रिम्स में हड़ताल करनेवाली नर्सों की नेताओं को शो-कॉज प्रबंधन ने पूछा : क्यों नहीं आप पर विभागीय कार्रवाई हो
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 Jul 2018 8:08 AM
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अराजक हो गयी थी स्थिति. दो और तीन जून को जूनियर नर्सेस संघ के बैनर तले नर्सों ने की थी हड़ताल रांची : रिम्स प्रबंधन ने जूनियर नर्सेस संघ की अध्यक्ष रामरेखा और सचिव आइवीरानी खलखो से करीब 15 बिंदुओं पर जवाब मांगा है. शो-कॉज में उनसे पूछा गया है कि बिना सूचना के आपने […]
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अराजक हो गयी थी स्थिति. दो और तीन जून को जूनियर नर्सेस संघ के बैनर तले नर्सों ने की थी हड़ताल
रांची : रिम्स प्रबंधन ने जूनियर नर्सेस संघ की अध्यक्ष रामरेखा और सचिव आइवीरानी खलखो से करीब 15 बिंदुओं पर जवाब मांगा है. शो-कॉज में उनसे पूछा गया है कि बिना सूचना के आपने अचानक हड़ताल कर दी. इससे रिम्स प्रबंधन को पर्याप्त तैयारी करने का मौका तक नहीं मिल पाया. आपको हड़ताल के पहले रिम्स प्रबंधन से पूरी घटना की जानकारी देनी चाहिए थी, जो नहीं किया गया. इससे रिम्स में अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो गयी.
रिम्स प्रबंधन ने नर्सों की दोनों नेताओं से कहा है कि अापने अनुशासनहीनता का परिचय दिया है. आपने सीनियर व प्रशिक्षु परिचारिका को बल पूर्वक हड़ताल में शामिल कराया. वार्ड में जा-जाकर मरीजों की सेवा में लगे नर्सों को भय का शिकार बनाया और उन्हें ड्यूटी से हटने पर विवश किया. दो और तीन जून को पूरे रिम्स परिसर में अफरातफरी व अराजकता का माहौल बनने की जिम्मेदारी आपकी है. चिकित्सा सेवा को बहाल करने के माननीय मंत्री, मुख्य सचिव व प्रधान सचिव व रिम्स प्रबंधन द्वारा आग्रह किया गया, लेकिन अापने चिकित्सा सेवा बहाल करने में सहयोग नहीं किया. अराजकतापूर्ण माहौल पर नियंत्रण स्थापित करने व चिकित्सा सेवा बहाल करने के लिए न्यायपालिका भी हस्तक्षेप करना पड़ा था.
इमरजेंसी में प्रवेश नहीं करने दिया गया : शो-कॉज में प्रबंधन ने कहा है कि इमरजेंसी में अानेवाले दूर-दराज के मरीजों को प्रवेश तक नहीं करने दिया गया. अापके इस कृत्य से भयभीत और पर्याप्त चिकित्सा सेवा नहीं मिलने पर कई गंभीर मरीजों को उनके परिजन निजी अस्पताल में ले गये. इससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा. सूत्रों की मानें, तो प्रबंधन वीडियो क्लिपिंग व अखबार में छपी खबरें भी खंगाल रहा है.
यह है मामला
एक जून की रात रिम्स के मेडिसिन विभाग में भर्ती महिला मरीज गीता देवी की मौत हो गयी. उसके परिजनों ने इंजेक्शन देने के कुछ देर बाद ही मरीज की मौत होने का आरोप लगाते हुए नर्स की पिटाई कर दी. इस घटना की जानकारी मिलने के बाद दो जून की सुबह से ही रिम्स की नर्सें हड़ताल पर चली गयीं. नर्सों ने वार्डों में सेवाएं देनी बंद कर दी.
साथ ही इमरजेंसी सेवाएं भी ठप करा दीं. जूनियर डॉक्टर भी नर्सों के समर्थन में आ गये. इससे रिम्स की चिकित्सा व्यवस्था ध्वस्त हो गयी. अस्पताल में पूर्व निर्धारित 30 से 35 ऑपरेशन टाल दिये गये. ओटी खुला ही नहीं. ओपीडी भी संचालित नहीं हो सका. परामर्श लेने आये 600 से ज्यादा मरीजों को लौटना पड़ा. एक्सरे, सीटी स्कैन और पैथोलॉजी जांच व्यवस्था ठप रही. करीब 40 घंटे तक चली इस हड़ताल में 25 मरीजों की मौत हो गयी थी. इस घटना ने सरकार, स्वास्थ्य विभाग और आमलोगों को झकझोर कर रख दिया था. वहीं, हाइकोर्ट ने भी इस पर संज्ञान लेते हुए कार्रवाई का निर्देश दिया था.
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