रांची : 15 दिनों में बहाली का विज्ञापन निकालें, वरना बंद होगा गृह सचिव का वेतन : हाइकोर्ट

Updated at : 18 Jul 2018 7:27 AM (IST)
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रांची : 15 दिनों में बहाली का विज्ञापन निकालें, वरना बंद होगा गृह सचिव का वेतन : हाइकोर्ट

रांची : झारखंड हाइकोर्ट में मंगलवार को राज्य की जेलों में क्षमता से अधिक विचाराधीन सहित अन्य बंदियों को रखने काे लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. एक्टिंग चीफ जस्टिस डीएन पटेल व जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि राज्य की […]

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रांची : झारखंड हाइकोर्ट में मंगलवार को राज्य की जेलों में क्षमता से अधिक विचाराधीन सहित अन्य बंदियों को रखने काे लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. एक्टिंग चीफ जस्टिस डीएन पटेल व जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि राज्य की जेलों में जितने रिक्त पद हैं, उसे भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाये. खंडपीठ ने माैखिक रूप से कहा कि 15 दिनों के अंदर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया जाये.
यदि उक्त अवधि में विज्ञापन जारी नहीं किया जाता है, तो गृह सचिव का वेतन बंद रहेगा. खंडपीठ ने यह भी कहा कि जेलों में क्षमता से अधिक बंदी रखे गये हैं. निर्देश दिया कि जेल परिसर में खाली जगह पर अविलंब निर्माण कार्य शुरू किया जाये. जेलों की क्षमता बढ़ायी जाये. खंडपीठ ने रिपोर्ट को देखते हुए उक्त निर्देश दिया. राज्य सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दायर करने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई के लिए सात अगस्त की तिथि निर्धारित की गयी.
इससे पूर्व राज्य सरकार की अोर से अपर महाधिवक्ता जय प्रकाश ने पक्ष रखा. हाइकोर्ट द्वारा गठित अधिवक्ताअों की कमेटी की रिपोर्ट में पलामू जेल को छोड़ कर राज्य की अधिकतर जेलों में 60-70 प्रतिशत तक कर्मियों का पद रिक्त है तथा क्षमता से अधिक बंदी रखे जाने की बात कही गयी है. उल्लेखनीय है कि जेलों में क्षमता से अधिक बंदी रखे जाने व बड़े पैमाने पर कर्मियों की कमी को झारखंड हाइकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए उसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था.
जुलाई माह में मार्च तक की रिपोर्ट क्यों दे रहे हैं : हाइकोर्ट
रांची : झारखंड हाइकोर्ट में मंगलवार को आरोपी विधायकों के खिलाफ विभिन्न जिलों में दर्ज आपराधिक मामलों की स्पीडी ट्रायल व जांच काे लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. जस्टिस अपरेश कुमार सिंह व जस्टिस रत्नाकर भेंगरा की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि जुलाई माह में मार्च 2018 तक के ही मामलों की स्टेटस रिपोर्ट क्यों दाखिल किी गयी. अप-टू-डेट जानकारी क्यों नहीं दी गयी.
गृह विभाग के सचिव को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. खंडपीठ ने पूछा कि अदालतों में चल रहे ट्रायल की क्या स्थिति है. अभियोजन पक्ष के गवाहों का बयान दर्ज कराया जा रहा है या नहीं, किन मामलों में अनुसंधान चल रहा है आैर उसकी क्या स्थिति है, जुलाई माह तक का स्टेटस रिपोर्ट दाखिल किया जाये.
खंडपीठ ने शपथ पत्र के माध्यम से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया. साथ ही मामले की अगली सुनवाई के लिए छह अगस्त की तिथि निर्धारित की. इससे पूर्व प्रार्थी की अोर से अधिवक्ता राजीव कुमार ने बताया कि ट्रायल के दाैरान अभियोजन पक्ष के गवाहों का बयान दर्ज कराने में विलंब किया जा रहा है.
इसका प्रभाव मामलों के त्वरित निष्पादन पर पड़ रहा है. वहीं सरकार की अोर से शपथ पत्र दायर कर आरोपी विधायकों के खिलाफ चल रहे मामलों की अद्यतन स्थिति की जानकारी दी गयी. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी झारखंड अगेंस्ट करप्शन की अोर से जनहित याचिका दायर की गयी है.
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