, पाकुड़ और सिमडेगा में एक रुपये की ई-ट्रेडिंग नहीं हुई है़ इन बाजार समितियों में किसानों और व्यापारियों ने एक छटाक उत्पादों की खरीद-बिक्री इसके माध्यम से नहीं की है़
बाजार समितियों के सचिवों को टारगेट पूरा करने की चिंता : मिली जानकारी के अनुसार बाजार समिति के सचिवों को विभागीय स्तर पर बार-बार टारगेट पूरा करने का दबाव बनाया जाता है़
लिहाजा कई बाजार समितियों के सचिवों ने हाथ खड़े कर दिये है़ं वहीं फर्जी किसान और व्यापारियों ने भी इंकार कर दिया है़ नतीजतन ऐसे कुछ सचिवों पर विभाग ने कार्रवाई भी की है़ ऐसे में कई समितियों ने कार्रवाई के डर से जुगाड़ का फॉर्मूला अपनाया है़
लंबी है प्रक्रिया, किसान नहीं पड़ना चाहते हैं इस चक्कर में
किसान बाजार समिति में अपने उत्पादों को लेकर आयेगा़ गेट इंट्री होगी़ मंडी के अंदर उत्पादों का लॉट तैयार होगा़ 50किलो, 25 किलो का लॉट बनेगा़
इनके सैंपल की जांच होगी़ गुणवत्ता युक्त सैंपल को कंप्यूटर में अपलोड किया जायेगा़ सारी प्रक्रिया नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट, एनएम की वेबसाइट के माध्यम से होगी़ देश भर से कोई भी व्यापारी या राज्य के व्यापारी तय सीमा में इन उत्पादों का बीड या बोली लगायेंगे़
सौदा तय होने पर एसएमएस के माध्यम से या किसी दूसरे माध्यम से किसानों की सहमति ली जायेगी, वह तैयार हो तो बिक्री होगी़ सौदा तय होने पर व्यापारियों से बाजार समिति के नाम पेमेंट लिया जायेगा और फिर उसे किसानों के खाते में सीधे भेजा जायेगा़
इन उत्पादों की होनी है ई ट्रेडिंग
पहले चरण में सरकार ने 66 उत्पादों काे ई-ट्रेडिंग के लिए अधिसूचित किया़ बाद में इसकी संख्या 99 कर दी गयी़ इसमें धान, बासमती चावल, गेहूं, चना, अरहर, मूंग, बाजरा, ज्वार, महुआ का फूल, सरसों, मसूर, अरंडी का बीज, कॉटन, मूंगफली, मक्का, लाल मिर्च, मटर, तिल, सब्जी और फल के कई उत्पाद शामिल है़ं
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