जनहित पर सत्ता पक्ष-विपक्ष को संवेदनशील होना चाहिए मेरा मन दु:खी है : स्पीकर
Updated at : 22 Jul 2018 1:36 AM (IST)
विज्ञापन

रांची : मॉनसून सत्र के समापन पर स्पीकर दिनेश उरांव ने अपनी पीड़ा सदस्यों के सामने रखी़ सदन की कार्यवाही नहीं चलने से स्पीकर व्यथित थे़ उन्होंने कहा : पांच कार्य दिवस में विभिन्न कारणों से व्यवधान की घटनाएं हुई़ जिन्हें दूर करने का प्रयास आसन की ओर से भी किया़ इस क्रम में दो […]
विज्ञापन
रांची : मॉनसून सत्र के समापन पर स्पीकर दिनेश उरांव ने अपनी पीड़ा सदस्यों के सामने रखी़ सदन की कार्यवाही नहीं चलने से स्पीकर व्यथित थे़ उन्होंने कहा : पांच कार्य दिवस में विभिन्न कारणों से व्यवधान की घटनाएं हुई़ जिन्हें दूर करने का प्रयास आसन की ओर से भी किया़ इस क्रम में दो बार कार्यमंत्रणा की बैठक हुई़ इसमें मुझे अपेक्षित कामयाबी नहीं मिली़ यह मेरे लिए दु:खद है़ स्पीकर ने कहा कि बैठक का संचालन यदि व्यवस्थापूर्ण होती, तो जनता के सवाल सभा में आते और समाधान के उपाय ढूंढ़े जाते़ पूरे सत्र के दौरान प्रारंभिक समय जनता का होता है़.
इस सत्र में एक भी प्रश्न सभा में नहीं लिया जा सका़ शून्य काल में कोई भी सूचना नहीं ली गयी़ ध्यानाकर्षण पर भी कोई चर्चा नहीं हुई़ सभा सचिवालय से लेकर राज्य सरकार के सचिवालय और क्षेत्रीय कार्यालय तक प्रश्नोत्तर और प्रस्तावों का उत्तर तैयार करने लिए जो कार्यबल लगा, वह निष्फल हुआ़ यह संसदीय लोकतंत्र के लिए अच्छी बात नहीं है़.
जनहित के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्यों को समान रूप से संवेदनशील होना चाहिए़ इस सत्र में मैंने संवेदनशीलता का अभाव देखा़ स्पीकर ने कहा कि मैं बहुत दु:खी मन से इन सारे तथ्यों का आज उल्लेख कर रहा हू़ं मेरी इस पीड़ा को सामूहिक पीड़ा के रूप में सभी सदस्य ग्रहण करे़ं स्पीकर ने अपने समापन भाषण में राजनेता-लोकसेवक श्यामूचरण तुबिद और गीतकार गोपाल दास नीरज को याद किया़.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




