एसीबी में दर्ज रिश्वत मांगने व आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले हो जा रहे फेल

Updated at : 27 Aug 2018 7:27 AM (IST)
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एसीबी में दर्ज रिश्वत मांगने व आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले हो जा रहे फेल

साक्ष्य मिलने पर पहले केस दर्ज किया जाता है, बाद में क्लीन चिट दे दी जाती है रांची : भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में दर्ज रिश्वत मांगने से संबंधित मामले और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने से संबंधित मामले फाइनल जांच में फेल हो जा रहे हैं. केस के अनुसंधान के बाद आरोप साबित […]

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साक्ष्य मिलने पर पहले केस दर्ज किया जाता है, बाद में क्लीन चिट दे दी जाती है
रांची : भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में दर्ज रिश्वत मांगने से संबंधित मामले और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने से संबंधित मामले फाइनल जांच में फेल हो जा रहे हैं.
केस के अनुसंधान के बाद आरोप साबित होने पर पहले केस दर्ज कर लिया जाता है, लेकिन बाद में आरोप साबित नहीं कर पाने पर आरोपियों को क्लीनचिट देते हुए उनके खिलाफ न्यायालय में फाइल रिपोर्ट समर्पित किया जा रहा है.
ज्ञात हो कि रिश्वत मांगने से संबंधित मामले की शिकायत मिलने के बाद एसीबी के अधिकारी पहले मामले का सत्यापन करते हैं. जांच में आरोप सही पाये जाने पर संबंधित आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेजते हैं. अगर आरोपी गिरफ्तार नहीं हो पाता है, तब उसके खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित किया जाता है.
इधर, चतरा जिला के हंटरगंज प्रखंड के अमीन जियाउल हक के मामले में एसीबी ने रिश्वत मांगने के आरोप में पहले केस दर्ज कर लिया, लेकिन बाद में आरोप साबित नहीं करने पर उसे क्लीनचिट दे दिया. इस कारण अब एसीबी की जांच पर सवाल उठने लगे हैं. दुमका के तत्कालीन जिला खनन पदाधिकारी सुरेश के मामले में भी एसीबी के अधिकारियों ने ऐसा ही किया था.
केस – 1
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) हजारीबाग थाना में हंटरगंज प्रखंड के अमीन जियाउल हक के खिलाफ चार हजार रिश्वत मांगने के आरोप में 20 जनवरी 2018 को केस दर्ज हुआ था, लेकिन केस के अनुसंधान के दौरान आरोपी के खिलाफ रिश्वत मांगने का आरोप साबित नहीं हुआ. इसके बाद एसीबी ने ट्रैप को असफल घोषित करते हुए न्यायालय में 20 जून को मामले में आरोपी के खिलाफ साक्ष्य की कमी दिखाते हुए फाइनल रिपोर्ट समर्पित किया.
30 मार्च 2016 को दुमका के तत्कालीन सहायक जिला खान पदाधिकारी सुरेश शर्मा के खिलाफ पद का गलत उपयोग कर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का केस दर्ज हुआ था. उनके खिलाफ वर्ष 2015 में एसीबी को एक शिकायत मिली थी. जांच में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप सही पाये जाने पर केस दर्ज हुआ था, लेकिन 31 मई 2018 को एसीबी ने न्यायालय में तथ्य की भूल बताते हुए शर्मा को क्लीनचिट देते हुए फाइल रिपोर्ट सौंप दिया.
केस – 3
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने हजारीबाग थाना में पांच अगस्त 2017 को प्रभारी प्रधानाचार्य युगल ठाकुर के खिलाफ केस दर्ज किया था. केस न्यायालय के निर्देश पर दर्ज हुआ था. आरोपी पर जालसाजी के तहत मैट्रिक परीक्षा का फाॅर्म भरने हेतु निर्धारित शुल्क से अधिक रुपये लेने का आरोप था, लेकिन एसीबी की अंतिम जांच में यह आरोप सही नहीं पाया गया. मामले में साक्ष्य की कमी दिखाते हुए फाइनल रिपोर्ट 28 जून को न्यायालय में समर्पित की गयी.
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