बरकाकाना : बच्चों के जाने के गम में टूट गये हैं परिजन, रो-रोकर हुआ बुरा हाल
Updated at : 21 Aug 2018 9:12 AM (IST)
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बरकाकाना : बासल थाना अंतर्गत बलकुदरा फ्लाइओवर पर रविवार को कार दुर्घटना में चार छात्र व एक छात्रा की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है. लोग बच्चों की मौत पर अफसोस जता रहे हैं. वहीं, शोकाकुल परिवार से मिलने वालों का तांता लगा हुआ है. इधर, केंद्रीय विद्यालय बरकाकाना, भुरकुंडा और […]
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बरकाकाना : बासल थाना अंतर्गत बलकुदरा फ्लाइओवर पर रविवार को कार दुर्घटना में चार छात्र व एक छात्रा की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है. लोग बच्चों की मौत पर अफसोस जता रहे हैं. वहीं, शोकाकुल परिवार से मिलने वालों का तांता लगा हुआ है.
इधर, केंद्रीय विद्यालय बरकाकाना, भुरकुंडा और आर्य बाल उच्च विद्यालय नयानगर, बरकाकाना में शोक सभा की गयी. इसके बाद स्कूल में अवकाश घोषित कर दिया गया. सहपाठी के आकस्मिक निधन से सभी बच्चे स्तब्ध थे. केंद्रीय विद्यालय बरकाकाना, भुरकुंडा और आर्य बाल उच्च विद्यालय के प्राचार्य ने शिक्षकों के साथ घर जाकर शोकाकुल परिवार से मुलाकात कर सांत्वना दी.
सभी शवों का हुआ अंतिम संस्कार : की घटना में मृत पांचों बच्चों का अंतिम संस्कार कर दिया गया है. ऊपर पोचरा निवासी अनीश कुमार सिंह का अंतिम संस्कार रविवार रात दमोदर नद तट पर किया गया. सोमवार को राहुल कुमार का अंतिम संस्कार भुरकुंडा में, सलोनी राज का अंतिम संस्कार रामगढ़ दमोदर नद तट पर किया गया. सोमवार शाम लगभग साढ़े पांच बजे छात्र विशेक मिर्धा का शव रांची से पोस्टमॉर्टम के बाद उसकी नानी के सीसीएल आवास पर लाया गया. यहां शव को देखते ही नानी रतनी देवी, मां सुनीता देवी, बहन पम्मी व गौरी के चीत्कार से पूरा आवासीय परिसर गमगीन हो गया.
कोस रहे हैं उस घड़ी को : घटना के बाद मृत छात्रा सलोनी, छात्र विशेक मिर्धा, राहुल कुमार, अनीश कुमार सिंह, हर्ष वर्मा के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.
सलोनी के पिता वेदव्यास राम ने बताया कि वे हमेशा अपनी बेटी को अपने साथ उसकी जरूरत के स्थान पर छोड़ कर आते थे. फिर बाद में जाकर वापस घर ले कर आते थे. रविवार को बेटी ने प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने के लिए पड़ोस की सहेली के घर जाने की बात कही थी. तब उन्होंने अपने घर के गेट तक अपनी बेटी को छोड़ा. उसके दो घंटे बाद उन्हें बेटी की दुर्घटना में मौत होने की खबर मिली. छात्रा के पिता उस समय को कोस रहे हैं, जब वे अपनी बेटी को स्वयं छोड़ने नहीं गये. विशेक मिर्धा की नानी रतनी देवी का भी रो-रोकर बुरा हाल है.
वह वाहन खरीदने के समय को कोस रही है कि सुविधा की खातिर खरीदा गया उनका वाहन उनके नाती की मौत का कारण बना. छात्र राहुल के पिता शंकर भुइयां ने बताया कि वे अक्सर बीमार रहते हैं. राहुल ही उन्हें अस्पताल लाने-ले जाने व घर के अन्य कामों में सबकी मदद करता था. उसकी मौत के बाद पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है. अनीश कुमार सिंह अपने दादा का सबसे चहेता था. रेलवे की नौकरी से सेवानिवृत्त दादा का भी रो-रोकर बुरा हाल है. वहीं, उसकी मां अपने बेटे के जाने के गम में बेसुध हैं.
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