कोर्ट के विपरीत आदेश वाली जमीन को छोड़ कर सबकी रसीद कटेगी

Updated at : 08 Jul 2018 3:41 AM (IST)
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कोर्ट के विपरीत आदेश वाली जमीन को छोड़ कर सबकी रसीद कटेगी

रांची : गैर मजरूआ मालिक प्रकृति की जमीन की रसीद काटने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी. एक सप्ताह के अंदर इससे संबंधित आदेश निर्गत हो जाने की उम्मीद है. राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार सचिव के माध्यम से यह आदेश जारी होगा. सारे उपायुक्तों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश दिये जायेंगे. इसके बाद मुख्यालय […]

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रांची : गैर मजरूआ मालिक प्रकृति की जमीन की रसीद काटने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी. एक सप्ताह के अंदर इससे संबंधित आदेश निर्गत हो जाने की उम्मीद है. राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार सचिव के माध्यम से यह आदेश जारी होगा. सारे उपायुक्तों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश दिये जायेंगे. इसके बाद मुख्यालय के स्तर से रसीद काटने का लॉक खुलेगा, तभी रैयत अपनी-अपनी जमीन का लगान भर सकेंगे. दो साल से ज्यादा समय से गैर मजरूआ मालिक प्रकृति की सारी जमीन का लगान लेना बंद है. अॉनलाइन व्यवस्था में इसके अॉप्शन को ही लॉक कर दिया गया है.

जानकारी के मुताबिक तत्कालीन मुख्य सचिव के आदेश के बाद राज्य भर में गैर मजरूआ जमीन की रसीद निर्गत होनी बंद हो गयी थी. यह माना गया था कि अवैध जमाबंदी वाली जमीन की रसीद निर्गत हो रही है, जो सही नहीं है. ऐसे में यह आदेश दिया गया था कि गैर मजरूआ जमीन की रसीद निर्गत करने या लगान लेने के पहले जमीन के बारे में पूरा सत्यापन कर लिया जाये. यानी अंचल से लेकर उपायुक्त तक के माध्यम से सत्यापन होने के बाद अगर जमीन की जमाबंदी पूरी तरह सही पायी जाती है, तो मुख्यालय को रिपोर्ट के बाद ही इसके लगान लेने का अॉप्शन खुलेगा, लेकिन यहां रिपोर्ट के बावजूद भी रसीद निर्गत नहीं हो रही थी. पूरा राज्य इसमें फंसा हुआ था. कागजात सही होने के बाद भी लोग लगान नहीं दे पा रहे थे. मुख्यमंत्री की पहल पर कैबिनेट की बैठक में इस आदेश को निरस्त कर दिया गया है. यानी अब गैर मजरूआ जमीन की रसीद कटेगी.
जानकारी के अनुसार वैसी गैर मजरूआ जमीन जिसमें न्यायालय द्वारा विपरीत आदेश पारित किया गया है, उसकी रसीद नहीं कटेगी. जिला स्तर पर इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को दी जायेगी, ताकि इसके रसीद काटने का अॉप्शन न खुले. अगर जिला स्तर पर किसी जमीन को पूरी तरह संदिग्ध माना जाता है, तो ऐसे मामले में भी सरकार रसीद काटने के बजाय जमाबंदी को लेकर न्यायालय में जायेगी. शेष सारी गैर मजरुआ जमीन की रसीद कटेगी.
एक सप्ताह के अंदर गैर मजरूआ प्रकृति की जमीन की रसीद काटने की प्रक्रिया का आदेश निर्गत हो जाने की उम्मीद
रैयतों को मिली राहत
सरकार के इस फैसले से राज्य की बड़ी आबादी को राहत मिली है. बड़ी संख्या में ऐसे रैयत हैं, जिनकी जमीन गैर मजरूआ मालिक की है. बड़ी संख्या में ऐसे किसान भी हैं. रसीद निर्गत नहीं होने से सब फंसे हुए थे. अनिश्चितता की स्थिति थी. शहर में जमीन लेकर लोग फंस गये थे. रसीद नहीं होने के कारण नक्शा नहीं बन रहा था. बैंकों से ऋण नहीं मिल रहा था.
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