रांची : अब एससी-एसटी छात्रों को समान छात्रवृत्ति
Updated at : 12 Aug 2018 9:06 AM (IST)
विज्ञापन

रांची : राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग को 70 वर्षों से अधिकार नहीं मिला था. नरेंद्र मोदी की इच्छाशक्ति से यह बिल आया. इसे मार्च में लोकसभा में पास कर दिया गया था. परंतु राज्यसभा में इसे रोक दिया गया था. अब राज्यसभा और लोकसभा दोनों में इसे सर्वसम्मति से पास कर दिया गया है. इस बिल […]
विज्ञापन
रांची : राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग को 70 वर्षों से अधिकार नहीं मिला था. नरेंद्र मोदी की इच्छाशक्ति से यह बिल आया. इसे मार्च में लोकसभा में पास कर दिया गया था. परंतु राज्यसभा में इसे रोक दिया गया था. अब राज्यसभा और लोकसभा दोनों में इसे सर्वसम्मति से पास कर दिया गया है. इस बिल के माध्यम से एससी-एसटी के समान छात्रवृत्ति मिलेगी.
ओबीसी के वैसे छात्र जो विदेश जाकर पढ़ाई करना चाहेंगे, उन्हें सरकार से एससी-एसटी के छात्रों की तर्ज पर छात्रवृत्ति मिलेगी. वैसे छात्रों को भी लाभ मिलेगा, जो शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक दृष्टिकोण से पिछड़े हैं. 130 पिछड़ी जातियां ओबीसी केटेगरी में लिस्टेड हैं, जिन्हें लाभ मिलेगा. ये बातें रामटहल चौधरी ने कही, वह शनिवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से बातचीतकर रहे थे.
झारखंड में नहीं बंद होना चाहिए स्कूल
श्री चौधरी ने कहा कि झारखंड में स्कूल नहीं बंद होना चाहिए. झारखंड पहाड़ी क्षेत्र है. यहां पर 10-20 घरों के टोलों का गांव है. वैसी परिस्थिति में अगर छोटी-छोटी जगहों पर स्कूल नहीं होंगे, तो बच्चे नहीं पढ़ पायेंगे.
इसकी चिंता सरकार को नहीं है. जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री व मुरली मनोहर जोशी शिक्षा मंत्री थे, तब छोटी-छोटी जगहों पर स्कूल खोला गया था. उन्होंने कहा कि स्कूल में टीचर नहीं है, तो बच्चों को स्कूल कौन भेजेगा. व्यवस्था ठीक कीजिए, शिक्षा दीजिए. जब बच्चे नहीं आये तब स्कूल बंद करना चाहिए. स्कूल बंद करने से पहले छह माह से एक साल तक का मौका देना चाहिए. दूसरे राज्यों में बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ने जाते हैं.
किसी को शौक नहीं है कि वह अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेजे. अगर सरकारी स्कूलों की व्यवस्था ठीक रहेगी तो इसमें बच्चे पढ़ने जायेंगे. मौके पर भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष आदित्य साहू, प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव, मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक मौजूद थे.
एसटी-एससी को वेतन मिला, तो दारू पीकर उड़ा दिये
सांसद रामटहल चौधरी ने अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के पिछड़ने के संबंध में कहा कि जब एचइसी बना, तब एससी व एसटी कर्मचारियों को पेमेंट मिलता था, तो ये लोग दारू पीकर पैसा उड़ा देते थे. उन दिनों ये लोग रेडियो खरीदते थे और उसे पटक कर तोड़ भी देते थे. वहीं जागरूक समाज के लोगों ने 10 से 20 रुपया बनाया.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




