रांची : चाईबासा वन भूमि अतिक्रमण मामले में जांच का आदेश
Updated at : 03 Jul 2018 12:49 AM (IST)
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विभागीय सचिव ने मांगी पूरी जानकारी, रेंजर आनंद कुमार ने उठाया था मामला मनोज सिंह रांची : चाईबासा और जमशेदपुर इलाके में वन भूमि पर अतिक्रमण मामले की जांच करने का आदेश वन विभाग के अपर मुख्य सचिव इंदु शेखर चतुर्वेदी ने दिया है. उन्होंने पीसीसीएफ से पूरे मामले में तथ्य परख रिपोर्ट देने को […]
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विभागीय सचिव ने मांगी पूरी जानकारी, रेंजर आनंद कुमार ने उठाया था मामला
मनोज सिंह
रांची : चाईबासा और जमशेदपुर इलाके में वन भूमि पर अतिक्रमण मामले की जांच करने का आदेश वन विभाग के अपर मुख्य सचिव इंदु शेखर चतुर्वेदी ने दिया है. उन्होंने पीसीसीएफ से पूरे मामले में तथ्य परख रिपोर्ट देने को कहा है.
इससे संबंधित आदेश विभाग के उप सचिव सुनील कुमार ने जारी किया है. चाईबासा और जमशेदपुर में वन भूमि पर अतिक्रमण का मामला वहां के रेंजर आनंद कुमार ने उठाया था. उन्होंने विभाग को रिपोर्ट देकर इसकी जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग की थी. साथ ही इसमें लिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई का आग्रह किया था.
अपनी रिपोर्ट में आनंद कुमार ने लिखा था कि पद भार ग्रहण करने के बाद उन्होंने कार्य नियोजना अंचल के अंतर्गत आनेवाले वन प्रमंडलों की भूमि के अतिक्रमण, कराये गये वन रोपण व अपयोजित वन भूमि के रकबे की जांच की. इसकी स्थल जांच भी की गयी. इसमें कई गंभीर अनियमितता पायी गयी. इसमें भू-माफिया द्वारा वन भूमि की बिक्री का मामला भी प्रकाश में आया.
वन भूमि में अतिक्रमण के नाम पर लकड़ी माफिया को वन भूमि देने का मामला भी सामने आया. एक ही वन भूमि पर कई योजनाओं का संचालन का मामला प्रकाश में आया. इसमें भारतीय वन सेवा के अधिकारियों की संलिप्तता भी नजर आयी. कई सरकारी और गैर सरकारी खनन संस्थाओं को अपयोजित वन भूमि के लीज अवधि समाप्त होने के बाद भी माइनर और मेजर मिनरल के अवैध खनन होने का मामला भी सामने आया.
बिना काम कराये वेतन दिया गया
अपनी रिपोर्ट में उन्होंने लिखा है कि कार्य नियोजना अंचल, चाईबासा में पदस्थापित किसी भी वन क्षेत्र पदाधिकारी को स्टॉक मैपिंग कार्य मद में राशि का आवंटन नहीं हुआ. सभी कर्मियों को बिना काम कराये वेतन दिया गया. कार्य नियोजना अंचल में पदस्थापित वन क्षेत्र पदाधारियों का मुख्य काम अंचल के अंतर्गत आनेवाले प्रमंडलों के स्टॉक मैपिंग के लिए वन भूमि के अतिक्रमण वाले इलाकों को चिह्नित करना है.
वन भूमि पर कराये गये वन रोपण के सरवाइवल फीसदी के आधार पर वनरोपण के समुचित एरिया से उसको वापस करना शामिल है. वन भूमि का सीमांकन करना और पिलर लगाना भी है.
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