रांची : कुपोषण उपचार केंद्र में नहीं रहते नर्स व डॉक्टर
Updated at : 30 Aug 2018 9:31 AM (IST)
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मंत्री ने कहा : कुपोषण विरासत में मिला है, वैसे भी यह समस्या सिर्फ झारखंड की नहीं, देशव्यापी है रांची : मौजूदा सरकार को राज्य का कुपोषण विरासत में मिला है. वैसे भी यह समस्या सिर्फ झारखंड की नहीं, देशव्यापी है. कुपोषण गंभीर मामला है तथा इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए. मैं कई कुपोषण […]
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मंत्री ने कहा : कुपोषण विरासत में मिला है, वैसे भी यह समस्या सिर्फ झारखंड की नहीं, देशव्यापी है
रांची : मौजूदा सरकार को राज्य का कुपोषण विरासत में मिला है. वैसे भी यह समस्या सिर्फ झारखंड की नहीं, देशव्यापी है. कुपोषण गंभीर मामला है तथा इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए. मैं कई कुपोषण उपचार केंद्र (एमटीसी) में गयी हूं, पर वहां नर्स व डॉक्टर नहीं रहते. ऐसे में कुपोषित बच्चों का उपचार कैसे होगा.
हमारा (समाज कल्याण विभाग) काम कुपोषित बच्चों को एमटीसी तक पहुंचाना है. इसके बाद का काम स्वास्थ्य विभाग का है. कल्याण सह समाज कल्याण मंत्री डॉ लुईस मरांडी ने यह बातें कही. वह बुधवार को प्रोजेक्ट भवन सभागार में पोषण माह (सितंबर) संबंधी कार्यशाला में बोल रही थीं. इस माह के दौरान पोषण व कुपोषण दूर करने संबंधी प्रचार, प्रसार व जागरूकता का काम होना है.
संताल के पहाड़िया जनजाति के इलाके में विशेष अभियान चलायें : मंत्री ने कहा कि एनिमिया व कुपोषण का आपसी संबंध है. हमें मां को ही मजबूत करना होगा, ताकि उसका बच्चा भी स्वस्थ हो. किशोरियों के लिए भी समाज कल्याण तेजस्विनी योजना चला रहा है. इसका भी सकारात्मक प्रभाव पड़ना चाहिए.
मंत्री ने कार्यशाला में उपस्थित सीडीपीअो व सुपरवाइजर से कहा कि वे एक से 30 सितंबर तक चलने वाले पोषण माह के दौरान हर रोज कुछ न कुछ आंगनबाड़ी का दौरा करें. खास कर संताल के पहाड़िया जनजाति के इलाके में यह अभियान सघनता से चलाने की बात श्रीमती मरांडी ने कही. उन्होंने विभागीय सचिव अमिताभ कौशल से भी कहा कि वह अपने स्तर से विभिन्न जिलों के उपायुक्तों से भी अभियान में सक्रिय योगदान करने को कहें.
महिलाओं को बॉडी मास इंडेक्स के बारे में बतायें
पोषण मिशन के महानिदेशक डीके सक्सेना ने कहा कि महिलाअों को बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआइ) के बारे में बताया जाना चाहिए.ज्यादा कठिन भाषा में वे यह बात नहीं समझेंगी. उन्हें सीधे बताया जाये कि यदि आपकी ऊंचाई पांच फुट है, तो आपका वजन कम से कम 43 किलो होना चाहिए. समाज कल्याण निदेशक मनोज कुमार ने कहा कि हमें वर्ष 2022 तक कुपोषण के कारण नाटे या बौने बच्चों का प्रतिशत वर्तमान के 38.4 फीसदी से घटा कर 25 फीसदी तक लाना है. इससे पहले मंत्री ने सबको कुपोषण मुक्त झारखंड के लिए शपथ दिलायी.
कार्यशाला में एनएचएम के अभियान निदेशक कृपाशंकर झा, केंद्रीय बाल व महिला विकास मंत्रालय के अवर सचिव सुधीर सिन्हा तथा समाज कल्याण निदेशालय व यूनिसेफ प्रतिनधियों ने भी तकनीकी मुद्दों पर अपना प्रजेंटेशन दिया. मौके पर जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, समेकित बाल विकास कार्यक्रम की सीडीपीअो व सुपरवाइजर सहित अन्य उपस्थित थे.
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