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रांची : सांसद कड़िया मुंडा के घर पहुंचे मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने कहा, सरकार संवाद करना चाहती है, पर किससे करे?

Updated at : 29 Jun 2018 8:27 AM (IST)
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रांची : सांसद कड़िया मुंडा के घर पहुंचे मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने कहा, सरकार संवाद करना चाहती है, पर किससे करे?

रांची : ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा गुरुवार को दिन के करीब चार बजे अनिगड़ा स्थित सांसद कड़िया मुंडा के आवास पहुंचे. वहां उन्होंने प्रभात खबर से खूंटी के मौजूदा माहौल पर बातचीत की. सरकार व ग्रामीणों के बीच संवाद की जरूरत संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार ग्रामीणों से बात करना चाहती […]

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रांची : ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा गुरुवार को दिन के करीब चार बजे अनिगड़ा स्थित सांसद कड़िया मुंडा के आवास पहुंचे. वहां उन्होंने प्रभात खबर से खूंटी के मौजूदा माहौल पर बातचीत की.
सरकार व ग्रामीणों के बीच संवाद की जरूरत संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार ग्रामीणों से बात करना चाहती है, पर किससे करे? सरकार के साथ संघर्ष कर रहे पत्थलगड़ी समर्थकों की अोर से इसकी कोई पहल नहीं हो रही है. श्री मुंडा के अनुसार क्षेत्र में विकास संबंधी कोई समस्या नहीं है. यहां पहाड़ पर भी स्कूल हैं.
उन्होंने सरकार की जल छाजन योजनाअों सहित सड़क-बिजली संबंधी कार्य गिनाये व कहा कि मामूली समस्या को छोड़ ऐसी कोई बड़ी बात नहीं है, जिसे ग्रामीणों के बीच असंतोष की वजह बतायी जाये.
उन्होंने कहा कि खूंटी में कोई समानांतर सरकार नहीं बल्कि असली सरकार ही है. नीलकंठ ने कहा कि जो पत्थलगड़ी कुर्सीनामा के लिए थी, उसे आज संविधान की गलत व्याख्या कर अलग रूप दिया जा रहा है. इसके लिए हम लोगों को जागरूक करेंगे.
सखी मंडल व ग्रामसभा का इसमें सहारा लिया जायेगा. श्री मुंडा ने कहा कि इलाके में हालात सामान्य होने के बाद विकास कार्यों को अौर गति देने संबंधी अॉफलाइन एक्शन पर हम काम करेंगे. सरकार ने पांच पिछड़े जिलों के लिए बजटीय प्रावधान भी किया है. इसके तहत खूंटी सहित अन्य जिलों को 50-50 करोड़ रु मिलेंगे.
संवाद की थोड़ी कमी है
खूंटी जिले की खूंटी प्रखंड प्रमुख रुकमिला देवी भी सांसद कड़िया मुंडा के आवास पर नीलकंठ सिंह मुंडा के साथ मौजूद थीं. बल प्रयोग के बजाय सरकार व जनप्रतिनिधियों के साथ स्थानीय लोगों के संवाद के मुद्दे पर रुकमिला ने कहा कि इस मोर्चे पर थोड़ी कमी है.
इसे दूर करना चाहिए. रुकमिला के अनुसार भी क्षेत्र में विकास हुआ है. उन्होंने सवाल किया कि जब ग्रामसभा के माध्यम से तथा ग्रामीणों की पसंद से ही विकास योजनाअों का चयन किया जा रहा है, तो बाद में इसकी शिकायत नहीं की जा सकती. रुकमिला ने कहा कि खूंटी के अशांत इलाके में लोगों को सरकार के साथ जोड़ा जायेगा.

पुलिस भय पैदा करती है
युसूफ पूर्ति के गांव उदबुरु से खूंटी लौटने के दौरान एक शख्स मोटरसाइकिल से प्रभात खबर की टीम का पीछा करता दिखा. गाड़ी रोक कर जब इन सज्जन को रोकने का इशारा किया गया, तो वह रुक गये. पूछने पर कहा कि वह अड़की के पास सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं. सच या झूठ अपना नाम उन्होंने मंगी दय बताया.
खूंटी की अशांति व पत्थलगड़ी के मुद्दे पर मंगी ने कहा कि वह खुद अक्सर होने वाली पुलिसिया पूछताछ से परेशान रहते हैं. इसलिए मन से वह ग्रामीणों के साथ हैं. मास्टर साहब ने कहा कि गांव वालों व सरकार के बीच बातचीत नहीं हो रही. इससे समस्या बढ़ रही है.
खूंटी घटना की न्यायिक जांच हो: वामदल
रांची : खूंटी में महिलाओं पर किये गये बर्बतापूर्ण अत्याचार बेहद शर्मनाक हैं. वाम दलों ने इस घटना की जांच न्यायिक जांच आयोग से कराने की मांग सरकार से की है.
इस घटना की जमीनी सच्चाई को उजागर करने के लिए उच्च न्यायालय के पीठासीन न्यायाधीश द्वारा न्यायिक जांच आयोग का गठन करने की भी मांग की गयी है. वामदल के नेता इस पूरे मामले को लेकर राज्यपाल से मिलेगा और जांच आयोग गठन करने की भी मांग करेगा.
वामपंथी दलों के नेताओं की बैठक गुरुवार को सीपीआइ-एम कार्यालय में हुई. नेताओं ने कहा कि अपराधी को चिह्नित कर सजा देने के बजाये इसे राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया जा रहा है. बैठक में सीपीआइ-एम के गोपीकांत बख्शी, सुरजीत सिन्हा, सीपीआइ-माले के जनार्दन पासवान, मासस के मिथिलेश सिंह, सीपीआइ के महेंद्र पाठक, अजय सिंह व एसयूसीआइ-सी के सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह मौजूद थे.
मुख्यमंत्री का पुतला दहन
रांची : संयुक्त आदिवासी सामाजिक संगठन के तत्वावधान में गुरुवार को मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया गया. पुतला दहन खूंटी में ग्रामीणों पर किये गये लाठीचार्ज अौर मानवाधिकार के उल्लंघन के खिलाफ किया गया.
शशि पन्ना ने कहा कि खूंटी में जमीन लूट के खिलाफ पत्थलगड़ी हो रही है. अरुण नगेशिया ने खूंटी के प्रशासनिक कार्रवाई को इंसानियत अौर मानवाधिकार की हत्या करार दिया.
कालीचरण पाहन ने कहा कि लातेहार के बूढ़ापहाड़ पर छह जवान शहीद हो गये पर सरकार उग्रवादियों से लड़ना छोड़ ग्रामीणों से लड़ने के लिए पुलिस अौर अर्द्ध सैनिक बलों को झोंक रही है. पुतला दहन में अजय उरांव, हेमंत कुजूर, कृष्णा लकड़ा, आकाश तिर्की सहित अन्य उपस्थित थे.
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