रांची : सीसीएल के 300 करोड़ रुपये बकाया टीवीएनएल को 150 करोड़ का नुकसान

Updated at : 02 Aug 2018 6:25 AM (IST)
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रांची : सीसीएल के 300 करोड़ रुपये बकाया टीवीएनएल को 150 करोड़ का नुकसान

कोयला की कम आपूर्ति की वजह से 15 अप्रैल से ही बंद है टीटीपीएस की यूनिट नंबर-2 टीवीएनएल को रोजाना साढ़े सात हजार मिलियन टन कोयले की जरूरत सुनील चौधरी रांची : कोयले के अभाव में तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन (टीटीपीएस) की यूनिट नंबर-2 पिछले 15 अप्रैल से ही बंद है. केवल यूनिट नंबर-1 से […]

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कोयला की कम आपूर्ति की वजह से 15 अप्रैल से ही बंद है टीटीपीएस की यूनिट नंबर-2
टीवीएनएल को रोजाना साढ़े सात हजार मिलियन टन कोयले की जरूरत
सुनील चौधरी
रांची : कोयले के अभाव में तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन (टीटीपीएस) की यूनिट नंबर-2 पिछले 15 अप्रैल से ही बंद है. केवल यूनिट नंबर-1 से ही उत्पादन हो रहा था. वह भी 31 जुलाई से बंद हो गयी है. सीसीएल द्वारा टीवीएनएल पर कोयला मद में 300 करोड़ रुपये बकाये का दावा किया जाता है.
जबकि, दूसरी ओर टीवीएनएल की एक यूनिट तीन महीने से भी अधिक समय तक बंद है. इसकी वजह से टीवीएनएल को लगभग 150 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है. यानी जितना बकाया है, उसकी आधी राशि का नुकसान टीवीएनएल को हो चुका है.
टीवीएनएल के सूत्रों ने कहा कि यदि समय पर कोयला मिलता और जेबीवीएनएल द्वारा समय पर बिल का भुगतान किया जाये, तो सीसीएल का बकाया कब का खत्म हो जाता. गौरतलब है कि टीवीएनएल के ललपनिया स्थित तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन(टीटीपीएस) में दो यूनिट हैं. दोनों यूनिट से 360 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है और सारी बिजली झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड(जेबीवीएनएल) को बेची जाती है.
यूनिट नंबर-1 भी 31 जुलाई को बंद, कोयले का एक रैक पहुंचा, पर शुरू नहीं हुआ उत्पादन
क्या है मामला
टीवीएनएल में प्रतिदिन साढ़े सात हजार मिलियन टन कोयले की जरूरत पड़ती है. पर अप्रैल माह से सीसीएल द्वारा केवल दो हजार से ढाई हजार मिलियन टन कोयले की ही आपूर्ति की जाती है. टीटीपीएस के जीएम सनातन सिंह का कहना है कि कोयला कम मिलने की वजह से एक ही यूनिट को चलाना पड़ रहा था. अब दूसरी यूनिट भी 31 जुलाई से बंद है. प्रबंधन की बातचीत चल रही है.
टीटीपीएस की क्षमता 420 मेगावाट
टीवीएनएल की ललपनिया स्थित टीटीपीएस में दो यूनिट है, जिसकी क्षमता 420 मेगावाट है. वर्तमान में दोनों यूनिट से 360 मेगावाट के करीब उत्पादन होता है.
अभी यूनिट नंबर एक 15 अप्रैल से बंद है. इस कारण एक यूनिट चल रही है. इससे 160 से 170 मेगावाट उत्पादन हो रहा है. टीवीएनएल झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड को हर महीने लगभग 70 से 80 करोड़ रुपये की बिजली बेचता है. पर निगम द्वारा महीने में केवल 45 करोड़ रुपये ही दिया जाता है.
जबकि, टीवीएनएल महीने में 50 करोड़ का कोयला ही खरीदता है. स्थापना व्यय आदि मिलाकर टीवीएनएल के महीने का खर्च 60 करोड़ के करीब है. बिजली वितरण निगम द्वारा केवल 45 करोड़ रुपये ही दिये जाने की वजह से टीवीएनएल सीसीएल को पूरी राशि का भुगतान नहीं कर पाता. ऐसे में बकाया बढ़ता गया और अब 300 करोड़ रुपये के करीब हो गया है.
इस कारण सीसीएल ने कोयले की आपूर्ति कम कर दी है. इसके चलते एक यूनिट बंद कर थी. 31 जुलाई से रेलवे का हवाला देकर कोयले की आपूर्ति न होने की वजह से दूसरी यूनिट भी बंद कर दी गयी है. हालांकि, जेबीवीएनएल के पास 170 मेगावाट बिजली की कमी हो गयी है. इस कमी को सेंट्रल पूल से खरीद कर पूरा किया जा रहा है.
टीवीएनएल को हर दिन मिल रहा है एक रैक कोयला
टीवीएनएल को हर दिन दो रैक कोयला दिया जा रहा है. सीसीएल प्रबंधन का कहना है कि 300 करोड़ रुपये बकाया होने के बावजूद नियमित कोयला दिया जा रहा है. राज्य की बिजली उत्पादन इकाई होने के कारण कंपनी हर संभव सहयोग कर रही है. हालांकि, टीवीएनएल प्रबंधन का कहना है कि एक रैक में 3500 टन कोयला होता है, इससे एक ही यूनिट चल सकती है. दोनों यूनिट के लिए हर दिन कम से कम सात हजार टन कोयला की जरूरत है.
क्या कहते हैं एमडी
बकाये को लेकर उच्चस्तरीय बैठक हो रही है. जल्द ही समाधान निकल जायेगा. एक अगस्त को एक रैक कोयला मिल गया है. अगले दिन से बिजली उत्पादन आरंभ हो जायेगा.
कुलदीप चौधरी, एमडी, टीवीएनएल
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